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Lalitpur: अटल आवासीय विद्यालय में बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर अलर्ट हुआ प्रशासन, 300 की कराई गई स्क्रीनिंग
Fri, 17 Jul 2026 02:14 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 02:14 AM IST
सार
विद्यालय में मौजूद करीब 300 विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच कराई गई। एहतियात के तौर पर रातभर निगरानी के लिए चिकित्सकों की टीमें भी विद्यालय में तैनात की गई हैं।
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गंभीर बच्चों को जिला अस्पताल भेजता प्रशासन।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
धाैर्रा स्थित अटल आवासीय विद्यालय में भोजन के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन अलर्ट हो गया। अधिकारियों की निगरानी में बीमार बच्चों का तत्काल उपचार कराया गया और विद्यालय में मौजूद करीब 300 विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच (स्क्रीनिंग) कराई गई। एहतियात के तौर पर रातभर निगरानी के लिए चिकित्सकों की टीमें भी विद्यालय में तैनात की गई हैं।
जिलाधिकारी के निर्देश पर उप जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. इम्तियाज अहमद और चिकित्सकों की टीमें विद्यालय पहुंचीं। जिन बच्चों को पेट दर्द, उल्टी और अन्य शिकायतें थीं, उन्हें प्राथमिक उपचार देने के बाद मेडिकल कॉलेज भेजा गया। वहीं अन्य करीब 300 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जांच में अधिकांश बच्चे स्वस्थ पाए गए। रात के समय भी दो चिकित्सकीय टीमें विद्यालय में तैनात रहीं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए दो एंबुलेंस भी मौके पर उपलब्ध रखी गईं।
राज्यमंत्री और डीएम ने मेडिकल कॉलेज पहुंचकर जाना हाल
घटना की सूचना मिलते ही श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। बच्चों के भर्ती होने के बाद उन्होंने वार्ड में जाकर उनका हालचाल जाना और चिकित्सकों से उपचार की जानकारी ली। रो रहे बच्चों को उन्होंने ढांढस बंधाया और जल्द स्वस्थ होने का भरोसा दिया। इसके बाद जिलाधिकारी सत्य प्रकाश भी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने भर्ती बच्चों से बातचीत कर उनकी स्थिति जानी और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक व विशेषज्ञ चिकित्सकों को बेहतर उपचार तथा लगातार निगरानी के निर्देश दिए।
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भोजन और खाद्य सामग्री के नमूने जांच के लिए भेजे
जिलाधिकारी के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम विद्यालय पहुंची और तैयार भोजन के साथ-साथ उपयोग में लाई गई सूखी खाद्य सामग्री के नमूने एकत्र किए। सभी नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही बच्चों के बीमार होने के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
रेलवे क्रॉसिंग पर कुछ देर रुकी एंबुलेंस
विद्यालय रेलवे क्रॉसिंग के दूसरी ओर स्थित होने के कारण बच्चों को मेडिकल कॉलेज ले जाते समय एंबुलेंस को कुछ देर रेलवे फाटक पर रुकना पड़ा। फाटक खुलने में विलंब होने से थोड़ी देर के लिए आवाजाही प्रभावित हुई। बाद में दूसरी ओर एंबुलेंस की व्यवस्था कर बच्चों को जल्द मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया।
मेडिकल कॉलेज ने पहले से कर ली थीं सभी तैयारियां
बच्चों के मेडिकल कॉलेज लाए जाने की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन सक्रिय हो गया। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गजेंद्र सिंह, मीडिया प्रभारी डॉ. विशाल जैन, बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आकृति यादव सहित विशेषज्ञ चिकित्सक, सीनियर और जूनियर डॉक्टर अस्पताल पहुंच गए। बाल रोग वार्ड की साफ-सफाई, अतिरिक्त बेड, दवाइयों की उपलब्धता और ऑक्सीजन लाइन की जांच पहले ही पूरी कर ली गई थी। बच्चों के पहुंचते ही उनका उपचार शुरू कर दिया गया।
चार मेडिकल टीमों ने संभाला मोर्चा
बच्चों के बीमार होने की सूचना पर चार अलग-अलग चिकित्सकीय टीमें विद्यालय पहुंचीं। इनमें मेडिकल कॉलेज की दो बाल रोग विशेषज्ञ टीम, जिला संक्रामक रोग नियंत्रण टीम, सीएचसी बिरधा की चिकित्सकीय टीम और स्थानीय पीएचसी की टीम शामिल थीं। उपचार के बाद भी एहतियातन दो चिकित्सकीय टीमें विद्यालय में तैनात रखी गईं।
बच्चों ने बताई आपबीती -
दोपहर में करीब डेढ़ बजे खाना खाया था। कुछ देर बाद नींद आने लगी और पेट में दर्द शुरू हो गया। -परी
