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Maharajganj News: लहरें कम होने से प्रभावित हुआ जल प्रवाह तो फैली बदबू
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गोरखपुर। रामगढ़ताल में इन दिनों काई की मात्रा तेजी से बढ़ने के कारण जल की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। ताल की सतह पर काई जमने से पानी में लहरें कम दिखाई दे रही हैं और जल का प्रवाह भी प्रभावित हो रहा है। इससे आसपास के इलाकों, विशेष रूप से कुनराघाट, मोहद्दीपुर और पैडलेगंज की ओर बदबू फैलने की शिकायतें आ रही हैं। हालांकि, दो दिनों से हो रही सफाई के बाद अब बदबू भी कम हो गई है।
स्थिति को सुधारने के लिए पहले ताल में लगे स्लूस गेट खोले गए थे ताकि पानी का प्रवाह बढ़ सके और ऑक्सीजन की मात्रा संतुलित रहे। इसके अलावा ताल में लगे फव्वारों को भी चालू कर दिया गया है और उनकी संचालन अवधि बढ़ाई गई है। इसके बावजूद कुछ हिस्सों में पानी का ठहराव बना हुआ है, जिससे समस्या पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाई है।
पर्यावरणविद प्रो. गोविंद पांडेय के अनुसार, रामगढ़ताल में लगातार ऑर्गेनिक मैटर जमा हो रहा है। इसके कारण पानी में घुलित ऑक्सीजन (डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन) का स्तर कम हो रहा है। जब ऑक्सीजन की कमी होती है तो पानी में एनेरोबिक डिकंपोजिशन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिससे दुर्गंध पैदा होती है। ताल में गिरने वाले सीवेज के पानी को बिना ट्रीटमेंट के छोड़ना बड़ी समस्या बन रहा है। वर्तमान में गंदा पानी ताल के एक हिस्से में आकर रुक जाता है, जिससे प्रदूषण और बढ़ जाता है। इस समस्या के समाधान के लिए ताल में एरेशन की व्यवस्था करना जरूरी है।
प्रो. गोविंद का कहना है कि ताल में मैकेनिकल एरेटर लगाए जाएं जिससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाया जा सके। साथ ही सतह पर तैर रही गंदगी और कचरे की तत्काल सफाई भी आवश्यक है। जल के बेहतर प्रवाह और नियमित सफाई से ही रामगढ़ताल की पारिस्थितिकी और जल गुणवत्ता को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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स्थिति को सुधारने के लिए पहले ताल में लगे स्लूस गेट खोले गए थे ताकि पानी का प्रवाह बढ़ सके और ऑक्सीजन की मात्रा संतुलित रहे। इसके अलावा ताल में लगे फव्वारों को भी चालू कर दिया गया है और उनकी संचालन अवधि बढ़ाई गई है। इसके बावजूद कुछ हिस्सों में पानी का ठहराव बना हुआ है, जिससे समस्या पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाई है।
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पर्यावरणविद प्रो. गोविंद पांडेय के अनुसार, रामगढ़ताल में लगातार ऑर्गेनिक मैटर जमा हो रहा है। इसके कारण पानी में घुलित ऑक्सीजन (डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन) का स्तर कम हो रहा है। जब ऑक्सीजन की कमी होती है तो पानी में एनेरोबिक डिकंपोजिशन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिससे दुर्गंध पैदा होती है। ताल में गिरने वाले सीवेज के पानी को बिना ट्रीटमेंट के छोड़ना बड़ी समस्या बन रहा है। वर्तमान में गंदा पानी ताल के एक हिस्से में आकर रुक जाता है, जिससे प्रदूषण और बढ़ जाता है। इस समस्या के समाधान के लिए ताल में एरेशन की व्यवस्था करना जरूरी है।
प्रो. गोविंद का कहना है कि ताल में मैकेनिकल एरेटर लगाए जाएं जिससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाया जा सके। साथ ही सतह पर तैर रही गंदगी और कचरे की तत्काल सफाई भी आवश्यक है। जल के बेहतर प्रवाह और नियमित सफाई से ही रामगढ़ताल की पारिस्थितिकी और जल गुणवत्ता को सुरक्षित रखा जा सकता है।