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Mahoba News: 50 फीसदी से अधिक किसानों की नहीं हुई फार्मर रजिस्ट्री

संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा Updated Wed, 08 Apr 2026 12:46 AM IST
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Farmer registry of more than 50 percent farmers has not been done
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कुलपहाड़ (महोबा)। तहसील कुलपहाड़ के 50 फीसदी से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो सकी। खतौनी व आधार कार्ड में नाम में अंतर होने की वजह से यह दिक्कत आ रही है। शासन की ओर से खतौनी में नाम संशोधन के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए लेकिन लेखपालों की लापरवाही के चलते नाम संशोधन नहीं हो पा रहा है। इससे किसान परेशान हैं।
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फार्मर रजिस्ट्री में तेजी लाने के लिए शासन की ओर से खतौनी में नाम संशोधन की सुविधा किसानों को दी गई थी। जिन किसानों के आधार कार्ड और खतौनी में नाम में अंतर है, उनसे खतौनी में नाम संशोधन के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए। लेखपाल, कानूनगो व तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद नाम संशोधन किया जाता है लेकिन लेखपाल की ओर से काफी समय तक इन आवेदन में रिपोर्ट न लगाने से नाम संशोधन नहीं हो पा रहा है।
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मौजा सुगिरा के किसान आनंद कुमार ने बताया कि उन्होंने 11 मार्च को खतौनी में नाम संशोधन के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। लेखपाल को हार्डकॉपी देने के बावजूद रिपोर्ट नहीं लगाई गई। नायब तहसीलदार से शिकायत करने पर 30 मार्च को रिपोर्ट लगाई गई। अंडवारा के किसान अमित का कहना है कि उनकी खतौनी में अमित कुमार और आधार कार्ड में अमित राजपूत नाम है। नाम में संशोधन न होने से फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। किसान नेता गुलाब सिंह का कहना है कि ऑनलाइन नाम संशोधन की प्रक्रिया तहसील में महीनों लटकी रहती है, फार्मर रजिस्ट्री में तेजी नहीं आ पा रही है।
उधर, तहसीलदार प्रतिम सचान का कहना है कि खतौनी में नाम संशोधन के लिए सभी लेखपालों को निर्देशित किया गया है कि वह प्रपत्र जांच कर तुरंत रिपोर्ट लगाएं। ताकि नाम संशोधन हो सके और फार्मर रजिस्ट्री के काम में तेजी आ सके।
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15 अप्रैल तक चलेगा विशेष अभियान
कुलपहाड़। शासन के निर्देश पर 15 अप्रैल तक फार्मर रजिस्ट्री के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसमें गांव में शिविर लगाकर राजस्व कर्मी, पंचायत सचिव फार्मर रजिस्ट्री के आवेदन लेंगे। इसमें पंचायत मित्र, ग्राम प्रधान व कोटेदार सहयोग करेंगे। मंगलवार को तहसील कुलपहाड़ के 123 गांवों में शिविर लगाकर किसानों के आवेदन कराए गए। नायब तहसीलदार पंकज गौतम ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री हो जाने से किसानों को सुविधा होगी। उनकी कृषि भूमि का लेखा-जोखा रहेगा, हेल्थ कार्ड बनेगा, पशुधन समेत अन्य संपत्ति का इसमें उल्लेख होगा। खाद-बीज सब्सिडी में किसानों को लाभ होगा। (संवाद)
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