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Mahoba News: 50 हजार आबादी वाले कस्बे में खेल मैदान नहीं
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युवाओं-बच्चों की खेल प्रतिभा को नहीं मिल रहा मंच, सभासदों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
कबरई (महोबा)। 50 हजार से अधिक आबादी वाले कस्बा कबरई में युवाओं व बच्चों को खेलने के लिए कोई मैदान नहीं है। इससे यहां की खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए एक सशक्त मंच नहीं मिल पा रहा है। काफी समय से खेल मैदान और पार्क की जरूरत महसूस कर रहे यहां के नागरिकों की मांग पर सभासदों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। जिसमें कस्बे के लोगों की ओर से खेल मैदान व पार्क की मांग की गई है।
कस्बे में 20 से अधिक प्राइमरी स्कूल, 10 से अधिक जूनियर हाईस्कूल, तीन इंटर कॉलेज और चार डिग्री कॉलेज संचालित हो रहे हैं। यहां हजारों की संख्या में छात्र व छात्राएं अध्ययनरत है लेकिन युवाओं को अपनी खेल प्रतिभा निखारने और शारीरिक विकास के लिए कोई व्यवस्थित जगह नहीं है। ऐसे में युवा कभी ऊबड़-खाबड़ मैदानों के बीच तो कभी बंजर भूमि और कभी खलिहानों को अपना खेल का मैदान बनाकर उसमें खेलते हैं। छात्राओं के लिए तो खेल जैसा शब्द ही बेमानी साबित हो रहा है।
सभासद संतोष कुशवाहा, भवानीदीन रैकवार, सुमित वर्मा, आदर्श जैन, भुवनचंद पांडेय, पवन गुप्ता, संतोष निगम, हिमांशु गुप्ता, बृजेंद्र वाजपेयी आदि का कहना है कि कस्बे में एक खेल का मैदान और चिल्ड्रेन पार्क होना ही चाहिए। खेल का मैदान व उसमें व्यवस्थाएं होने से खेल में रुचि रखने वाले युवाओं को अपनी प्रतिभा को आजमाने का मौका मिलेगा।
पार्क होने से बच्चे और बुजुर्गों को भी अपनी दिनचर्या को ठीक रखने का मौका मिलेगा। उन्होंने सामूहिक रूप से ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजा गया है। इसमें कबरई में एक खेल का मैदान व पार्क निर्माण की मांग की गई है। सभासदों ने बताया कि कई बार जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन के अधिकारियों से खेल सुविधाओं की मांग की गई लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है।
कस्बावासियों ने बताई समस्या
फोटो गुरुवार एमएएचपी 06 परिचय-मुन्नीलाल विश्वकर्मा। संवाद
कबरई निवासी मुन्नीलाल विश्वकर्मा कहते हैं कि बच्चों के शारीरिक विकास के लिए यहां एक भी खेल का मैदान नहीं है। जिससे बच्चे अपनी प्रतिभा को परख नहीं पाते हैं। यही कारण है कि क्षेत्र से कम युवा ही फोर्स की नौकरियों में जा पाते हैं।
फोटो गुरुवार एमएएचपी 07 परिचय-बनवारी लाल गुप्ता। संवाद
कस्बे के बनवारी लाल गुप्ता का कहना है कि कबरई प्रदेश की सबसे बड़ी पत्थरमंडी है। बावजूद इसके यहां बच्चों के लिए खेल का मैदान व पार्क नहीं होना बहुत ही खराब स्थिति है। खेल मैदान और पार्क बनने से हर आयु के लोगों को लाभ होगा।
फोटो गुरुवार एमएएचपी 08 परिचय-चक्रधर शुक्ला। संवाद
भगतसिंह नगर निवासी चक्रधर शुक्ला कहते हैं कस्बे में खेल का मैदान न होने की वजह से फोर्स की तैयारी के लिए बच्चों को बाहर भेजना पड़ता है। शासन व प्रशासन से कई बार मांग की गई लेकिन सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा है।
फोटो गुरुवार एमएएचपी 09 परिचय-मनीष गुप्ता। संवाद
