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Mau News: कोल्ड ड्रिंक और फास्ट फूड से युवाओं की किडनी खतरे में, 10 दिन में मिले 55 मरीज

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2026 12:51 AM IST
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Cold drinks and fast food put young people's kidneys at risk, with 55 patients found in 10 days.
जिला अस्पताल ​स्थित डायलिसिस वार्ड में मरीजों का होता डायलिसिस।संवाद
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भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और बढ़ता स्ट्रेस अब सीधे युवाओं की किडनी पर प्रभाव डाल रहा है। इस महीने के दस दिन में ही जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और तीन निजी अस्पतालों के डायलिसिस यूनिट में 55 नए मरीज चिह्नित हुए हैं।
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इनमें 35 साल से कम उम्र के मरीजों की संख्या 21 है। डॉक्टरों के अनुसार इन युवा मरीजों के मामलों में अनियंत्रित ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) किडनी फेल होने का मुख्य कारण रहा है।
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डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान में युवा हार्ट अटैक से नहीं, बल्कि किडनी फेल्योर से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक खानपान में कोल्डड्रिंक और फास्ट फूड का अत्यधिक इस्तेमाल उनके गुर्दों को खतरनाक तरीके से नुकसान पहुंचा रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि जिला अस्पताल के डायलिसिस यूनिट में हर महीने 20 से 30 साल की उम्र के गुर्दा रोगियों की संख्या 30 फीसदी तक पहुंच गई है।
इनमें से आधे मरीजों को डायलिसिस या गुर्दा ट्रांसप्लांट की सलाह दी जा रही है। बीते दो साल में इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है। पहले इस उम्र वर्ग के दो से तीन फीसदी रोगी ही आते थे।
एक निजी अस्पताल के डायलिसिस यूनिट के मैनेजर रवि दुबे ने बताया कि इस माह के दस दिन में उनके यहां 17 नए मरीजों ने अपना पंजीयन कराया है। इनमें युवा रोगियों की संख्या सात है। इनमें एक बात समान रूप से पाई गई कि ये कोल्डड्रिंक और फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन करते थे।
डॉक्टरों के अनुसार ये रोगी कोल्डड्रिंक के इस कदर आदी थे कि एक दिन में दो से ढाई लीटर तक पी जाते थे। फास्ट फूड भी इनके खानपान का नियमित हिस्सा था। इसके अलावा दर्द निवारक दवाइयों का प्रयोग भी हद से अधिक इनके केस स्टडी में पाया गया है।
वहीं इस अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. दुर्गेश पुष्कर ने बताया कि कोल्डड्रिंक में भारी मात्रा में शर्करा होती है, जिससे मोटापा और यूरिक एसिड भी बढ़ता है। यूरिक एसिड बढ़ने पर यह जोड़ों में जमा होने लगता है और किडनी पर इसे बाहर निकालने के लिए अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
इससे गुर्दों की क्षमता प्रभावित होती है। गुर्दों में सूजन और सिकुड़न आने के कारण उनकी कार्यक्षमता घट जाती है। धीरे-धीरे गुर्दे रक्त से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ निकालने तथा मूत्र बनाने में असमर्थ हो जाते हैं।
ऐसी स्थिति में किडनी ट्रांसप्लांट या डायलिसिस की नौबत आ जाती है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार के अनुसार पिछले दो साल में बड़ा बदलाव आया है। अब 20 से 30 साल उम्र के युवा क्रोनिक किडनी रोगी बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के डायलिसिस यूनिट में इस उम्र के मरीजों की संख्या करीब 20 फीसदी है।

बिगड़ी लाइफ स्टाइल भी बना रही हैं किडनी का मरीज
पूर्व आईएमए अध्यक्ष डॉक्टर संजय सिंह ने बताया कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हाई कोलेस्ट्रॉल के शिकार लोगों में क्रोनिक किडनी डिजीज होने का खतरा अधिक हो सकता है। युवाओं में मुख्य रूप से धूम्रपान और बढ़ा हुआ रक्तचाप जिम्मेदार है। धूम्रपान का नकारात्मक असर संपूर्ण स्वास्थ्य पर हो सकता है, पर इस आदत के कारण किडनी खतरा हो सकता है। धूम्रपान आपके दिल और रक्त वाहिकाओं (कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम) को नुकसान पहुंचती है, जिससे किडनी में रक्त का प्रवाह बाधित हो सकता है। रक्त प्रवाह में होने वाली समस्याओं का जोखिम किडनी की सेहत के लिए भी बहुत हानिकारक माना जाता है। किडनी सहित संपूर्ण सेहत को ठीक रखने के लिए धूम्रपान से दूरी बनाकर रखने की सलाह दी जाती है।

जिला अस्पताल में रोज 24 लोगों की हो रही डायलिसिस
युवाओं में हाई बीपी, शुगर बढ़ने से किडनी फेल होने की समस्या ज्यादा बढ़ गई है। बिगड़ते खानपान की वजह से समस्या लगातार बढ़ रही है। 18 साल से 35 की उम्र के युवा किडनी फेलियर की समस्या से जूझ रहे हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 24 मरीजों की डायलिसिस हो रही है, इनमें 10 मरीज 18 से 35 साल तक के युवा हैं। यही स्थिति मेडिकल कॉलेज में है, यहां 35 फीसदी मरीजों की उम्र 16 से 30 वर्ष के बीच की है।
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