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Lalitpur News: अंजनी मेले में जामनी बांध से छोड़ा जाएगा पानी
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सात दिन नहर के जरिये मेले में पहुंचने वाले लोगों को मिलेगा पानी
पांच क्यूसेक पानी दाईं नहर से छोड़कर टीकमगढ़ रजवाहा के जरिये पहुंचेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिले के सबसे पुराने बांधों में शुमार जामनी बांध आम लोगों सहित किसानों के लिए भी पानी उपलब्ध कराता है। वहीं, इस बांध से धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी पानी उपलब्ध कराया जाता है। महराैनी क्षेत्र में अंजनी माता मंदिर पर लगने वाले प्राचीन मेले के लिए भी इस बांध की नहर का संचालन किया जाता है। पांच क्यूसेक पानी नहर के जरिये छोड़ा जाता है। इस साल 30 मार्च से 5 अप्रैल तक लगने वाले मेले के लिए दाईं जामनी नहर के टीकमगढ़ रजवाहा से यह पानी अंजनी मेले तक पहुंचाया जाएगा। इस पानी का उपयोग यहां आने वाले श्रद्धालु करते हैं।
जामनी बांध का निर्माण वर्ष 1973 में हुआ था। इस बांध का पूर्ण जलस्तर 396.39 मीटर है और न्यूनतम 403.55 मीटर है। बांध में 92.87 एमसीएम पानी भंडारित करने की क्षमता है। इसमें सिंचाई के लिए 67 एमसीएम पानी आरक्षित है। पेयजल व अन्य उपयोग के लिए 1.42 एमसीएम है। उपयोगी जल की मात्रा 84 एमसीएम निश्चित की गई है। जामनी बांध से सिंचाई के लिए 230 किलोमीटर लंबी नहरें संचालित होती हैं। इसके जरिये 10 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई की जाती है। इसमें सर्वाधिक सिंचाई रबी के सीजन में की जाती है। इसके साथ यूपी-एमपी के बीच हुए समझौते के आधार पर बांध का 17 फीसदी पानी मध्य प्रदेश के लिए भी आरक्षित रहता है और मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ के लिए सिंचाई के लिए बांध से 13 किमी लंबी नहर के जरिये 60 क्यूसेक पानी प्रतिवर्ष दिया जाता है।
इसके साथ जामनी बांध से महरौनी क्षेत्र स्थित अंजनी माता मंदिर पर प्रतिवर्ष लगने वाले मेले के लिए भी पानी दिया जाता है। इस वर्ष 30 मार्च से 5 अप्रैल तक लगने वाले मेला के लिए पानी दिया जाएगा। सहायक अभियंता रीतेश बंसल ने बताया कि महरौनी क्षेत्र स्थित अंजनी माता मंदिर पर लगने वाले मेले में बांध से प्रतिवर्ष पानी छोड़ा जाता है। बांध से छोड़ा गया पानी टीकमगढ़ रजवाहा के माध्यम से पहुंचता है। जिलाधिकारी की अनुमति के बाद इस पानी को दिया जाता है।
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पांच क्यूसेक पानी दाईं नहर से छोड़कर टीकमगढ़ रजवाहा के जरिये पहुंचेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिले के सबसे पुराने बांधों में शुमार जामनी बांध आम लोगों सहित किसानों के लिए भी पानी उपलब्ध कराता है। वहीं, इस बांध से धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी पानी उपलब्ध कराया जाता है। महराैनी क्षेत्र में अंजनी माता मंदिर पर लगने वाले प्राचीन मेले के लिए भी इस बांध की नहर का संचालन किया जाता है। पांच क्यूसेक पानी नहर के जरिये छोड़ा जाता है। इस साल 30 मार्च से 5 अप्रैल तक लगने वाले मेले के लिए दाईं जामनी नहर के टीकमगढ़ रजवाहा से यह पानी अंजनी मेले तक पहुंचाया जाएगा। इस पानी का उपयोग यहां आने वाले श्रद्धालु करते हैं।
जामनी बांध का निर्माण वर्ष 1973 में हुआ था। इस बांध का पूर्ण जलस्तर 396.39 मीटर है और न्यूनतम 403.55 मीटर है। बांध में 92.87 एमसीएम पानी भंडारित करने की क्षमता है। इसमें सिंचाई के लिए 67 एमसीएम पानी आरक्षित है। पेयजल व अन्य उपयोग के लिए 1.42 एमसीएम है। उपयोगी जल की मात्रा 84 एमसीएम निश्चित की गई है। जामनी बांध से सिंचाई के लिए 230 किलोमीटर लंबी नहरें संचालित होती हैं। इसके जरिये 10 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई की जाती है। इसमें सर्वाधिक सिंचाई रबी के सीजन में की जाती है। इसके साथ यूपी-एमपी के बीच हुए समझौते के आधार पर बांध का 17 फीसदी पानी मध्य प्रदेश के लिए भी आरक्षित रहता है और मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ के लिए सिंचाई के लिए बांध से 13 किमी लंबी नहर के जरिये 60 क्यूसेक पानी प्रतिवर्ष दिया जाता है।
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इसके साथ जामनी बांध से महरौनी क्षेत्र स्थित अंजनी माता मंदिर पर प्रतिवर्ष लगने वाले मेले के लिए भी पानी दिया जाता है। इस वर्ष 30 मार्च से 5 अप्रैल तक लगने वाले मेला के लिए पानी दिया जाएगा। सहायक अभियंता रीतेश बंसल ने बताया कि महरौनी क्षेत्र स्थित अंजनी माता मंदिर पर लगने वाले मेले में बांध से प्रतिवर्ष पानी छोड़ा जाता है। बांध से छोड़ा गया पानी टीकमगढ़ रजवाहा के माध्यम से पहुंचता है। जिलाधिकारी की अनुमति के बाद इस पानी को दिया जाता है।
