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Mau News: हत्या के प्रयास के मामले में दोषी को दस साल की सजा, 37 साल बाद आया फैसला
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अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर-एक अजय कुमार श्रीवास्तव ने बलवा, घातक हथियारों से लैस होकर बलवा करने और हत्या के प्रयास के मामले में नामजद आठ आरोपियों में सुनवाई के बाद एक को दोषी पाते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ ही कुल 40 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। चार आरोपियों की मृत्यु हो जाने के चलते उनके विरुद्ध मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी गई। वहीं, तीन के नाबालिग होने के चलते उनकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को भेज दी गई थी। मामला मधुबन थाना क्षेत्र के कुंडा शरीफपुर गांव का है।
अभियोजन के अनुसार कुंडा शरीफपुर गांव निवासी अमरनाथ सिंह पुत्र बिंदेश्वरी सिंह की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें गांव के ही रामधीर सिंह पुत्र ऋषिदेव सिंह, सुरेश सिंह, रविंद्र सिंह, अमरेश सिंह, यतींद्रनाथ सिंह, फूलचंद सिंह, अखिलेश सिंह और धर्मेंद्र सिंह को नामजद किया गया था।
वादी का कथन था कि जमीन की कब्जेदारी के विवाद को लेकर 22 अप्रैल 1989 की सुबह 6:30 बजे आरोपीगण असलहों से लैस होकर जमीन पर कब्जा करने लगे। मना करने पर आरोपियों ने मारपीट कर हत्या का प्रयास किया, जिसमें नौ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
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न्यायालय में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक ने चार गवाहों को पेश कर अभियोजन पक्ष रखा। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है।
एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी रामधीर सिंह को बलवा, घातक हथियारों से सुसज्जित होकर बलवा करने व हत्या के प्रयास के मामले में दोषी पाया।
दोषी पाए जाने के बाद उसे हत्या के प्रयास के मामले में 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ ही 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। बलवा के मामले में दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
घातक हथियारों से सुसज्जित होकर बलवा करने के मामले में तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड न देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
आरोपी रविंद्र सिंह, अमरेश सिंह, यतींद्रनाथ सिंह व फूलचंद सिंह की विचारण के दौरान मृत्यु हो जाने के चलते उनके विरुद्ध मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। वहीं, तीन के नाबालिग होने के चलते उनकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को भेज दी गई थी।
अभियोजन के अनुसार कुंडा शरीफपुर गांव निवासी अमरनाथ सिंह पुत्र बिंदेश्वरी सिंह की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें गांव के ही रामधीर सिंह पुत्र ऋषिदेव सिंह, सुरेश सिंह, रविंद्र सिंह, अमरेश सिंह, यतींद्रनाथ सिंह, फूलचंद सिंह, अखिलेश सिंह और धर्मेंद्र सिंह को नामजद किया गया था।
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वादी का कथन था कि जमीन की कब्जेदारी के विवाद को लेकर 22 अप्रैल 1989 की सुबह 6:30 बजे आरोपीगण असलहों से लैस होकर जमीन पर कब्जा करने लगे। मना करने पर आरोपियों ने मारपीट कर हत्या का प्रयास किया, जिसमें नौ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
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एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी रामधीर सिंह को बलवा, घातक हथियारों से सुसज्जित होकर बलवा करने व हत्या के प्रयास के मामले में दोषी पाया।
दोषी पाए जाने के बाद उसे हत्या के प्रयास के मामले में 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ ही 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। बलवा के मामले में दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
घातक हथियारों से सुसज्जित होकर बलवा करने के मामले में तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड न देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
आरोपी रविंद्र सिंह, अमरेश सिंह, यतींद्रनाथ सिंह व फूलचंद सिंह की विचारण के दौरान मृत्यु हो जाने के चलते उनके विरुद्ध मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। वहीं, तीन के नाबालिग होने के चलते उनकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को भेज दी गई थी।