युवाओं को टेरिटोरियल आर्मी में भर्ती कराने के नाम पर ठगने वाले तीन युवकों को पुलिस और एसओजी की टीम ने गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से बहुत सी सामग्री मिली है, जिससे ये युवाओं को फर्जी लेटर बनाकर देते थे। यही नहीं पुलिस टीम इनके गट्टू खाता स्थित ट्रेनिंग कैंप में भी गई। यहां ये युवकों को आर्मी से मिलती-जुलती वर्दी में ट्रेनिंग कराते थे। वहीं, सेना भर्ती के नाम पर ठगी करने वाले गैंग में सेना से रिटायर्ड अधिकारियों के शामिल होने की जानकारी भी मिली है।
आर्मी में भर्ती कराने का खुला बड़ा राज, यहां बना है फर्जी ट्रेनिंग सेंटर, जानें- कैसे करते हैं युवाओं से ठगी
आर्मी में भर्ती कराने के नाम पर ठगने वाले तीन युवकों को पुलिस और एसओजी की टीम ने गिरफ्तार कर लिया।
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बता दें कि आर्मी इंटेलीजेंस की जानकारी पर पुलिस ने मामले की तफ्तीश की थी। सोमवार को एक युवक की तहरीर पर पांच आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद एसओजी प्रभारी एश्वर्य पाल और प्रेमनगर थाना प्रभारी धनराज बिष्ट की अध्यक्षता में एक टीम का गठन किया गया। सोमवार शाम को ही पुलिस ने पांच में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें सोनू निवासी बोंदकला बोंदा चरखीदादरी भिवानी हरियाणा, स्वराज उर्फ युवराज उर्फ अरविंद निवासी गांव तिलियाधार खुर्जा बुलंदशहर और अक्षित उर्फ पंकज निवासी हरेडा थाना बागपत शामिल हैं।
वहीं, पहले मेरठ में सदर पुलिस ने इसी गिरोह के एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, तभी से मेरठ आर्मी इंटेलिजेंस गिरोह की तलाश में लगी हुई थी। बताया है कि इस गिरोह का कनेक्शन सेना से रिटायर्ड अधिकारियों से है। जोकि फर्जी नियुक्ति पत्र देकर ट्रेनिंग करने के लिए युवाओं को भेज देते हैं। आर्मी इंटेलिजेंस के अलावा देहरादून पुलिस भी इस मामले की जांच पड़ताल में लगी है कि गिरोह का नेटवर्क कहां तक फैला हुआ है।
चार चरणों में करते हैं ठगी
पहला चरण
सबसे पहले रवीन्द्र नाम के व्यक्ति द्वारा हरियाणा, उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों से बेरोजगार युवकों को इकट्ठा किया गया। 10-12 लड़के इकट्ठा होने के बाद धनराशि तय की गई। प्रति युवक पांच से 10 लाख रुपये भर्ती के लिए तय हुआ था।
दूसरा चरण
सेना में भर्ती के लिए लड़कों का चयन होने के बाद रवीन्द्र अपने साथी सोनू को इन लडकों से मिलवाता था और सोनू इन लडकों से उनके कागजात आधार कार्ड आदि इकठ्ठे करता था। इसके बाद अपने अन्य साथी युवराज के साथ मिलकर फर्जी ज्वॉइनिंग लैटर / सलेक्शन लैटर तैयार करवाता था।
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तीसरा चरण
सभी लड़कों के कागजात इकट्ठा होने के बाद उन लड़कों का मेडिकल करवाने के लिए आर्मी कैंट क्षेत्र चुना जाता था, जिसमें इनका सहयोगी रोहित नाम का व्यक्ति आर्मी कैंट, धौलाकुंआ, दिल्ली कैंपस में अंदर ले जाकर इनके मेडिकल करवाता है।
चौथा चरण
इसमें सभी लड़कों का मेडिकल होने के बाद ट्रेनिंग के लिए स्थान का चयन किया जाता है, जहां पर बैच के अनुसार इन्हें ट्रेनिंग दिलवाई जाती है। हिमालयन कैंप, गट्डू खत्ता टिहरी गढ़वाल में आर्मी की मिलती जुलती वेशभूषा में इन्हें आर्मी की तरह प्रशिक्षण दिया जाता है।
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पिछले साल भी हुई थी ठगी
पिछले साल भी सोनू ने अपने गांव के आसपास के 5-6 लड़कों के पैसे लेकर फर्जी ज्वॉइनिंग लेटर दे दिए थे, जिसका पता चलने पर लोगों ने सोनू की पिटाई भी की, किंतु कोई मुकदमा दर्ज नहीं करवाया था।
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देहरादून पुलिस ने इस मामले में काफी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई है। मेरठ पुलिस ने गैंग का आरोपी पहले पकड़ा था। अब मेरठ पुलिस देहरादून पुलिस और आर्मी इंटेलिजेंस के साथ मामले की जांच कराएगी। पुलिस टीम ठगी करने वाले इस गिरोह के नेटवर्क का पता लगा रही है। - प्रवीण कुमार, आईजी मेरठ रेंज
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