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खाद के जल्दी प्रयोग से पेड़ी फसल जल्द देगी अच्छा फुटाव : प्रणव राणा
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लावड़- जमालपुर गांव में ट्रेंच विधि से बुवाई कराते गन्ना विशेषज्ञ। स्रोत : स्वयं
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संवाद न्यूज एजेंसी
लावड़। फसलों की बढ़वार व उत्पादन मौसम पर काफी हद तक निर्भर करती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पिछले वर्ष अप्रैल-जून के मध्य कई बार बारिश की गतिविधियां रही, जिसका असर इस बार के गन्ना उत्पादन पर देखने को मिल रहा है। लगभग सभी गन्ना किस्मों की पैदावार घटी हुई है और मिलों को भी गन्ने की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
गन्ना शोध एवं विकास डॉ. प्रणव राणा का कहना है कि गन्ना पेड़ी एक तरह से बिल्कुल नई फसल की शुरुआत होती है। गन्ना किस्म कोई भी हो केवल सही कटाई, खाद के जल्दी प्रयोग से किसान अपनी पेड़ी फसल को अच्छा फुटाव दे सकते हैं।
गन्ना पेड़ी जो कुल गन्ने रकबे का लगभग आधा हिस्सा होती है। इसकी पैदावार को सही देखभाल से बढ़ाया जा सकता है। अभी पौधा गन्ना कटना शुरू हुआ है तो इसी समय खेतों में कुछ क्रियाओं की जरूरत है जो आगामी पेड़ी फसल को अच्छी शुरूआत देगी। जमालपुर व गड़ीना गांव में पहुंचकर उन्होंने किसानों के खेतों पर ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई के बारे में किसानों को जानकारी दी।
बताया कि मध्य मार्च तक पौधे गन्ने की कटाई जमीन से करें व पोगले न रखें। इस समय पोगलों में चोटी बेधक कीट की गिंडार मौजूद रहती है जो गर्मी की शुरुआत होते ही सक्रिय हो जाती है और फिर लगभग पूरे वर्ष ही बार-बार गन्ना खेतों में इस कीट का आक्रमण होने लगता है। पाेगले कटने से कीट की ज्यादातर सूंडियां खत्म हो जाती हैं।
पौधा गन्ने के ठूठों की कटाई और जड़ों की छटाई के लिए आरएमडी यंत्र का प्रयोग करें। इससे खेतों से खरपतवार खत्म हो जाती है और नए गन्ना कल्लों का फुटाव एक सार, ज्यादा मात्रा में होता है, जिससे खेत में गन्नों की संख्या बढ़ जाती है। उपयोग में ध्यान रखना है कि इसे काफी सूखे तथा मिट्टी चढ़े खेत में चलाएं, ट्रैक्टर की गति कम रखें, मशीन के ब्लेड को जमीन की सतह से मिलाकर चलाएं।
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लावड़। फसलों की बढ़वार व उत्पादन मौसम पर काफी हद तक निर्भर करती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पिछले वर्ष अप्रैल-जून के मध्य कई बार बारिश की गतिविधियां रही, जिसका असर इस बार के गन्ना उत्पादन पर देखने को मिल रहा है। लगभग सभी गन्ना किस्मों की पैदावार घटी हुई है और मिलों को भी गन्ने की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
गन्ना शोध एवं विकास डॉ. प्रणव राणा का कहना है कि गन्ना पेड़ी एक तरह से बिल्कुल नई फसल की शुरुआत होती है। गन्ना किस्म कोई भी हो केवल सही कटाई, खाद के जल्दी प्रयोग से किसान अपनी पेड़ी फसल को अच्छा फुटाव दे सकते हैं।
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गन्ना पेड़ी जो कुल गन्ने रकबे का लगभग आधा हिस्सा होती है। इसकी पैदावार को सही देखभाल से बढ़ाया जा सकता है। अभी पौधा गन्ना कटना शुरू हुआ है तो इसी समय खेतों में कुछ क्रियाओं की जरूरत है जो आगामी पेड़ी फसल को अच्छी शुरूआत देगी। जमालपुर व गड़ीना गांव में पहुंचकर उन्होंने किसानों के खेतों पर ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई के बारे में किसानों को जानकारी दी।
बताया कि मध्य मार्च तक पौधे गन्ने की कटाई जमीन से करें व पोगले न रखें। इस समय पोगलों में चोटी बेधक कीट की गिंडार मौजूद रहती है जो गर्मी की शुरुआत होते ही सक्रिय हो जाती है और फिर लगभग पूरे वर्ष ही बार-बार गन्ना खेतों में इस कीट का आक्रमण होने लगता है। पाेगले कटने से कीट की ज्यादातर सूंडियां खत्म हो जाती हैं।
पौधा गन्ने के ठूठों की कटाई और जड़ों की छटाई के लिए आरएमडी यंत्र का प्रयोग करें। इससे खेतों से खरपतवार खत्म हो जाती है और नए गन्ना कल्लों का फुटाव एक सार, ज्यादा मात्रा में होता है, जिससे खेत में गन्नों की संख्या बढ़ जाती है। उपयोग में ध्यान रखना है कि इसे काफी सूखे तथा मिट्टी चढ़े खेत में चलाएं, ट्रैक्टर की गति कम रखें, मशीन के ब्लेड को जमीन की सतह से मिलाकर चलाएं।