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Maharajganj News: फर्नीचर दुकान की आड़ में कीमती लकड़ियों का अवैध धंधा

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jan 2026 02:25 AM IST
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Illegal business of precious woods under the guise of furniture shop
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महराजगंज/निचलौल। जिले में फर्नीचर की वैध दुकानों की आड़ में सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के जंगलों से कीमती लकड़ियों का अवैध कटान कर बड़े पैमाने पर कारोबार किया जा रहा है। इस धंधे से जुड़े लोग मोटी कमाई कर रहे हैं, जबकि वन संपदा की सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद जंगलों में कटान थम नहीं पा रहा है।
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इस अवैध कारोबार का खुलासा 24 जनवरी को उस समय हुआ, जब वन कर्मियों की टीम ने मधवलिया वन रेंज के जंगल से सटे गांव औराटार में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान एक पिकअप वाहन पर लदी अवैध साखू की लकड़ी बरामद की गई और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें एक आरोपी हिमाचल प्रदेश और दूसरा सिसवा बाजार का निवासी बताया गया है।
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धंधे से जुड़े एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शहरों से लेकर जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों तक अधिकांश लकड़ी कारोबारियों के पास न तो वैध लाइसेंस है और न ही लकड़ी के स्रोत से संबंधित जरूरी दस्तावेज।
जिन दुकानों के पास लाइसेंस है, वे भी कागजी परमिट के सहारे अवैध लकड़ी को वैध बनाकर बेच रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जिस पेड़ के नाम पर परमिट लिया जाता है, वास्तव में उसका कटान नहीं होता। जंगल से अन्य संरक्षित पेड़ों की लकड़ी काटकर उसी परमिट पर बाजार में उतार दी जाती है। कागजात पूरे होने के कारण कार्रवाई से बचाव हो जाता है।
प्रदेश के बड़े शहरों में दरवाजे, चौखट और खिड़कियों के लिए साखू और सागौन जैसी कीमती लकड़ियों की भारी मांग है। इसी मांग के चलते यह अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है। जानकारी के बावजूद ठोस कार्रवाई न होने से धंधेबाजों के हौसले बुलंद हैं।
बताया गया कि जंगल से सटे कुछ कारोबारी, वैध दुकानों के संचालकों और बिचौलियों के साथ मिलकर रात के अंधेरे में कीमती लकड़ियों की कटान करते हैं। लकड़ी को पहले ग्रामीण इलाकों में डंप किया जाता है और फिर वाहनों से दुकानों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद दस्तावेज तैयार कर स्थानीय बाजारों के साथ ही अन्य बड़े शहरों में सप्लाई की जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में कई प्रभावशाली लोगों की भी भूमिका है।
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