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किडनी कांड: 3.50 लाख रुपये में निकाल ली एमबीए के छात्र की किडनी, टेलीग्राम के जरिये हुआ सौदा, ये है पूरा मामला

अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Mohd Mustakim Updated Thu, 02 Apr 2026 10:30 AM IST
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सार

Meerut News: कानपुर में किडनी के अवैध ट्रांसप्लांट का मामला उजागर होने के बाद परतें खुलती जा रही हैं। मेरठ के अल्फा अस्पताल के तीन डॉक्टरों का नाम भी इस कांड में सामने आ रहा है। अल्फा अस्पताल के डॉ. अफजल ने टेलीग्राम पर किडनी डोनर की आवश्यकता की पोस्ट शेयर की थी। 

Kidney scandal: MBA student's kidney taken out for Rs 3.50 lakh, deal made through telegram
मेरठ का अल्फा अस्पताल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कानपुर में किडनी के काले कारोबार में शामिल मेरठ के तीन डॉक्टरों डॉ. अफजल, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. अमित और डॉ. वैभव मुदगल को पुलिस तलाश रही है। ये तीनों मंगल पांडेय नगर स्थित अल्फा हॉस्पिटल से जुड़े बताए गए हैं। इस अस्पताल पर पहले भी उपचार में लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं। ऐसे ही एक मामले की शिकायत होने पर सीएमओ ने 28 नवंबर 2025 को अल्फा हॉस्पिटल का लाइसेंस निलंबित कर दिया था।
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सीएमओ ने उस दौरान गाजियाबाद निवासी हरद्वारी लाल की शिकायत पर यह कार्रवाई की थी। हरद्वारी लाल का आरोप था कि उनके बेटे मुकेश कुमार को लकवा का इलाज कराने के लिए 15 नवंबर 2025 को मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था। अगले दिन 16 नवंबर 2025 को एक अज्ञात एंबुलेंस चालक ने उन्हें अल्फा हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया। चालक ने 20 से 25 हजार रुपये में इलाज का वादा किया था। अस्पताल में उनसे 90 हजार रुपये जमा कराए थे। 
इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अस्पताल का पंजीकरण निलंबित कर दिया था। सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने बताया कि इस मामले में आरोप साबित न होने पर पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगा दी थी। इसके बाद पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने अस्पताल का लाइसेंस बहाल कर दिया था।
 
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टेलीग्राम से डोनर ढूंढकर मोरना की महिला को दी किडनी
कानपुर के कल्याणपुर थाना पुलिस ने मंगलवार को अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट का रैकेट चलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। अल्फा हॉस्पिटल के डॉ. अफजल पर आरोप है कि उसने टेलीग्राम चैनल के जरिये पोस्ट डालकर किडनी डोनर की तलाश शुरू की थी। इसके बाद देहरादून के कॉलेज से एमबीए अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहे बिहार के बेगूसराय निवासी आयुष को किडनी देने के लिए तैयार किया गया। 
बताया गया है कि इसके बाद मुजफ्फरनगर के मोरना निवासी पारुल को 29 मार्च को कानपुर के आहूजा अस्पताल में दिल्ली से आए डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट कर किडनी लगाई। आयुष को केवल साढ़े तीन लाख रुपये दिए गए। इस बात पर विवाद हुआ और मामला थाने तक पहुंचने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ।
 

मेडिकल कॉलेज के आसपास मकड़जाल
गाजियाबाद के हरद्वारी लाल के बेटे को मेडिकल कॉलेज के बजाय निजी अस्पताल में भर्ती कराने का पहला मामला नहीं है। मेडिकल कॉलेज के आसपास मकड़जाल है। जो यहां आने वाले मरीजों को गुमराह कर निजी अस्पताल में ले जाते हैं। मरीजों से न केवल वसूली की जाती है बल्कि उनके जीवन से भी खिलवाड़ किया जाता है। छात्र नेता विनीत चपराना ने अल्फा अस्पताल के अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट मामले और मेडिकल से निजी अस्पतालों में मरीज ले जाने की शिकायत सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री से की है।
 

किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर डॉक्टर के साथियों ने ठगे थे 63 लाख रुपये
मवाना के मोहल्ला कल्याणपुर निवासी बोधराज अग्रवाल की किडनी प्रत्यारोपण के नाम पर उनकी पत्नी मनीषा अग्रवाल से 63 लाख रुपये ठग लिए गए थे। जून 2025 में मामले में मवाना थाने में मनीषा अग्रवाल ने दो डॉक्टरों सहित पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। इस मामले की अभी जांच चल रही है। उनके पति बोधराज अग्रवाल की किडनी की बीमारी के बाद मृत्यु हो गई थी।
 

मनीषा का कहना था कि उनके पति बोधराज अग्रवाल दो साल किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। मवाना निवासी डॉ. हयात ने उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में काम करने वाली हसन जहरा और उसके पति अदनान से मिलने की सलाह दी थी। 11 अक्तूबर 2023 को व्हाट्सएप पर बात करने के बाद दोनों ने मनीषा को दिल्ली बुलाया था। उन्होंने चिकित्सा रिपोर्ट ली और पैसों का इंतजाम करने को कहा। मनीषा ने जेवर और अपनी संपत्ति बेचकर रुपये एकत्र किए। 
 

हसन जहरा और उसके पति ने अवनीश नाम के एक किडनी दाता से मिलवाया। उन्होंने दाता को होल्ड पर रखने और अन्य खर्चों के लिए कुल 63 लाख रुपये अलग-अलग खातों में हस्तांतरित कराए थे। इसके बाद डॉ. महेश शर्मा ने भी खाते में रुपये डालने का दबाव बनाया। 1 जून 2024 को पति को सफदरजंग में भर्ती कर डायलिसिस कराई थी। 18 जून 2024 को उन्हें फिर से भर्ती किया गया लेकिन प्रत्यारोपण की तारीख 22 अगस्त 2024 हड़ताल के कारण टल गई। इस दौरान मनीषा को धोखाधड़ी का पता चला जिसे सुनकर उनके पति का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और 29 सितंबर 2024 को उनकी मृत्यु हो गई। सफदरजंग थाने में शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई थी।

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