पश्चिम में मोदी लहर के रास्ते में इस बार गठबंधन बना दीवार, सूबे में गंवाई सात सीटें
सहारनपुर, मेरठ, और मुरादाबाद मंडल में मोदी लहर के रास्ते में इस बार गठबंधन दीवार बन गया। सात सीटेें भाजपा ने इस क्षेत्र में गंवाई हैं, जिनमें मुरादाबाद मंडल सभी छह सीटें शामिल हैं। सहारनपुर मंडल की तीन सीटों में एक सीट गठबंधन ने जीत दर्ज की है।
मुजफ्फरनगर, बागपत और मेरठ में भी बहुत कम अंतर से भाजपा जीत पाई। मतगणना के आखिरी दौर तक उतार चढ़ाव बना रहा। भाजपा जिन सीटों पर जीतीं, उनपर जीत का अंतर कम हुआ, साथ ही वोट प्रतिशत भी कम हुआ है।
2014 में भाजपा ने इस क्षेत्र में विपक्षी दलों का सफाया कर दिया था। दंगों के बाद हुआ ध्रुवीकरण, मोदी लहर के साथ विपक्षी दलों का अलग-अलग लड़ना और वोट बंटना भी एक वजह थी। इस बार भी चुनाव मोदी पर ही केंद्रित था, एयर स्ट्राइक और राष्ट्रवाद का मुद्दा लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा था।
इसके मुकाबले के लिए मुस्लिम, दलित और जाट का मजबूत समीकरण लेकर सपा, बसपा और रालोद गठबंधन चुनाव मैदान में उतरा था। इस समीकरण के बल पर कड़ी चुनौती भी गठबंधन ने इस क्षेत्र में भाजपा को दी। मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल की 14 सीटों में आधी सात सीटों पर गठबंधन का कब्जा रहा।
सहारनपुर, नगीना, बिजनौर और अमरोहा सीट पर बसपा ने जीत दर्ज की। मुरादाबाद, रामपुर और संभल पर सपा ने जीत हासिल की। मुजफ्फरनगर और मेरठ सीट पर भी भाजपा की जीत का अंतर बहुत रहा। मुजफ्फरनगर सीट 6526 और मेरठ में 4729 मतों के अंतर से ही भाजपा जीत पाई। 2014 में मुजफ्फरनगर में भाजपा चार लाख मतों के अंतर से जीती थी। मेरठ में भी भाजपा की जीत का अंतर दो लाख से अधिक रहा था।
बागपत में भी मुकाबला काफी कड़ा रहा। यहां भाजपा के सत्यपाल सिंह ने गठबंधन प्रत्याशी रालोद के जयंत चौधरी 23128 मतों के अंतर से हराया। यहां भी जीत का अंतर कम हुआ है। 2014 में यह सीट भाजपा ने दो लाख 23 हजार मतों के अंतर से जीती थी। तब चौधरी सत्यपाल सिंह ने चौधरी अजित सिंह को हराया था। गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, कैराना और बुलंदशहर में ही भाजपा ने बड़े अंतर से जीत हासिल की है।
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