खाना खाने के थोड़ी देर बाद उल्टी हो गई। डॉक्टरों ने दवा दी, अब पहले से आराम है।-अनुज
भोजन के बाद अचानक पेट में दर्द और चक्कर आने लगे। दवा मिलने के बाद अब धीरे-धीरे राहत मिल रही है। -रुपेश गौतम
इनका यह है कहना
बच्चों के उल्टी और पेट दर्द की शिकायत मिलने पर उन्हें तत्काल मेडिकल कॉलेज में भर्ती कर उपचार कराया गया। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - मनोहर लाल पंथ, श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री
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जिलाधिकारी के निर्देश पर उप जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. इम्तियाज अहमद और चिकित्सकों की टीमें विद्यालय पहुंचीं। जिन बच्चों को पेट दर्द, उल्टी और अन्य शिकायतें थीं, उन्हें प्राथमिक उपचार देने के बाद मेडिकल कॉलेज भेजा गया। वहीं अन्य करीब 300 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जांच में अधिकांश बच्चे स्वस्थ पाए गए। रात के समय भी दो चिकित्सकीय टीमें विद्यालय में तैनात रहीं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए दो एंबुलेंस भी मौके पर उपलब्ध रखी गईं।
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राज्यमंत्री और डीएम ने मेडिकल कॉलेज पहुंचकर जाना हाल
घटना की सूचना मिलते ही श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। बच्चों के भर्ती होने के बाद उन्होंने वार्ड में जाकर उनका हालचाल जाना और चिकित्सकों से उपचार की जानकारी ली। रो रहे बच्चों को उन्होंने ढांढस बंधाया और जल्द स्वस्थ होने का भरोसा दिया। इसके बाद जिलाधिकारी सत्य प्रकाश भी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने भर्ती बच्चों से बातचीत कर उनकी स्थिति जानी और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक व विशेषज्ञ चिकित्सकों को बेहतर उपचार तथा लगातार निगरानी के निर्देश दिए।
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भोजन और खाद्य सामग्री के नमूने जांच के लिए भेजे
जिलाधिकारी के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम विद्यालय पहुंची और तैयार भोजन के साथ-साथ उपयोग में लाई गई सूखी खाद्य सामग्री के नमूने एकत्र किए। सभी नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही बच्चों के बीमार होने के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
रेलवे क्रॉसिंग पर कुछ देर रुकी एंबुलेंस
विद्यालय रेलवे क्रॉसिंग के दूसरी ओर स्थित होने के कारण बच्चों को मेडिकल कॉलेज ले जाते समय एंबुलेंस को कुछ देर रेलवे फाटक पर रुकना पड़ा। फाटक खुलने में विलंब होने से थोड़ी देर के लिए आवाजाही प्रभावित हुई। बाद में दूसरी ओर एंबुलेंस की व्यवस्था कर बच्चों को जल्द मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया।
मेडिकल कॉलेज ने पहले से कर ली थीं सभी तैयारियां
बच्चों के मेडिकल कॉलेज लाए जाने की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन सक्रिय हो गया। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गजेंद्र सिंह, मीडिया प्रभारी डॉ. विशाल जैन, बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आकृति यादव सहित विशेषज्ञ चिकित्सक, सीनियर और जूनियर डॉक्टर अस्पताल पहुंच गए। बाल रोग वार्ड की साफ-सफाई, अतिरिक्त बेड, दवाइयों की उपलब्धता और ऑक्सीजन लाइन की जांच पहले ही पूरी कर ली गई थी। बच्चों के पहुंचते ही उनका उपचार शुरू कर दिया गया।
चार मेडिकल टीमों ने संभाला मोर्चा
बच्चों के बीमार होने की सूचना पर चार अलग-अलग चिकित्सकीय टीमें विद्यालय पहुंचीं। इनमें मेडिकल कॉलेज की दो बाल रोग विशेषज्ञ टीम, जिला संक्रामक रोग नियंत्रण टीम, सीएचसी बिरधा की चिकित्सकीय टीम और स्थानीय पीएचसी की टीम शामिल थीं। उपचार के बाद भी एहतियातन दो चिकित्सकीय टीमें विद्यालय में तैनात रखी गईं।
बच्चों ने बताई आपबीती -
दोपहर में करीब डेढ़ बजे खाना खाया था। कुछ देर बाद नींद आने लगी और पेट में दर्द शुरू हो गया। -परी
खाना खाने के थोड़ी देर बाद उल्टी हो गई। डॉक्टरों ने दवा दी, अब पहले से आराम है।-अनुज
भोजन के बाद अचानक पेट में दर्द और चक्कर आने लगे। दवा मिलने के बाद अब धीरे-धीरे राहत मिल रही है। -रुपेश गौतम
इनका यह है कहना
बच्चों के उल्टी और पेट दर्द की शिकायत मिलने पर उन्हें तत्काल मेडिकल कॉलेज में भर्ती कर उपचार कराया गया। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - मनोहर लाल पंथ, श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री