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सर्दी बनी जानलेवा: नाै माह की मासूम समेत दो की माैत, ये लक्षण दिखने पर हो जाएं सतर्क; ऐसे करें बचाव
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sat, 31 Jan 2026 07:20 PM IST
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सार
यूपी में माैसम की करवट ने ठंड का प्रकोप बढ़ा दिया गया है। मैनपुरी जिले में कड़ाके की ठंड से निमोनिया और खांसी-बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। नाै महीने की मासूम समेत दो की निमोनिया से माैत हो गई। ऐसे में चिकित्सकों ने बचाव के तरीके बताए हैं।
निमोनिया
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
चार दिन पहले हुई बारिश के बाद से ठंड का प्रकोप जारी है। मैनपुरी जिले में पिछले 24 घंटों के भीतर, नौ माह की एक मासूम बालिका और 57 वर्षीय एक व्यक्ति की निमोनिया के कारण मौत हो गई। कस्बा भोगांव के बड़ा बाजार निवासी राहुल कुमार की नौ माह की पुत्री आंशी पिछले दो दिनों से सर्दी-खांसी से पीड़ित थी। निजी डॉक्टर से जांच कराने पर उसे निमोनिया होने की बात सामने आई थी। शुक्रवार रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे तत्काल जिला अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
वहीं, कुर्रा क्षेत्र के गांव रामपीछा निवासी 57 वर्षीय किसान रामअवतार सिंह को भी पिछले कुछ दिनों से सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। निजी चिकित्सक को दिखाने पर निमोनिया की पुष्टि हुई थी। शुक्रवार शाम उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें भी जिला अस्पताल लाया गया, जहां जांचोपरांत उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
शनिवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में विभिन्न बीमारियों से पीड़ित 736 मरीजों ने पंजीकरण कराया और उपचार लिया। इनमें 300 से अधिक मरीज बुखार, पेट दर्द, सांस संबंधी समस्याएं, निमोनिया, खांसी-जुकाम और सर्दी से ग्रसित पाए गए। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि दोनों ही मृतक मरीजों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था। बताया कि पिछले कुछ दिनों में निमोनिया और अन्य मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है, जिनमें 18 मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि तीन गंभीर मरीजों को हालत बिगड़ने पर रेफर किया गया है।
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वहीं, कुर्रा क्षेत्र के गांव रामपीछा निवासी 57 वर्षीय किसान रामअवतार सिंह को भी पिछले कुछ दिनों से सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। निजी चिकित्सक को दिखाने पर निमोनिया की पुष्टि हुई थी। शुक्रवार शाम उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें भी जिला अस्पताल लाया गया, जहां जांचोपरांत उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
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शनिवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में विभिन्न बीमारियों से पीड़ित 736 मरीजों ने पंजीकरण कराया और उपचार लिया। इनमें 300 से अधिक मरीज बुखार, पेट दर्द, सांस संबंधी समस्याएं, निमोनिया, खांसी-जुकाम और सर्दी से ग्रसित पाए गए। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि दोनों ही मृतक मरीजों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था। बताया कि पिछले कुछ दिनों में निमोनिया और अन्य मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है, जिनमें 18 मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि तीन गंभीर मरीजों को हालत बिगड़ने पर रेफर किया गया है।
निमोनिया के लक्षण और बचाव के उपाय
चिकित्सकों के अनुसार, निमोनिया के प्रमुख लक्षणों में कंपकंपी के साथ तेज बुखार, लगातार खांसी, सांस तेज चलना या फूलना, गहरी सांस लेने या खांसने पर छाती में तेज दर्द, अत्यधिक कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, होंठ या नाखून का नीला पड़ना और मानसिक स्थिति में बदलाव या सुस्ती शामिल हैं।
बचाव के उपाय
टीकाकरण : न्यूमोकोकल और फ्लू के टीके लगवाएं, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।
गरम कपड़े : शरीर को गर्म रखने के लिए स्वेटर, टोपी, मोजे और स्कार्फ का प्रयोग करें।
स्वच्छता : हाथों को बार-बार साबुन से धोएं और सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
भाप लेना : बंद नाक और गले की जकड़न कम करने के लिए भाप लें।
प्रदूषण से बचाव : धुएं और प्रदूषण से फेफड़ों को सुरक्षित रखें।
खान-पान : विटामिन सी से भरपूर फल, सब्जियां और गर्म तरल पदार्थ (जैसे सूप, चाय) का सेवन करें।
संपर्क से बचें : बीमार लोगों के सीधे संपर्क में आने से बचें।
आराम और व्यायाम : नियमित हल्का व्यायाम करें और पर्याप्त नींद (7-9 घंटे) लें।
ये भी पढ़ें-आगरा में भीषण सड़क हादसा: कंटेनर ने दो ऑटो को मारी टक्कर, पांच लोगों की मौत; घायलों को भेजा गया इमरजेंसी
चिकित्सकों के अनुसार, निमोनिया के प्रमुख लक्षणों में कंपकंपी के साथ तेज बुखार, लगातार खांसी, सांस तेज चलना या फूलना, गहरी सांस लेने या खांसने पर छाती में तेज दर्द, अत्यधिक कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, होंठ या नाखून का नीला पड़ना और मानसिक स्थिति में बदलाव या सुस्ती शामिल हैं।
बचाव के उपाय
टीकाकरण : न्यूमोकोकल और फ्लू के टीके लगवाएं, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।
गरम कपड़े : शरीर को गर्म रखने के लिए स्वेटर, टोपी, मोजे और स्कार्फ का प्रयोग करें।
स्वच्छता : हाथों को बार-बार साबुन से धोएं और सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
भाप लेना : बंद नाक और गले की जकड़न कम करने के लिए भाप लें।
प्रदूषण से बचाव : धुएं और प्रदूषण से फेफड़ों को सुरक्षित रखें।
खान-पान : विटामिन सी से भरपूर फल, सब्जियां और गर्म तरल पदार्थ (जैसे सूप, चाय) का सेवन करें।
संपर्क से बचें : बीमार लोगों के सीधे संपर्क में आने से बचें।
आराम और व्यायाम : नियमित हल्का व्यायाम करें और पर्याप्त नींद (7-9 घंटे) लें।
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