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Maharajganj News: आरटीई के तहत धांधली की मुख्यमंत्री से शिकायत

संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Tue, 03 Mar 2026 01:36 AM IST
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Complaint to the Chief Minister about irregularities under RTE
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सिसवा बाजार। शिक्षा विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों की मिलीभगत से शिक्षा के अधिकार अधिनियम में धांधली की शिकायत मुख्यमंत्री समेत आला अधिकारियों से की गई है। शिकायतकर्ता ने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
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जानकारी के अनुसार, भाजपा एसटी मोर्चा के क्षेत्रीय महामंत्री धर्मनाथ खरबार ने शिकायत पत्र में आरटीई के जरिये सिसवा विकास क्षेत्र में अभिभावकों को परेशान करने का आरोप लगाया है। भेजे गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम से नियम यह है कि नगर पालिका परिषद क्षेत्र के विद्यालय नगरीय (अर्बन) और ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालय (रूरल) में आते हैं।
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इसके तहत सभी बड़े विद्यालयों को रूरल यानी ग्रामीण क्षेत्र में जानबूझकर मैप किया गया है, ताकि इससे पात्र बच्चों को मिलने वाले लाभ से वंचित किया जा सके। शिकायतकर्ता का कहना है कि सिसवा अर्बन मैप में सिर्फ एक माध्यमिक विद्यालय को दिखाया गया है, जबकि नगरीय क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक निजी विद्यालय संचालित हैं।
आरोप है कि विभागीय अधिकारी बड़े स्कूलों से मोटी रकम लेकर इसमें बदलाव नहीं करते। इसके चलते अर्बन क्षेत्र के बच्चे जब आधार कॉर्ड को आरटीई के ऑनलाइन पोर्टल पर प्रेषित करते हैं, तब अर्बन क्षेत्र में कोई विद्यालय नहीं मिलता, जिससे ज्यादा से ज्यादा बच्चे पात्र होते हुए भी इस अधिनियम का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं।
उल्लेखनीय है कि आरटीई के तहत पात्र बच्चों को सरकार मुफ्त शिक्षा और ड्रेस मुहैया करवाती है, जिसके लिए सरकार प्रति बच्चा पांच हजार रुपये अभिभावक के बैंक खाते में भेजती है। शिक्षा विभाग की इस लापरवाही का फायदा उन सभी विद्यालयों को मिलता है जो अर्बन एरिया में हैं।
इसके चलते विद्यालय आरटीई के तहत नामांकन करने से बच जाते हैं। आरोप यह भी है कि विभागीय जिम्मेदार विद्यालयों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावक इस अधिनियम का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। वहीं अपात्रों से पैसे लेकर कागजों में हेरफेर कर पात्र बनाकर विद्यालय एलॉट कर दिया जाता है।
इस संदर्भ में बेसिक शिक्षा अधिकारी रिद्धि पांडेय ने बताया कि आरटीई के तहत विद्यालयों की मैपिंग राज्य परियोजना कार्यालय, लखनऊ से ही होती है। वैसे इस तरह की कोई शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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