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Mau News: मां कात्यायनी की उपासना से मनुष्य के भीतर होता है सकारात्मक ऊर्जा का संचार
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दोहरीघाट के मातेश्वरी धाम में नवरात्र में आयोजित कार्यक्रम में लोगों को संबोधियत करते सद्गुरु
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नवरात्र के छठवें दिन मां कात्यायनी के अवतरण दिवस के अवसर पर मातेश्वरी परिवार की तरफ से आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में सदगुरु महाराज ने कहा कि मां कात्यायनी केवल एक देवी नहीं, बल्कि धर्म, साहस और न्याय की प्रतीक हैं।
कहा कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब मां शक्ति विभिन्न रूपों में अवतरित होकर धर्म की स्थापना करती हैं।कहा कि मां कात्यायनी की उपासना से मनुष्य के भीतर आत्मबल, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए आस्था के साथ-साथ अनुशासन और संयम भी अत्यंत आवश्यक है।
प्रवचन के दौरान उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों और नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागने का आह्वान करते हुए कहा कि सच्ची भक्ति वही है, जो मानवता की सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें।
कार्यक्रम के अंत में भजन-कीर्तन और आरती के साथ श्रद्धालुओं ने मां कात्यायनी से सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। मातेश्वरी परिवार के अनेक पदाधिकारी और हजारों की संख्या में भक्तगण उपस्थित थे। प्रवचन के अंत में मां की आरती और प्रसाद वितरण किया गया।
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कहा कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब मां शक्ति विभिन्न रूपों में अवतरित होकर धर्म की स्थापना करती हैं।कहा कि मां कात्यायनी की उपासना से मनुष्य के भीतर आत्मबल, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए आस्था के साथ-साथ अनुशासन और संयम भी अत्यंत आवश्यक है।
प्रवचन के दौरान उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों और नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागने का आह्वान करते हुए कहा कि सच्ची भक्ति वही है, जो मानवता की सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें।
कार्यक्रम के अंत में भजन-कीर्तन और आरती के साथ श्रद्धालुओं ने मां कात्यायनी से सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। मातेश्वरी परिवार के अनेक पदाधिकारी और हजारों की संख्या में भक्तगण उपस्थित थे। प्रवचन के अंत में मां की आरती और प्रसाद वितरण किया गया।