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किशोरियों के गर्भपात का मामला: डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने तलब की रिपोर्ट, दो अस्पताल सील; जांच के दिए निर्देश

अमर उजाला नेटवर्क, मऊ। Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Thu, 25 Jun 2026 09:06 AM IST
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सार

मऊ जिले में किशोरियों के गर्भपात का स्टिंग ऑपरेशन किया गया, जिसका संज्ञान लेते हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने रिपोर्ट तलब की। इसके बाद जिले में ताबड़तोड़ छापे मारे गए। इस दौरान दो अस्पताल सील किए गए। 

Deputy CM Brajesh Pathak called for report two hospitals sealed in mau Abortion case
नैंसी अस्पताल की जांच करते सीएचसी कोपागंज प्रभारी डॉक्टर इरसाद और उनकी टीम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

किशोरियों के गर्भपात संबंधी मऊ में स्टिंग ऑपरेशन की खबर का संज्ञान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने लिया है। उन्होंने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।


साथ ही एक सप्ताह के अंदर जांच रिपोर्ट तलब की है। दूसरी तरफ, मऊ का स्वास्थ्य महकमा भी बुधवार को जागा और ताबड़तोड़ छापे मारे गए। कोपागंज सीएचसी प्रभारी डॉ. इरशाद अहमद की अगुवाई में शिफा अस्पताल को सील कर दिया गया। यह अस्पताल कोपागंज कस्बे में है। सीएचसी से दूरी 500 मीटर है। वहीं महज 200 मीटर दूरी पर पीएस हेल्थ केयर सेंटर नाम से अस्पताल संचालित मिला। जिसके कागजात न होने पर सील कर दिया गया।
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पांच अस्पतालों में डमी मरीज के नाम पर स्टिंग ऑपरेशन किया गया था। साथ ही बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर में गर्भपात संबंधित गोलियों की बिक्री का मामला भी सामने आया था। डिप्टी सीएम ने कहा कि इस तरह की घटनाएं गंभीर हैं। इससे न केवल मरीजों के हितों को नुकसान पहुंचता है बल्कि चिकित्सा विभाग की छवि भी धूमिल होती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जांच निष्पक्ष तरीके से कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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नैंसी अस्पताल की जांच करते सीएचसी कोपागंज प्रभारी डॉक्टर इरसाद और उनकी टीम


कृष्णा अस्पताल का पंजीकरण डॉ. प्रभुनाथ के नाम पर मिला
निजी अस्पतालों, पैथोलॉजी और क्लीनिक संचालकों की मनमानी का संज्ञान बुधवार को स्वास्थ्य महकमे ने भी लिया। कोपागंज सीएचसी प्रभारी डॉ. इरशाद अहमद ने कोपागंज कस्बे में अभियान चलाया और सीएचसी से लगभग 500 की मीटर दूर बिना पंजीकरण संचालित शिफा अस्पताल को सील कर दिया।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, स्टिंग ऑपरेशन के दौरान गर्भपात की बात स्वीकार करने और प्रसव के बाद बच्चों को बेचने का दावा करने वाले कृष्णा अस्पताल का पंजीकरण डॉ. प्रभुनाथ के नाम पर मिला है, लेकिन संबंधित डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं मिले। अस्पताल संचालक को नोटिस देकर तलब किया जाएगा। अस्पताल से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन भी होगा।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नैंसी अस्पताल का निरीक्षण भी किया। अस्पताल के पंजीकरण की समय सीमा समाप्त पाई गई। पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं कराया गया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम थानीदास स्थित जनसेवा सदन नहीं पहुंची जहां कि संचालिका किरण ने 15 वर्षीय किशोरी के गर्भपात कराने की बात कही थी। इससे महकमे की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ रही है। अमिला स्थित प्रतिमा अस्पताल की जांच भी नहीं हुई। सीएचसी बड़राव के प्रभारी डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि मामले में कार्रवाई होगी। तबीयत खराब होने की वजह से तत्काल कार्रवाई नहीं कर सके।

 

नैंसी अस्पताल की जांच करते सीएचसी कोपागंज प्रभारी डॉक्टर इरसाद और उनकी टीम

 

सीएचसी से 200 मीटर दूर अस्पताल में हुई सीजेरियन डिलीवरी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोपागंज से महज 200 मीटर दूरी पर पीएस हेल्थ केयर सेंटर नाम से अस्पताल संचालित मिला। सीएचसी प्रभारी डॉ. इरशाद अहमद अपनी टीम के साथ बुधवार शाम सात बजे इस अस्पताल में पहुंचे। जांच के दौरान संचालक पंजीयन से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। वहीं जांच में यह भी सामने आया कि कांछीकला निवासी जमंतु की गर्भवती पत्नी का कुछ समय पहले सीजेरियन डिलीवरी कराई गई थी। इसके अलावा एक अन्य सीजेरियन डिलीवरी कराने की तैयारी में अस्पताल कर्मचारी जुटे हुए थे। सीएचसी अधीक्षक ने बताया कि डिलीवरी के लिए पहुंची महिला को सीएचसी में भर्ती कराया गया है। वहीं सीजेरियन डिलीवरी के दौरान प्रसूता को सीएचसी में भर्ती कर देखरेख की जा रही है।  

अधिकारी बोले
अवैध अस्पताल और क्लीनिक के मामले में कार्रवाई की जा रही है। जांच कराई जा रही है। -डॉ. पंकज कुमार, सीएमओ

सपा सांसद ने उठाए सवाल, उप मुख्यमंत्री को घेरा
सपा सांसद राजीव राय ने भी स्टिंग ऑपरेशन और उससे जुड़े सवालों पर स्वास्थ्य महकमे को घेरा है। सांसद ने सोशल मीडिया अकाउंट पर खबर साझा की और लिखा कि सरकारी संरक्षण में कथित रूप से उपमुख्यमंत्री के आशीर्वाद से स्वास्थ्य माफिया का गिरोह काम कर रहा है। फर्जी अस्पतालों का धंधा फल-फूल रहा है। जब भी वह दिशा की बैठक में आदेश देते हैं, तो कुछ दिनों तक कार्रवाई होती है और फिर वसूली का रेट बढ़ जाता है। छोटे अस्पतालों पर कार्रवाई होती है। बाकी पर मेहरबानी की जाती है। जितने स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं उससे चार गुना ज्यादा अस्पताल हैं। लाइसेंस कैसे मिला?

अस्पताल संचालकों का राजनीतिक संरक्षण
जिले में गर्भपात से जुड़े अस्पतालों और क्लीनिकों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है इसलिए प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। स्टिंग ऑपरेशन में जिन अस्पतालों के नाम सामने आए हैं उन्हें भी अलग-अलग राजनीतिक दल से जुड़े लोगों के संरक्षण प्राप्त हैं। लिहाजा, कार्रवाई किए जाने का दबाव बनाया जा रहा है। तीन अस्पताल ऐसे हैं जो सीएचसी के एक किलोमीटर के दायरे में हैं। रतनपुरा क्षेत्र में संचालित निजी अस्पताल को सत्ता पक्ष के एक नेता का संरक्षण प्राप्त है। कोपागंज के एक अस्पताल को कार्रवाई की जद से बाहर निकालने का प्रयास चल रहा है। इसमें सत्ता के साथ ही विपक्ष के नेता भी लगे हैं।

ये है मामला
वाराणसी में गर्भपात की दवा के सेवन से युवती की मौत के बाद हमारी टीम ने शुक्रवार से रविवार के बीच स्टिंग ऑपरेशन किया था। इससे पता चला था कि कोपागंज, अमिला, मादी सिपाह, थानादास और पुराघाट क्षेत्र में मेडिकल स्टोर की आड़ में गर्भपात का धंधा खुलेआम चल रहा है। पांच अस्पतालों/क्लीनिकों में डमी महिला मरीज को भेजकर जांच की गई जहां संचालकों ने दो से सात हजार रुपये में गर्भपात कराने की बात कही और भरोसा दिलाया कि कोई समस्या नहीं होगी। इन इलाकों में गर्भपात की दवा मेडिकल स्टोर पर सिरदर्द की गोली की तरह बेची जा रही है। न डॉक्टर का पर्चा लिया जाता है, न जांच रिपोर्ट और न ही अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखी जाती है।

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