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Holika Dahan: भक्त प्रहलाद के गांव में 3 मार्च को होगा होलिका का दहन, धधकते अंगारों से होकर निकलेगा पंडा
नवीन गोयल, संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Mar 2026 09:12 AM IST
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सार
ब्रज की होली विश्व प्रसिद्ध है। होली के पर्व पर यहां सदियों पुरानी लीलाएं जीवंत हो जाती हैं। इनमें भक्त प्रहलाद की लीला भी शामिल हैं, जो हर वर्ष मथुरा के गांव फालैन में होती है।
फालैन गांव में धधकती होली से गुजरता पंडा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
मथुरा के कोसीकलां के गांव फालैन में होलिका और भक्त प्रहलाद की लीला एक बार फिर साकार होगी। परंपरा को जीवित रखने के लिए तीन मार्च की सुबह करीब चार बजे संजू पंडा होली की जलती लपटों से निकलेंगे। मेले में गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण, नरदेव चौधरी हिस्सा लेंगे। होली मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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गांव फालैन में होलिका के दहकते अंगारों के बीच से गुजरने की अग्निपरीक्षा देने के लिए संजू पंडा एक माह से कठोर तप पर बैठे हैं। होलिका दहन के दिन जब दीपक की लौ उनकी हथेली को शीतलता का एहसास कराएगी तभी संजू तेज कदमों से होलिका की लपटों को चीरते हुए आगे बढ़ जाएंगे। संजू लगातार दूसरी बार इस रस्म को निभाएंगे। इससे पहले होलिका दहन के दिन संजू पंडा मंदिर की ज्योति पर हाथ रख शुभ लग्न के संकेत मिलने का इंतजार करेगा। जैसे ही ज्योति की लौ से शीतलता का आभास होगा, पंडा के इशारे पर होलिका में अग्नि प्रवेश करा दी जाएगी।
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इसके बाद प्रह्लाद कुंड में स्नान कर पंडा होलिका के दहकते अंगारों के बीच से गुजरेगा। फालैन के इस मेले में पैगांव के हुरियारों की करीब छह टोलियां पहुंचेंगी, जहां ढोल-नगाड़ों के मध्य गांव की गली-गली में चौपाइयों का गायन कर रंग-गुलाल की बरसात कर आसमान को इंद्रधनुषी रंग में रंग देंगे। ग्रामीण कमल सिंह, रामप्रसाद, भरत सिंह ने बताया मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
आपसी सहमति से होता है नाम तय
आपसी सहमति के बाद पंडा का नाम तय के बाद वसंत पंचमी के बाद आने वाली पूर्णिमा को उसे एक माला दी जाती है। इस माला को लेकर पंडा गांव में स्थित प्रह्लाद मंदिर में तप-पूजन के लिए बैठ जाता है। यह भजन-पूजा होली तक चलती है। संजू माघ पूर्णिमा से तप पर बैठ हैं। वह एक माह से मंदिर में ही अखंड ज्योति के पास बैठकर तप कर रहे हैं। इस दौरान जमीन पर सो रहे हैं और फलाहार ग्रहण कर रहे हैं।
आपसी सहमति के बाद पंडा का नाम तय के बाद वसंत पंचमी के बाद आने वाली पूर्णिमा को उसे एक माला दी जाती है। इस माला को लेकर पंडा गांव में स्थित प्रह्लाद मंदिर में तप-पूजन के लिए बैठ जाता है। यह भजन-पूजा होली तक चलती है। संजू माघ पूर्णिमा से तप पर बैठ हैं। वह एक माह से मंदिर में ही अखंड ज्योति के पास बैठकर तप कर रहे हैं। इस दौरान जमीन पर सो रहे हैं और फलाहार ग्रहण कर रहे हैं।
