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UP: 27 साल बाद आया फैसला, आरोपी को कोर्ट ने दी ऐसी सजा, सुनकर हर कोई हो गया हैरान; जानें पूरा मामला

अमर उजाला नेटवर्क, बागपत Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 08 Jun 2026 03:14 PM IST
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सार

बागपत कोर्ट ने 27 साल पुराने मामले में सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी को एक दिन अदालत में खड़े होने की सजा सुनाई, साथ ही एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। आरोपी 100 से ज्यादा तारीखों पर कचहरी आया था। 

Baghpat News After 27 Years of Legal Battle, Accused Receives One-Day Courtroom Sentence and Fine
baghpat court verdict - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

बागपत के सरूरपुरकलां गांव में 27 साल पहले जान से मारने की धमकी देने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनींद्रपाल सिंह ने राजेंद्र सिंह को एक दिन न्यायालय में खड़ा रहने की सजा सुनाई। साथ ही एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया। एक दिन खड़ा रहने की सजा पूरी होने के बाद राजेंद्र को घर भेज दिया गया।


सरूरपुरकलां गांव के रहने वाले धारा सिंह ने 26 जून 1999 को अपने गांव के ही राजेंद्र समेत तीन लोगों के खिलाफ गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। 
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सुनवाई के दौरान आरोपी राजेंद्र की पत्रावली अलग कर दी गई, जिसकी सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनींद्रपाल सिंह के न्यायालय में चल रही थी। न्यायालय में छह तारीख पर पेश नहीं होने पर न्यायाधीश ने राजेंद्र के मकान के कुर्की वारंट जारी कर दिए थे।
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इसलिए शनिवार को राजेंद्र ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। राजेंद्र ने खुद को बीमार और आर्थिक स्थिति कमजोर बताते हुए न्यायालय में तारीख पर बार-बार आने में असमर्थता जताई। साथ ही अपना अपराध स्वीकार करते हुए कम सजा सुनाने और शनिवार को ही प्रकरण निस्तारित करने की याचना की।

राजेंद्र ने न्यायालय में यह भी बताया कि इस मामले में वह पहले भी कई दिन जेल में बंद रह चुका है। राजेंद्र के अपराध स्वीकार करने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनींद्रपाल सिंह ने उसे न्यायालय उठने तक एक दिन खड़ा रहने की सजा सुनाई।
 

साथ ही एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 10 दिन की सजा भुगतने के आदेश दिए। इसके बाद राजेंद्र ने न्यायालय में रहकर सजा की अवधि पूरी की और अर्थदंड भी अदा कर दिया। इसके बाद वह अपने घर लौट गया।

100 से ज्यादा तारीखों पर कचहरी आया
धारा सिंह और राजेंद्र के बीच वर्ष 1999 में हुए विवाद में न्यायालय में तारीख लगती रही। इन 27 वर्षों में इस प्रकरण में 100 से ज्यादा बार तारीख लगाई गई और राजेंद्र न्यायालय में उपस्थित हुए। वह पिछले कुछ समय से तारीख पर नहीं आए, जिसकी वजह से छह महीने पहले पहले गिरफ्तारी वारंट जारी हुए और बाद में कुर्की के वारंट जारी किए गए।

एक दिन में खत्म हो गई 27 साल की टेंशन
राजेंद्र के अनुसार पिछले 27 साल से न्यायालय में हर तारीख पर जाने की टेंशन रहती थी। केस के लिए रुपये अलग से खर्च होते थे। इस तरह 27 साल की टेंशन एक दिन में खत्म हो गई।
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