इंदिरानगर निवासी मनीष गुप्ता का कहना है कि प्रदेश में सबसे अधिक राजस्व देने वाले इस कस्बे में खेल का मैदान न होने से प्रतिभाओं को मौका नहीं मिल पा रहा है। कई बार मांग की जा चुकी है लेकिन एक बार भी गंभीरता से विचार नहीं किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कबरई (महोबा)। 50 हजार से अधिक आबादी वाले कस्बा कबरई में युवाओं व बच्चों को खेलने के लिए कोई मैदान नहीं है। इससे यहां की खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए एक सशक्त मंच नहीं मिल पा रहा है। काफी समय से खेल मैदान और पार्क की जरूरत महसूस कर रहे यहां के नागरिकों की मांग पर सभासदों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। जिसमें कस्बे के लोगों की ओर से खेल मैदान व पार्क की मांग की गई है।
कस्बे में 20 से अधिक प्राइमरी स्कूल, 10 से अधिक जूनियर हाईस्कूल, तीन इंटर कॉलेज और चार डिग्री कॉलेज संचालित हो रहे हैं। यहां हजारों की संख्या में छात्र व छात्राएं अध्ययनरत है लेकिन युवाओं को अपनी खेल प्रतिभा निखारने और शारीरिक विकास के लिए कोई व्यवस्थित जगह नहीं है। ऐसे में युवा कभी ऊबड़-खाबड़ मैदानों के बीच तो कभी बंजर भूमि और कभी खलिहानों को अपना खेल का मैदान बनाकर उसमें खेलते हैं। छात्राओं के लिए तो खेल जैसा शब्द ही बेमानी साबित हो रहा है।
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सभासद संतोष कुशवाहा, भवानीदीन रैकवार, सुमित वर्मा, आदर्श जैन, भुवनचंद पांडेय, पवन गुप्ता, संतोष निगम, हिमांशु गुप्ता, बृजेंद्र वाजपेयी आदि का कहना है कि कस्बे में एक खेल का मैदान और चिल्ड्रेन पार्क होना ही चाहिए। खेल का मैदान व उसमें व्यवस्थाएं होने से खेल में रुचि रखने वाले युवाओं को अपनी प्रतिभा को आजमाने का मौका मिलेगा।
पार्क होने से बच्चे और बुजुर्गों को भी अपनी दिनचर्या को ठीक रखने का मौका मिलेगा। उन्होंने सामूहिक रूप से ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजा गया है। इसमें कबरई में एक खेल का मैदान व पार्क निर्माण की मांग की गई है। सभासदों ने बताया कि कई बार जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन के अधिकारियों से खेल सुविधाओं की मांग की गई लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है।
कस्बावासियों ने बताई समस्या
फोटो गुरुवार एमएएचपी 06 परिचय-मुन्नीलाल विश्वकर्मा। संवाद
कबरई निवासी मुन्नीलाल विश्वकर्मा कहते हैं कि बच्चों के शारीरिक विकास के लिए यहां एक भी खेल का मैदान नहीं है। जिससे बच्चे अपनी प्रतिभा को परख नहीं पाते हैं। यही कारण है कि क्षेत्र से कम युवा ही फोर्स की नौकरियों में जा पाते हैं।
फोटो गुरुवार एमएएचपी 07 परिचय-बनवारी लाल गुप्ता। संवाद
कस्बे के बनवारी लाल गुप्ता का कहना है कि कबरई प्रदेश की सबसे बड़ी पत्थरमंडी है। बावजूद इसके यहां बच्चों के लिए खेल का मैदान व पार्क नहीं होना बहुत ही खराब स्थिति है। खेल मैदान और पार्क बनने से हर आयु के लोगों को लाभ होगा।
फोटो गुरुवार एमएएचपी 08 परिचय-चक्रधर शुक्ला। संवाद
भगतसिंह नगर निवासी चक्रधर शुक्ला कहते हैं कस्बे में खेल का मैदान न होने की वजह से फोर्स की तैयारी के लिए बच्चों को बाहर भेजना पड़ता है। शासन व प्रशासन से कई बार मांग की गई लेकिन सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा है।
फोटो गुरुवार एमएएचपी 09 परिचय-मनीष गुप्ता। संवाद
इंदिरानगर निवासी मनीष गुप्ता का कहना है कि प्रदेश में सबसे अधिक राजस्व देने वाले इस कस्बे में खेल का मैदान न होने से प्रतिभाओं को मौका नहीं मिल पा रहा है। कई बार मांग की जा चुकी है लेकिन एक बार भी गंभीरता से विचार नहीं किया गया।