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शेखर हत्याकांड: यह आपसी रिश्तों की हत्या, मृत्यु तक फंदे पर लटाया जाए, पहली बार सुनाई महिला को फांसी की सजा

मदन बालियान, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Sharukh Khan Updated Wed, 29 Apr 2026 02:04 PM IST
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सार

मुजफ्फरनगर के भौराकलां थाना क्षेत्र के खेड़ी सूंडियान गांव में किसान शेखर (49) की सात साल पहले ईंटों से कूच-कूचकर हत्या करने की दोषी महिला मुकेश उर्फ बिट्टो, उसके बेटे प्रदीप, संदीप और सोनू को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। उधार के 70 हजार रुपये मांगने पर वारदात को अंजाम दिया गया था।

Muzaffarnagar Shekhar Murder News Women and Her Son Senteced To Death
Muzaffarnagar Shekhar Murder - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

अपर जिला एवं सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने लिखा कि आज की दुनिया में सबसे बड़ा अपराध किसी को पैसा उधार देना है। सबसे बड़ा अपराध अपना उधार दिया पैसा वापस मांगना है।
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आप पैसा मांगते ही तुरंत दुश्मन लगने लगते हो, जिससे यह भी निष्कर्ष निकलता है कि आप उतना ही पैसा किसी को उधार दीजिए, जितने को आप भूल सको, क्योंकि रिश्ते, नाते, दोस्ती तभी रह सकती है जब आप उधारी के दिए हुए पैसे वापस न मांगें। आखिरी पेज पर सजा सुनाते हुए यह भी लिखा कि सिद्धदोषों को फांसी के फंदे पर तब तक लटकाया जाए, जब तक कि उनकी मृत्यु न हो जाए।
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मुजफ्फरनगर के गांव खेड़ी सूंडियान में हुए शेखर हत्याकांड का फैसला अदालत ने 42 पेज पर लिखा। सामाजिक मूल्यों में गिरावट और कानून की भूमिका का चित्र भी खींचा गया। यह मात्र किसी व्यक्ति की क्रूरतापूर्वक हत्या ही नहीं की गई है, बल्कि आपसी रिश्तों की भी हत्या की गई है। 

 

भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति की विपरीत परिस्थितियों में आर्थिक मदद करने से हिचकिचाएगा। वर्तमान समय में यह बहुत कटु सत्य है कि आप किसी व्यक्ति की मदद के लिए रुपये उधार दे दीजिए, जैसे ही आप अपने मेहनत से कमाए हुए धन को वापस मांगते हैं तो ज्यादातर मामलों में आपने जिसे अपना रुपया उधार दिया था, वह आपका दुश्मन बन जाता है। 

पुरानी कहावत पैसे उधार देना और मानवीय व्यवहार दुश्मन बनाने के कड़वे सच को दर्शाती है। जब तक आप पैसा नहीं मांगते हैं, सब ठीक रहता है, लेकिन अपना ही पैसा वापस मांगते ही सामने वाला व्यक्ति आपको बुरा समझने लगता है या दुश्मन मान लेता है। 

उधारी के पैसे वापस मांगने पर होने वाली हत्याओं के पीछे का मनोविज्ञान और सामाजिक कारण काफी गहरे होते हैं। यह केवल धन का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे मुख्य कारण यह होता है कि अपराधियों को कई बार लगता है कि साक्ष्यों के अभाव में या कानूनी पेचीदगियों के कारण वह अपराध करने के बाद जाएंगे। 

 

ऐसी दशा में यदि अभियुक्तगण को अधिकतम सजा नहीं दी जाती है तो अपराधियों के हौसले बुलंद हो जाएंगे, जिससे वे हत्या जैसे गंभीर अपराध करने में भी नहीं हिचकिचाते हैं। सॉफ्ट जस्टिस अर्थात् कोमल न्याय करने से समाज में बहुत गलत संदेश जाएगा।

दूसरों का जीवन लेने वालों को जीने का अधिकार नहीं
न्यायालय के मतानुसार यह उचित है कि न कोई मारा जाए और न ही किसी के प्राण लिए जाएं और न ही किसी को फांसी पर लटकाया जाए लेकिन क्या यह व्यावहारिक दृष्टि से संभव है? शायद नहीं। हत्याएं होती हैं, कुछ हत्याएं तो अत्यंत पाश्विक ढंग से होती हैं, जैसा कि प्रश्नगत प्रकरण में हुआ है। 

 

समाज में किसी निर्दोष की हत्या न हो, इसलिए भी न्यायालय को ऐसे मामलों में मृत्युदंड अवश्य ही देना चाहिए। मानवीय जीवन भगवान के द्वारा प्रदत्त बहुत ही सुंदर जीवन है, इसीलिए सभी व्यक्तियों को जीवित रहने का समान अधिकार है। 

जीवन ईश्वर देता है तो जीवन केवल ईश्वर ही ले सकता है। यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति की जान ले लेता है तो ऐसे व्यक्ति को भी कोई जीने का अधिकार नहीं रह जाता है। समाज में ऐसा व्यक्ति दया का पात्र नहीं रह जाता है। चाहे वह कोई भी क्यों न हो।

