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सियासी अखाड़ा बना कपसाड़ : सत्ता पक्ष गांव में, विपक्ष के सामने बैरिकेड्स की दीवार
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मोदीपुरम- सिवाया टोल प्लाजा पर रोके जाने के बाद पल्लवपुरम थाना प्रभारी से पूर्व जिला पंचायत अध्
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इस मामले को लेकर सियासत उफान पर है। इंसाफ की मांग कर रहे परिजनों के आंसुओं के बीच शुक्रवार के बाद शनिवार को भी प्रशासन ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया।
इस दौरान एक तरफ भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम और सुनील भराला गांव के भीतर परिजनों से मुलाकात कर मदद का भरोसा दिला रहे थे, तो दूसरी तरफ विपक्षी नेताओं को सीमाओं पर रोक दिया गया। पुलिस ने विपक्षी सांसदों, विधायकों व अन्य नेताओं के आगे बैरिकेड्स की दीवार खड़ी कर दी। विपक्ष ने इस बात का कड़ा विरोध जताया और सवाल उठाया कि अगर सत्ताधारी नेता गांव जा सकते हैं, तो विपक्ष के लिए रास्ते बंद क्यों हैं।
दरअसल कपसाड़ गांव निवासी सुनीता और उनकी बेटी बृहस्पतिवार को खेत पर जा रही थी। रास्ते में गांव के ही निवासी पारस ने अपने साथी सुनील और एक अन्य के साथ मिलकर सुनीता की बेरहमी से हत्या कर दी और उनकी बेटी रूबी का अपहरण करके फरार हो गया। इस मामले में सुनीता के बड़े बेटे नरसी ने थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। शुक्रवार को दिनभर गांव में भारी सियासी हलचल रही। वहीं सुबह से शाम तक पुलिस और विपक्षी नेताओं के बीच दिनभर खींचतान चलती रही। विपक्ष को रोकने के लिए पुलिस ने काशी टोल प्लाजा, अटेरना पुल और सलावा चौराहे पर भारी घेराबंदी की। सपा सांसद रामजी लाल सुमन और विधायक अतुल प्रधान को काशी टोल प्लाजा पर रोका गया जिसके बाद वे वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए। पुलिस और नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की ने माहौल को और गर्मा दिया। नगीना सांसद चंद्रशेखर के आने की सूचना पर अटेरना पुल पर भारी किलेबंदी की गई। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान को सिवाया टोल प्लाजा पर रोका गया, जहां उनकी पुलिस अधिकारियों से तीखी झड़प हुई। कश्यप एकता क्रांति मिशन के संस्थापक अजय कश्यप और पदाधिकारियों ने सलावा चौराहे पर भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और धरने पर बैठ गए।
गांव की गली में अपनी बेटी की राह देख रहे पिता सतेंद्र की सिसकियां सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गई। सतेंद्र बस यही दोहरा रहे हैं मेरी बेटी अपनी मां को आखिरी बार देख तक नहीं सकी। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे प्रशासन से केवल एक ही सवाल पूछ रहे हैं हमारी रूबी कब वापस आएगी।
मीडियाकर्मियों को रोका, हुई धक्का मुक्की
कपसाड़ गांव में कवरेज के लिए पहुंचे एक चैनल के संवाददाता ने पुलिस पर गांव में जाने से रोकने का आरोप लगाया। आरोप है कि सीओ ने पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर उनके साथ अभद्रता और धक्का मुक्की की। विरोध करने पर मारपीट की गई। मीडियाकर्मी ने किसी तरह गांव पहुंचकर पूर्व विधायक को इसकी जानकारी दी। जिस पर पूर्व विधायक ने उक्त पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया।
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इस दौरान एक तरफ भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम और सुनील भराला गांव के भीतर परिजनों से मुलाकात कर मदद का भरोसा दिला रहे थे, तो दूसरी तरफ विपक्षी नेताओं को सीमाओं पर रोक दिया गया। पुलिस ने विपक्षी सांसदों, विधायकों व अन्य नेताओं के आगे बैरिकेड्स की दीवार खड़ी कर दी। विपक्ष ने इस बात का कड़ा विरोध जताया और सवाल उठाया कि अगर सत्ताधारी नेता गांव जा सकते हैं, तो विपक्ष के लिए रास्ते बंद क्यों हैं।
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दरअसल कपसाड़ गांव निवासी सुनीता और उनकी बेटी बृहस्पतिवार को खेत पर जा रही थी। रास्ते में गांव के ही निवासी पारस ने अपने साथी सुनील और एक अन्य के साथ मिलकर सुनीता की बेरहमी से हत्या कर दी और उनकी बेटी रूबी का अपहरण करके फरार हो गया। इस मामले में सुनीता के बड़े बेटे नरसी ने थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। शुक्रवार को दिनभर गांव में भारी सियासी हलचल रही। वहीं सुबह से शाम तक पुलिस और विपक्षी नेताओं के बीच दिनभर खींचतान चलती रही। विपक्ष को रोकने के लिए पुलिस ने काशी टोल प्लाजा, अटेरना पुल और सलावा चौराहे पर भारी घेराबंदी की। सपा सांसद रामजी लाल सुमन और विधायक अतुल प्रधान को काशी टोल प्लाजा पर रोका गया जिसके बाद वे वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए। पुलिस और नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की ने माहौल को और गर्मा दिया। नगीना सांसद चंद्रशेखर के आने की सूचना पर अटेरना पुल पर भारी किलेबंदी की गई। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान को सिवाया टोल प्लाजा पर रोका गया, जहां उनकी पुलिस अधिकारियों से तीखी झड़प हुई। कश्यप एकता क्रांति मिशन के संस्थापक अजय कश्यप और पदाधिकारियों ने सलावा चौराहे पर भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और धरने पर बैठ गए।
गांव की गली में अपनी बेटी की राह देख रहे पिता सतेंद्र की सिसकियां सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गई। सतेंद्र बस यही दोहरा रहे हैं मेरी बेटी अपनी मां को आखिरी बार देख तक नहीं सकी। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे प्रशासन से केवल एक ही सवाल पूछ रहे हैं हमारी रूबी कब वापस आएगी।
मीडियाकर्मियों को रोका, हुई धक्का मुक्की
कपसाड़ गांव में कवरेज के लिए पहुंचे एक चैनल के संवाददाता ने पुलिस पर गांव में जाने से रोकने का आरोप लगाया। आरोप है कि सीओ ने पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर उनके साथ अभद्रता और धक्का मुक्की की। विरोध करने पर मारपीट की गई। मीडियाकर्मी ने किसी तरह गांव पहुंचकर पूर्व विधायक को इसकी जानकारी दी। जिस पर पूर्व विधायक ने उक्त पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया।