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Meerut: जगद्गुरु शंकराचार्य बोले- राजनीतिक चेतना जागृत होने से हिंदू समाज बनेगा सशक्त, बुजुर्गों को दें सम्मान
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: Mohd Mustakim
Updated Fri, 13 Mar 2026 11:49 PM IST
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सार
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज विश्व जागृति मिशन के सनातन संस्कृति जागरण महोत्सव में मेरठ पहुंचे। उन्होंने कहा कि विशेष समुदाय में बुजुर्गों का सम्मान किया जाता है, जबकि हिंदू परिवारों में वृद्ध को मिलता है ओल्ड एज होम। ऐसा नहीं होना चाहिए।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरिद्वार से आए जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक चेतना जागृत होनी चाहिए। विशेष समुदाय के लोग जागृत हैं। उनके शीर्ष पदों पर बैठे लोग एक-दूसरे का मान रखते हैं। 100 प्रतिशत तक मतदान करते हैं। लेकिन हिंदू मतदान के लिए जाता है तो पहले राजनीतिक दलों के नाम देखता है। विशेष समुदाय के लोग अपने समाज के भाई को महत्व देते हैं। विशेष समुदाय में राजनीतिक चेतना है। अब समय आ गया है कि सनातनी पूजा-पाठ के साथ अपने वोट की कीमत को भी समझें।
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शंकराचार्य साकेत स्थित आईआईटी मैदान में जागृति मिशन की ओर से आयोजित सनातन संस्कृति जागरण महोत्सव में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने समुदाय विशेष के बारे में कहानी सुनाई। कहा कि आज मेरठ, अलीगढ़ जैसे शहरों को संघर्ष करना पड़ रहा है। कितने ही अत्याचारी आए पर सनातन संस्कृति को मिटा नहीं पाए। उन्होंने सनातन को सूर्य की संज्ञा दी।
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उन्होंने कहा कि इस दौर में चर्चा होती है कि सनातन बढ़ रहा है लेकिन मैं इसे नहीं मानता हूं। इस धरा पर सनातन के अलावा और क्या है। अपने अंदर हीनता का भाव न लाएं। उन्होंने कहा कि विशेष समुदाय के लोग बुजुर्गों का सम्मान करते हैं और हिंदू परिवार में वृद्ध को वृद्धाश्रम में भेज देते हैं। यह श्रीराम और श्रवण कुमार की धरा है। यहां वृद्धाश्रम नहीं होने चाहिए।
हिंदू पूरी तरह संगठित, सिर्फ राजनीतिक चेतना जरूरी
शंकराचार्य ने कहा कि हिंदू संगठित है। उन्होंने उदाहरण दिया कि पंडित जी पत्रक में पढ़ते हैं कि हरिद्वार में कुंभ होगा और करोड़ों हिंदू वहां पहुंच जाते हैं। कांवड़ यात्रा जो मेरठ का हर निवासी प्रतिवर्ष देखता है वह भी हिंदू एकता का मेला है। ऐसे में हिंदू को संगठित करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि नेता किसी पार्टी का हो, वह सिर्फ वोट का सगा है।
शंकराचार्य ने कहा कि हिंदू संगठित है। उन्होंने उदाहरण दिया कि पंडित जी पत्रक में पढ़ते हैं कि हरिद्वार में कुंभ होगा और करोड़ों हिंदू वहां पहुंच जाते हैं। कांवड़ यात्रा जो मेरठ का हर निवासी प्रतिवर्ष देखता है वह भी हिंदू एकता का मेला है। ऐसे में हिंदू को संगठित करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि नेता किसी पार्टी का हो, वह सिर्फ वोट का सगा है।
इस दौरान उन्होंने सर्कस के भालू की कहानी सुनाई। बताया कि सर्कस का एक चर्चित भालू मर गया। 500 रुपये में एक बेरोजगार को रीछ की खाल पहनाकर दर्शकों के सामने खड़ा कर दिया गया। रीछ को जब शेर के पास ले जाया गया तो वह डर गया। तब शेर की खाल में युवक बोला, घबरा मत तू 500 रुपये में आया और मैं एक हजार रुपये में आया हूं। उनका कहना था कि इस दौर में राजनीतिक रूप से जागृत होना बहुत जरूरी है।
जिसके पास स्वर होगा, वही गाएगा
शंकराचार्य ने सबसे पहले जय श्रीराम का जयघोष कराया। कृष्ण लीला श्लोक- ब्रजे वसंतम् ...को उन्होंने इतने सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया कि पंडाल में बैठे लोग भाव-विभोर हो गए। शंकराचार्य की वाणी में मानो मां सरस्वती विराजमान थीं। श्लोक खत्म हो गया लेकिन लोगों की इच्छा समाप्त नहीं हुई। उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं आप गाते हैं। भाई महात्मा नहीं गाएगा तो दुरात्मा गाएगा। जिसके पास स्वर होगा, वही तो गाएगा।
शंकराचार्य ने सबसे पहले जय श्रीराम का जयघोष कराया। कृष्ण लीला श्लोक- ब्रजे वसंतम् ...को उन्होंने इतने सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया कि पंडाल में बैठे लोग भाव-विभोर हो गए। शंकराचार्य की वाणी में मानो मां सरस्वती विराजमान थीं। श्लोक खत्म हो गया लेकिन लोगों की इच्छा समाप्त नहीं हुई। उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं आप गाते हैं। भाई महात्मा नहीं गाएगा तो दुरात्मा गाएगा। जिसके पास स्वर होगा, वही तो गाएगा।