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Maharajganj News: मैत्री बस सेवा की आड़ में खुला खेल सुरक्षा ताक पर, राजस्व की भी क्षति
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सोनौली। भारत-नेपाल मैत्री बस सेवा के नाम पर सोनौली सीमा पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। दोनों देशों के बीच यात्रियों की सुविधा के लिए शुरू की गई मैत्री बस सेवा की आड़ में 20 से अधिक अवैध बसें धड़ल्ले से संचालित की जा रही हैं। यात्रियों को गुमराह कर निजी और टूर परमिट बसों में बैठाया जा रहा है, जबकि आधिकारिक रूप से सिर्फ 12 बसों को ही भारत-नेपाल के बीच संचालन की अनुमति है।
परिवहन नियमों को दरकिनार कर ये बसें दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई जैसे महानगरों तक यात्रियों को पहुंचा रही हैं। न तो यात्रियों की सूची बनाई जा रही है और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। इससे न केवल यात्रियों की जान जोखिम में है, बल्कि उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम को हर माह लाखों रुपये के राजस्व नुकसान का भी सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी समझौते के तहत काठमांडो-दिल्ली, काठमांडो-वाराणसी और पोखरा-दिल्ली रूट पर कुल 12 मैत्री बसों को अनुमति दी गई है। इसके बावजूद टूरिस्ट परमिट और अस्थायी पास की आड़ में दर्जनों बसें सोनौली सीमा से सवारियां ढो रही हैं। बसों पर ‘भारत-नेपाल मैत्री बस सेवा’ लिखवाकर पर्यटकों को झांसे में लिया जा रहा है।
सीमा क्षेत्र में सक्रिय बिचौलियों की मदद से नेपाली और भारतीय नंबर की बसें मनमाना किराया वसूल रही हैं। यात्रियों का आरोप है कि अवैध पार्किंग स्थलों से सवारी भरकर बसें रवाना की जाती हैं और विभागीय जांच महज औपचारिकता बनकर रह गई है। बीते माह बलरामपुर में हुई दुर्घटना, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई, के बाद भी व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है।
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सरकारी समझौते के तहत काठमांडो-दिल्ली, काठमांडो-वाराणसी और पोखरा-दिल्ली रूट पर कुल 12 मैत्री बसों को अनुमति दी गई है। इसके बावजूद टूरिस्ट परमिट और अस्थायी पास की आड़ में दर्जनों बसें सोनौली सीमा से सवारियां ढो रही हैं। बसों पर ‘भारत-नेपाल मैत्री बस सेवा’ लिखवाकर पर्यटकों को झांसे में लिया जा रहा है।
सीमा क्षेत्र में सक्रिय बिचौलियों की मदद से नेपाली और भारतीय नंबर की बसें मनमाना किराया वसूल रही हैं। यात्रियों का आरोप है कि अवैध पार्किंग स्थलों से सवारी भरकर बसें रवाना की जाती हैं और विभागीय जांच महज औपचारिकता बनकर रह गई है। बीते माह बलरामपुर में हुई दुर्घटना, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई, के बाद भी व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है।