पहली बार महिला को सुनाई फांसी की सजा
मुजफ्फरनगर के भौराकलां थाना इलाके के खेड़ी सूंडियान गांव की मुकेश उर्फ बिट्टो (60) को फांसी की सजा सुनाई गई। जिला न्यायालय से पहली बार किसी महिला को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है। इससे पहले सिसौली की बहू और वर्तमान में सहारनपुर निवासी सोनिया को हरियाणा में एक ही परिवार के आठ लोगों की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी। 

राजबाला बोली... अदालत ने हमें दिया इंसाफ
कसबे की नई आबादी निवासी शेखर की हत्या के मुकदमे में वादी राजबाला वर्मा ने कहा कि अदालत पर पूरा भरोसा था। हमें इंसाफ मिल गया है। बेटे की निर्मम तरीके से हत्या की गई थी। हमने कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया था और यहीं से हमें इंसाफ मिला। कानून से बड़ा कोई नहीं है। पिता महावीर सिंह ने कहा कि न्याय के घर में देर हो सकती है लेकिन अंधेर नहीं है। दोषियों को अदालत ने सजा सुनाई, आज हमें सुकून मिला है। 

 

मलिक ने की पैरवी, कानून से मिली सजा
शेखर हत्याकांड में अभियोजन पक्ष की पैरवी अधिवक्ता सौराज मलिक ने की। उनका कहना है कि कानून से सजा मिली है। मुकदमे में गवाहों ने आरोपों को साबित किया। इसके अलावा अन्य साक्ष्य भी पेश किए गए थे। डीजीसी राजीव शर्मा एवं सहायक शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने कहा कि इंसाफ को बल मिलेगा। 

 

इस तरह हुई थी आरोपी रामू की मौत
शेखर हत्याकांड के अभियुक्त रामकुमार उर्फ रामू को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जेल में वह बीमार हो गया। 28 जुलाई 2019 को जेल में ही उसकी मौत हो गई थी। 

 

बेटा जेसीओ... उधार दिए थे 70 हजार 
पैरवी के दौरान वादी राजबाला वर्मा ने बयान में कहा कि उसका एक बेटा जेसीओ है। उसे करीब 80 रुपये सैलरी मिलती है। इसी में से 70 हजार रुपये 10 अक्तूबर 2018 को रामू को उधार दिए थे। 10 महीने में रुपये लौटाने की बात हुई थी। ब्याज का लालच नहीं था। इसी वजह से लिखापढ़ी नहीं की थी। 

गैंगस्टर में दोषमुक्त हुआ था शेखर
शेखर पर भौराकलां थाने में गैंगस्टर व हत्या समेत सात मुकदमे दर्ज थे। खेड़ी सूंडियान के ही भोपाल सिंह पक्ष के साथ चर्चित रंजिश चली। वर्ष 1999 में दर्ज गैंगस्टर के मुकदमे में शेखर अदालत से दोषमुक्त करार दिया गया था। शेखर खेती के साथ सिसौली में लोहे की दुकान भी संचालित करता था।

 

148 सुनवाई के बाद आया फांसी का फैसला
अभियोजन साक्षी-7
अभिलेखीय साक्ष्य-15
वस्तु साक्ष्य-13
केस ट्रांसफर-9 जनवरी 2026
एफटीसी-3
कुल तारीख -148

 

यह था पूरा मामला
मुजफ्फरनगर के भौराकलां थाना क्षेत्र के खेड़ी सूंडियान गांव में किसान शेखर (49) की सात साल पहले ईंटों से कूच-कूचकर हत्या करने की दोषी महिला मुकेश उर्फ बिट्टो (60), उसके बेटे प्रदीप (38), संदीप (36) और सोनू (30) को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। उधार के 70 हजार रुपये मांगने पर वारदात को अंजाम दिया गया था। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने फैसला सुनाया।

 

वारदात 17 जून 2019 को अंजाम दी गई थी। शाम छह बजे कस्बा सिसौली निवासी वादी राजबाला वर्मा, अपने पति महावीर सिंह और बेटे शेखर के साथ पड़ोस के गांव खेड़ी सूंडियान में रामकुमार उर्फ रामू पक्ष से उधार दिए 70 हजार रुपये लेने के लिए गई थी।

 

घर में ही खोली गई दुकान में बिट्टो मिली, जहां तकाजा करने पर आरोपियों ने गाली-गलौज की। ईंट फेंककर मारी, जिससे शेखर गंभीर घायल होकर गिर गया। इसके बाद हमलावरों ने घेरकर ईंटों से कूचकर और लाठी-डंडों से हमला कर उसकी हत्या कर दी। जिला कारागार में रामकुमार उर्फ रामू की मौत हो गई थी।

 

पुलिस ने मां और उसके तीन बेटों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-तीन में हुई। अदालत ने 22 अप्रैल को आरोपियों पर दोष सिद्ध किया था। मंगलवार को सभी दोषियों को मृत्युदंड और 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
 
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