Meerut: बिलवेश्वर मंदिर से निकली जगन्नाथ यात्रा, रथ पर बैठने को लेकर विवाद, पुलिस से भिड़ी दो महिलाएं
मेरठ के बिलवेश्वर मंदिर से आज जगन्नाथ यात्रा की शुरुआत की गई। हालांकि रथ पर बैठने को लेकर विवाद गहरा गया है। मंदिर समिति ने प्रशासन पर पुजारियों को रथ पर बैठने से रोकने और धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है। वहीं दो महिलाओं ने हंगामा भी किया।
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मेरठ के सदर स्थित बिलवेश्वर मंदिर से जगन्नाथ यात्रा की आज सुबह शांतिपूर्वक शुरुआत की गई। वहीं रथ पर बैठने को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। मंदिर समिति की ओर से आरोप लगाया गया है कि प्रशासन धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप कर रहा है। वहीं प्रशासनिक बैठक में यात्रा के शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर कुछ शर्तें रखी गईं, जिसके बाद विवाद और गहरा गया।
हालांकि बृहस्पतिवार सुबह शांतिपूर्वक रथयात्रा शुरू हुई। इस दौरान दो महिलाओं ने रथ के आगे चल रहे श्रद्धालुओं को रोकने का पुलिस से अनुरोध किया। इस बीच हंगामा बढ़ गया। महिलाओं की पुलिस से नोकझोंक भी हुई। महिला पुलिस ने महिलाओं को समझाबुझाकर चुप कराया। पूरे घटनाक्रम में जगन्नाथ यात्रा समीति से जुड़े पवन गोयल, गणेश अग्रवाल, नितिन बालाजी अपनी टीम के साथ रथ से कुछ दूरी पर पूजा-अर्चना करते हुए चलते रहे।
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मंदिर समिति की सचिव राशि शर्मा का आरोप है कि बैठक में प्रशासन ने कहा कि दोनों पुजारी रथ पर सवार नहीं होंगे और केवल पूजा-अर्चना ही करेंगे। उनका कहना है कि यह निर्णय बिना किसी लिखित आदेश के सुनाया गया और इससे धार्मिक परंपराओं का सम्मान प्रभावित होता है।
राशि शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों के विरुद्ध न्यायालय द्वारा मंदिर की कुर्की का आदेश पारित किया जा चुका है, प्रशासन उन्हीं लोगों को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने इसे सनातन धर्म की आस्था का अपमान बताया।
दूसरे पक्ष पर नहीं जताई आपत्ति
बैठक के दौरान पुजारी गणेश दत्त शर्मा, विष्णुदत्त शर्मा और उनके सहयोगियों ने दूसरे पक्ष के कुछ लोगों के यात्रा में शामिल होने पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। प्रशासन की ओर से कहा गया कि यात्रा में प्रत्येक श्रद्धालु का स्वागत है, लेकिन कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रशासन का उद्देश्य शांतिपूर्ण आयोजन
प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से बैठक में यात्रा के शांतिपूर्ण संचालन और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। हालांकि सुबह जब यात्रा शुरू हुई तो रथ पर कोई सवार नहीं हुआ। शांतिपूर्वक यात्रा को आगे बढ़ाया गया।