मेरठ में हर ओर बेबसी है। आंखों के आंसू तक सूख गए हैं। संकट काल में अपनों ने भी मुंह मोड़ लिया है। सुख-दुख की पूछना तो दूर कंधा देने तक नहीं आ रहे हैं। एक ओर जहां अपने दूरी बना रहे हैं, वहीं मुस्लिम समाज के लोगों ने हिंदू बहन का अंतिम संस्कार कराकर सौहार्द की मिसाल भी पेश की है।
भाईचारा: मुस्लिम भाइयों के कंधों पर हिंदू बहन की अंतिम यात्रा, पेश की सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल, देखिए तस्वीरें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हापुड़ रोड रामनगर निवासी सुषमा अग्रवाल कई दिनों से बुखार से ग्रस्त थीं। वह घर में रहकर इलाज करा रही थीं। बुधवार सुबह उनकी मृत्यु हो गई है। उनकी शव यात्रा में मुस्लिम समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। उन्होंने सूरजकुंड पहुंचकर अंतिम संस्कार कराया। परवेज ने बताया कि हम सब पड़ोसी हैं और परिवार के साथ रहते हैं।
एक-दूसरे का सुख दु:ख में पूर्ण सहयोग करते हैं। आज इस मुश्किल घड़ी में अपने पड़ोसियों को सहयोग के लिए उनके साथ आए हैं। इस दौरान शकील, अहमद अंसारी, तसलीम, जावेद सिद्दीकी मौजूद रहे।
इधर, मां को कंधा देने के लिए बुलाने पड़े मजदूर
जवाहर नगर निवासी एक युवक की मां की बीमारी के चलते मौत हो गई। उसने रिश्तेदारों को फोन किया, लेकिन कंधा देने के लिए कोई नहीं आया। युवक और उसके भाई को मां की अर्थी उठवाने के लिए 500 रुपये देकर दो मजदूर करने पड़े।
30 मिनट में पहुंचे 28 शव
बुधवार को सूरजकुंड श्मशान घाट में 30 मिनट के अंतराल में 28 शव पहुंचे। करीब दो घंटे के इंतजार के बाद अंतिम संस्कार का नंबर आ रहा है। श्मशान पर अब प्लेटफार्म से ज्यादा सड़क पर शव जल रहे हैं। रोडवेज स्थित गंगा मोटर कमेटी के कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार शाम 5:00 बजे तक 90 लोगों के अंतिम संस्कार के लिए सामान खरीदा गया। इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई, बच्चे और बड़े सभी का सामान शामिल था। सूरजकुंड श्मशान में वर्तमान समय में अर्ध रात्रि तक अंतिम संस्कार का कार्य किया जा रहा है। शाम पांच बजे तक 55 मृतकों का सूरजकुंड श्मशान में अंतिम संस्कार हो चुका था।