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Mau News: 1880 गांवों में 31 टीमें करेंगी गन्ना किसानों के खेतों का सर्वे
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जिले में चीनी मिल से संबंधित 1880 गांवों में जीपीएस आधारित सर्वे शुरू होगा। इस सर्वे के तहत किसानों को उनके खेत की जानकारी सीधे मोबाइल पर मिलेगी और नए किसानों का पंजीकरण भी किया जाएगा। सर्वे कार्य को पूरा करने के लिए 31 टीमों का गठन किया गया है।
इस सर्वे की जानकारी किसान सहकारी चीनी मिल घोसी के प्रधान प्रबंधक/जिला गन्ना अधिकारी अजीत कुमार पाण्डेय ने दी। उन्होंने बताया कि जीपीएस सर्वे कार्य पूरा करने के लिए घोसी समिति से 23 टीमें, घुरियापार से एक टीम, बरहज से एक टीम और रसड़ा से छह टीमें तैयार की गई हैं। ये टीमें गांवों में किसानों के खेत तक पहुंचकर जीपीएस सर्वे का कार्य करेंगी।
जिले में वर्ष 2025-26 में 8536 हेक्टेयर भूमि में गन्ने की खेती की गई थी। सर्वे कार्य शुक्रवार से शुरू होकर 30 जून तक चलेगा। इसकी सूचना तीन दिन पहले सभी पंजीकृत गन्ना किसानों को मोबाइल एसएमएस के जरिए दी गई है।
गन्ना सर्वेक्षण टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल कर्मचारी शामिल होंगे। सर्वेक्षण के दौरान किसान की मौजूदगी जरूरी होगी। किसी भी गन्ना किसान के सर्वेक्षित भूमि का सत्यापन राजस्व विभाग की वेबसाइट से किया जा सकता है।
सर्वेक्षण के दौरान नए किसानों का पंजीकरण भी किया जाएगा। पंजीकरण शुल्क के रूप में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों को 10 रुपये, लघु किसानों को 100 रुपये तथा अन्य किसानों को 200 रुपये देने होंगे। यह शुल्क सर्वेक्षण के दौरान अथवा 30 सितंबर 2026 तक जमा किया जा सकता है।
विभाग के अनुसार, इस जीपीएस सर्वेक्षण से खेतों का सटीक माप, गन्ने की किस्म की पहचान और उत्पादन के विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध होंगे। इससे चीनी मिल और सरकार के बीच पारदर्शी व्यवस्था स्थापित होगी और किसानों को उचित मूल्य, सब्सिडी एवं अन्य सुविधाएं दिलाने में सहायता मिलेगी।
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इस सर्वे की जानकारी किसान सहकारी चीनी मिल घोसी के प्रधान प्रबंधक/जिला गन्ना अधिकारी अजीत कुमार पाण्डेय ने दी। उन्होंने बताया कि जीपीएस सर्वे कार्य पूरा करने के लिए घोसी समिति से 23 टीमें, घुरियापार से एक टीम, बरहज से एक टीम और रसड़ा से छह टीमें तैयार की गई हैं। ये टीमें गांवों में किसानों के खेत तक पहुंचकर जीपीएस सर्वे का कार्य करेंगी।
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जिले में वर्ष 2025-26 में 8536 हेक्टेयर भूमि में गन्ने की खेती की गई थी। सर्वे कार्य शुक्रवार से शुरू होकर 30 जून तक चलेगा। इसकी सूचना तीन दिन पहले सभी पंजीकृत गन्ना किसानों को मोबाइल एसएमएस के जरिए दी गई है।
गन्ना सर्वेक्षण टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल कर्मचारी शामिल होंगे। सर्वेक्षण के दौरान किसान की मौजूदगी जरूरी होगी। किसी भी गन्ना किसान के सर्वेक्षित भूमि का सत्यापन राजस्व विभाग की वेबसाइट से किया जा सकता है।
सर्वेक्षण के दौरान नए किसानों का पंजीकरण भी किया जाएगा। पंजीकरण शुल्क के रूप में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों को 10 रुपये, लघु किसानों को 100 रुपये तथा अन्य किसानों को 200 रुपये देने होंगे। यह शुल्क सर्वेक्षण के दौरान अथवा 30 सितंबर 2026 तक जमा किया जा सकता है।
विभाग के अनुसार, इस जीपीएस सर्वेक्षण से खेतों का सटीक माप, गन्ने की किस्म की पहचान और उत्पादन के विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध होंगे। इससे चीनी मिल और सरकार के बीच पारदर्शी व्यवस्था स्थापित होगी और किसानों को उचित मूल्य, सब्सिडी एवं अन्य सुविधाएं दिलाने में सहायता मिलेगी।
