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Mau News: यातायात नियम तोड़ने पर 14 महीने में 1.45 लाख वाहनों का चालान, ओवरलोड में एक भी नहीं
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नगर में फर्राटे से चलते ओवरलोड वाहन।संवाद
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अधिक मुनाफे के चक्कर में ई-रिक्शा, ऑटो, जीप और मालवाहक रोज क्षमता से अधिक सामान और सवारी भरकर सड़कों पर दौड़ते हैं। यातायात नियमों का पालन नहीं करने पर बीते 14 माह में 1.45 लाख चालान हुए, लेकिन इनमें ओवरलोड वाहनों का एक भी चालान नहीं हुआ है।
जबकि दिनभर जिले के 12 थानों और शहर की तीन पुलिस चौकियों के सामने से ऐसे वाहन गुजरते रहते हैं। थानों की पुलिस और यातायात पुलिस लोगों को हेलमेट और सीटबेल्ट पहनकर वाहन चलाने के लिए तो जागरूक करती है, लेकिन ओवरलोड सवारी वाहनों पर इनकी नजर नहीं पड़ती।
जिले में लगभग 7000 ई-रिक्शा और 8139 ऑटो पंजीकृत हैं। वहीं 20 हजार से अधिक मालवाहक वाहन पंजीकृत हैं। सबसे अधिक समस्या ग्रामीण सड़कों पर है, जहां आठ सीट वाली ऑटो में 12 से 15 लोगों को बैठाया जाता है।
नवंबर 2025 में शहर के शीतला माता मंदिर के सामने रोडवेज बस ने एक ई-रिक्शा में टक्कर मार दी थी। हादसे में एक ही परिवार की तीन महिलाओं की मौत हो गई थी, जबकि बच्चों सहित नौ लोग घायल हो गए थे।
उसके बाद यातायात पुलिस ने ई-रिक्शा चालकों के साथ बैठक कर केवल चार सवारी बैठाने को कहा था, लेकिन इसमें भी सुधार नहीं हुआ। लोग गंतव्य तक जल्दी पहुंचने के चक्कर में ऑटो या जीप के पीछे लटक जाते हैं। चालक मुनाफे के लालच में उन्हें मना नहीं करते।
मऊ शहर में सुबह नौ बजे के बाद भारी आठ पहिया वाहनों के चलने पर रोक लग जाती है, लेकिन शहर में दिनभर ट्रैक्टर-ट्रॉली पर क्षमता से अधिक सीमेंट लादकर वाहन दौड़ते रहते हैं। कबाड़ की गोदामों से 15 से 20 फीट ऊंचाई तक कबाड़ लादकर पिकअप और ट्रक निकलते हैं।
शहर के सभी चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, बावजूद इसके इन वाहनों पर नजर नहीं पड़ती, जबकि इन्हीं वाहनों से खतरा अधिक है। बीते जनवरी माह में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह चलाया गया था।
इस दौरान थानों की पुलिस और यातायात पुलिस ने अलग-अलग मदों में 10,332 चालान काटे थे। इस सूची में भी ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई शामिल नहीं थी। बीते फरवरी माह में 15,114 चालान काटे गए थे।
वर्ष 2025 में जनवरी से दिसंबर तक एक लाख 19 हजार 897 चालान काटे गए थे, लेकिन इस सूची में भी ओवरलोड वाहन शामिल नहीं थे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ओवरलोड सवारी और मालवाहक वाहनों पर जिम्मेदारों की नजर नहीं पड़ती है।
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कोट -
शहर में दिनभर मालवाहकों का प्रवेश वर्जित है। शहर में चलने वाले सवारी वाहनों में क्षमता से अधिक लोग बैठे नहीं पाए गए। ग्रामीण इलाकों में उनकी मॉनीटरिंग नहीं रहती है। -श्याम शंकर पांडेय, यातायात निरीक्षक, मऊ
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जबकि दिनभर जिले के 12 थानों और शहर की तीन पुलिस चौकियों के सामने से ऐसे वाहन गुजरते रहते हैं। थानों की पुलिस और यातायात पुलिस लोगों को हेलमेट और सीटबेल्ट पहनकर वाहन चलाने के लिए तो जागरूक करती है, लेकिन ओवरलोड सवारी वाहनों पर इनकी नजर नहीं पड़ती।
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जिले में लगभग 7000 ई-रिक्शा और 8139 ऑटो पंजीकृत हैं। वहीं 20 हजार से अधिक मालवाहक वाहन पंजीकृत हैं। सबसे अधिक समस्या ग्रामीण सड़कों पर है, जहां आठ सीट वाली ऑटो में 12 से 15 लोगों को बैठाया जाता है।
नवंबर 2025 में शहर के शीतला माता मंदिर के सामने रोडवेज बस ने एक ई-रिक्शा में टक्कर मार दी थी। हादसे में एक ही परिवार की तीन महिलाओं की मौत हो गई थी, जबकि बच्चों सहित नौ लोग घायल हो गए थे।
उसके बाद यातायात पुलिस ने ई-रिक्शा चालकों के साथ बैठक कर केवल चार सवारी बैठाने को कहा था, लेकिन इसमें भी सुधार नहीं हुआ। लोग गंतव्य तक जल्दी पहुंचने के चक्कर में ऑटो या जीप के पीछे लटक जाते हैं। चालक मुनाफे के लालच में उन्हें मना नहीं करते।
मऊ शहर में सुबह नौ बजे के बाद भारी आठ पहिया वाहनों के चलने पर रोक लग जाती है, लेकिन शहर में दिनभर ट्रैक्टर-ट्रॉली पर क्षमता से अधिक सीमेंट लादकर वाहन दौड़ते रहते हैं। कबाड़ की गोदामों से 15 से 20 फीट ऊंचाई तक कबाड़ लादकर पिकअप और ट्रक निकलते हैं।
शहर के सभी चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, बावजूद इसके इन वाहनों पर नजर नहीं पड़ती, जबकि इन्हीं वाहनों से खतरा अधिक है। बीते जनवरी माह में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह चलाया गया था।
इस दौरान थानों की पुलिस और यातायात पुलिस ने अलग-अलग मदों में 10,332 चालान काटे थे। इस सूची में भी ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई शामिल नहीं थी। बीते फरवरी माह में 15,114 चालान काटे गए थे।
वर्ष 2025 में जनवरी से दिसंबर तक एक लाख 19 हजार 897 चालान काटे गए थे, लेकिन इस सूची में भी ओवरलोड वाहन शामिल नहीं थे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ओवरलोड सवारी और मालवाहक वाहनों पर जिम्मेदारों की नजर नहीं पड़ती है।
कोट -
शहर में दिनभर मालवाहकों का प्रवेश वर्जित है। शहर में चलने वाले सवारी वाहनों में क्षमता से अधिक लोग बैठे नहीं पाए गए। ग्रामीण इलाकों में उनकी मॉनीटरिंग नहीं रहती है। -श्याम शंकर पांडेय, यातायात निरीक्षक, मऊ