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Mau News: ऑनलाइन दवा की बिक्री के विरोध में मेडिकल स्टोर संचालकों ने बंद रखीं दुकानें
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दवा व्यापारियों की बंदी के बाद जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट ज्ञापन सौंपने पहुंचे दवा व्यावार वेलफेय
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राष्ट्रीय संस्था ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के आह्वान पर ई-फार्मेसी और कॉरपोरेट नीतियों के विरोध में बुधवार को जिले के दवा व्यापारियों ने दुकानें बंद रखीं।
इससे जहां दवा व्यापार प्रभावित हुआ, वहीं दुकानें बंद होने से मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस दौरान जिले के 10 से अधिक प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र मरीजों के लिए मददगार बने।
जिन केंद्रों पर सामान्य दिनों में कम भीड़ रहती थी, वहां भी लोगों की भीड़ दिखाई दी। दूसरी तरफ दवा व्यापारियों ने गाजीपुर तिराहा से जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।
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दवा व्यापार वेलफेयर सोसायटी के महामंत्री प्रवीण कुमार पांडेय ने बताया कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने, 28 अगस्त 2018 की अधिसूचना तथा 26 मार्च 2020 की अधिसूचना को वापस लेने और बड़े कॉरपोरेट्स द्वारा भारी छूट देकर बाजार को अस्थिर करने वाली नीतियों पर रोक लगाने की मांग को लेकर संगठन काफी समय से मुखर था।
उन्होंने बताया कि इसको लेकर पहले भी कई बार ज्ञापन सौंपा गया था। इसी क्रम में बुधवार को जिले के दवा व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर गाजीपुर तिराहा पर एकत्र होकर प्रदर्शन किया।
उनका दावा है कि एक दिन 1200 से अधिक मेडिकल स्टोर की बंदी से करीब 80 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। बताया कि इस बंदी को लेकर कई माह से संगठन योजना बना रहा था, ताकि अपनी मांग सरकार तक पहुंचाई जा सके।
इस मौके पर अध्यक्ष शिवजी राय, राजेश कुमार तिवारी, राजेश सिंह, रवि सिंह, बृजेश गुप्ता, गौरी गुप्ता, निर्भय पांडेय, जमील अंसारी, सागर बरनवाल, अरविंद पांडेय, भगवान गुप्ता, प्रताप राय, मुकेश राय, अन्नू राय, खुनखुन सिंह, अरुण सिंह, प्रशांत सिंह, रेनू तिवारी, शिव अग्रवाल, अनुराग राय सहित अन्य दवा व्यापारी सदस्य उपस्थित रहे।
जिन प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर नहीं होती थी भीड़, वहां पता पूछकर पहुंचे लोग
जिले के 10 से अधिक प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर बुधवार को मेडिकल स्टोर बंद होने के चलते दवा लेने के लिए लोगों की भीड़ दिखाई दी। पहसा से आए मनोज चौहान ने बताया कि वायरल होने पर डॉक्टर को दिखाने के बाद वह दवा के लिए काफी देर तक भटकते रहे। बाद में जन औषधि केंद्र पहुंचकर उन्हें दवा मिली। वहीं, गाजीपुर जिले के दुल्लहपुर निवासी रामबदन ने बताया कि डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद वह दवा के लिए पहले आजमगढ़ मोड़ स्थित पांच से अधिक मेडिकल स्टोरों पर पहुंचे। इसके बाद गाजीपुर तिराहा गए, लेकिन कहीं दुकान खुली नहीं मिली। इसके बाद वह जिला अस्पताल स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पहुंचकर दवा ली।
इससे जहां दवा व्यापार प्रभावित हुआ, वहीं दुकानें बंद होने से मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस दौरान जिले के 10 से अधिक प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र मरीजों के लिए मददगार बने।
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जिन केंद्रों पर सामान्य दिनों में कम भीड़ रहती थी, वहां भी लोगों की भीड़ दिखाई दी। दूसरी तरफ दवा व्यापारियों ने गाजीपुर तिराहा से जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।
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उन्होंने बताया कि इसको लेकर पहले भी कई बार ज्ञापन सौंपा गया था। इसी क्रम में बुधवार को जिले के दवा व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर गाजीपुर तिराहा पर एकत्र होकर प्रदर्शन किया।
उनका दावा है कि एक दिन 1200 से अधिक मेडिकल स्टोर की बंदी से करीब 80 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। बताया कि इस बंदी को लेकर कई माह से संगठन योजना बना रहा था, ताकि अपनी मांग सरकार तक पहुंचाई जा सके।
इस मौके पर अध्यक्ष शिवजी राय, राजेश कुमार तिवारी, राजेश सिंह, रवि सिंह, बृजेश गुप्ता, गौरी गुप्ता, निर्भय पांडेय, जमील अंसारी, सागर बरनवाल, अरविंद पांडेय, भगवान गुप्ता, प्रताप राय, मुकेश राय, अन्नू राय, खुनखुन सिंह, अरुण सिंह, प्रशांत सिंह, रेनू तिवारी, शिव अग्रवाल, अनुराग राय सहित अन्य दवा व्यापारी सदस्य उपस्थित रहे।
जिन प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर नहीं होती थी भीड़, वहां पता पूछकर पहुंचे लोग
जिले के 10 से अधिक प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर बुधवार को मेडिकल स्टोर बंद होने के चलते दवा लेने के लिए लोगों की भीड़ दिखाई दी। पहसा से आए मनोज चौहान ने बताया कि वायरल होने पर डॉक्टर को दिखाने के बाद वह दवा के लिए काफी देर तक भटकते रहे। बाद में जन औषधि केंद्र पहुंचकर उन्हें दवा मिली। वहीं, गाजीपुर जिले के दुल्लहपुर निवासी रामबदन ने बताया कि डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद वह दवा के लिए पहले आजमगढ़ मोड़ स्थित पांच से अधिक मेडिकल स्टोरों पर पहुंचे। इसके बाद गाजीपुर तिराहा गए, लेकिन कहीं दुकान खुली नहीं मिली। इसके बाद वह जिला अस्पताल स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पहुंचकर दवा ली।