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Meerut News: 30 बेड की सीएचसी में सर्जन और नाक, कान, गला व आंखों की बीमारी के लिए चिकित्सक नहीं
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गडीना निवासी विक्रम सिंह सीएचसी में दवा लेने आए थे।। (फलावदा)
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संवाद न्यूज एजेंसी
फलावदा। कस्बे में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सर्जन व चिकित्सकों का अभाव है। सर्जन नहीं होने से ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल पा रही है। मरीजों का कैसे इलाज होगा। नाक, कान, गला व आंखों की बीमारी के लिए कोई चिकित्सक नहीं है। 30 बेड के अस्पताल में तीन जनरल फिजिशियन और एक फार्मासिस्ट तैनात हैं। इसमें महिलाओं के लिए 10 बेड व मामूली बीमारी से पीड़ित मरीजों व बच्चों के लिए 20 बेड हैं।
कस्बा सहित क्षेत्र के करीब 24 गांवों के लोग स्वास्थ्य केंद्र पर बीमारी के इलाज के लिए पहुंचते हैं। सीएचसी आस्था (आउटसोर्सिंग) कर्मचारियों के बलबूते चलाया जा रहा है। आस्था के आठ कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों को छह महीने से वेतन तक नहीं मिला है। ऐसी स्थिति में इनकी गैर मौजूदगी में अस्पताल राम भरोसे हो जाएगा। अस्पताल में खून की जांच, ऑक्सीजन व 24 घंटे इमरजेंसी सेवा उपलब्ध है लेकिन अल्ट्रासाउंड के लिए कोई चिकित्सक नहीं है। अल्ट्रासाउंड मशीन लंबे समय से कमरे में बंद पड़ी हुई है। मरीज को अल्ट्रासाउंड बाहर से कराना पड़ता है। इससे मरीजों की जेब पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। सड़क दुर्घटना में घायल लोगों के ऑपरेशन की सुविधा यहां नहीं है। कारण यह है कि यहां सर्जन ही तैनात नहीं हैं। केवल नजला, जुकाम व बुखार आदि बीमारियों की दवाई दी जाती है।
सीएचसी पर यह है सुविधा
गर्भवती महिलाओं के लिए डिलीवरी, ऑपरेशन की सुविधा, खून की जांच, एक्सरे, ऑक्सीजन, दंत चिकित्सा उपलब्ध है। यहां एक महिला चिकित्सक तैनात है। 24 घंटे इमरजेंसी सुविधा भी उपलब्ध है। अस्पताल स्टाफ की कमी से जूझ रहा है।
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गांव बातनौर निवासी अतर सिंह का कहना है कि अस्पताल में दवा तो मिल रही है लेकिन आंख बनवाने की सुविधा अस्पताल में नहीं है। आंख भी इसी अस्पताल में बननी चाहिए।
गांव गड़ीना निवासी विक्रम का कहना है कि उन्हें अस्पताल से दवा तो मिल रही है लेकिन एक्सरे, अल्ट्रासाउंड जैसी सुविधाओं के लिए प्राइवेट संस्थानों पर जाना पड़ता है।
कोट...
सीएचसी प्रभारी डॉ. नितिन शर्मा का कहना है कि स्टाफ बढ़ाने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को लिखा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ेंगी।
संवाद न्यूज एजेंसी
फलावदा। कस्बे में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सर्जन व चिकित्सकों का अभाव है। सर्जन नहीं होने से ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल पा रही है। मरीजों का कैसे इलाज होगा। नाक, कान, गला व आंखों की बीमारी के लिए कोई चिकित्सक नहीं है। 30 बेड के अस्पताल में तीन जनरल फिजिशियन और एक फार्मासिस्ट तैनात हैं। इसमें महिलाओं के लिए 10 बेड व मामूली बीमारी से पीड़ित मरीजों व बच्चों के लिए 20 बेड हैं।
कस्बा सहित क्षेत्र के करीब 24 गांवों के लोग स्वास्थ्य केंद्र पर बीमारी के इलाज के लिए पहुंचते हैं। सीएचसी आस्था (आउटसोर्सिंग) कर्मचारियों के बलबूते चलाया जा रहा है। आस्था के आठ कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों को छह महीने से वेतन तक नहीं मिला है। ऐसी स्थिति में इनकी गैर मौजूदगी में अस्पताल राम भरोसे हो जाएगा। अस्पताल में खून की जांच, ऑक्सीजन व 24 घंटे इमरजेंसी सेवा उपलब्ध है लेकिन अल्ट्रासाउंड के लिए कोई चिकित्सक नहीं है। अल्ट्रासाउंड मशीन लंबे समय से कमरे में बंद पड़ी हुई है। मरीज को अल्ट्रासाउंड बाहर से कराना पड़ता है। इससे मरीजों की जेब पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। सड़क दुर्घटना में घायल लोगों के ऑपरेशन की सुविधा यहां नहीं है। कारण यह है कि यहां सर्जन ही तैनात नहीं हैं। केवल नजला, जुकाम व बुखार आदि बीमारियों की दवाई दी जाती है।
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सीएचसी पर यह है सुविधा
गर्भवती महिलाओं के लिए डिलीवरी, ऑपरेशन की सुविधा, खून की जांच, एक्सरे, ऑक्सीजन, दंत चिकित्सा उपलब्ध है। यहां एक महिला चिकित्सक तैनात है। 24 घंटे इमरजेंसी सुविधा भी उपलब्ध है। अस्पताल स्टाफ की कमी से जूझ रहा है।
गांव बातनौर निवासी अतर सिंह का कहना है कि अस्पताल में दवा तो मिल रही है लेकिन आंख बनवाने की सुविधा अस्पताल में नहीं है। आंख भी इसी अस्पताल में बननी चाहिए।
गांव गड़ीना निवासी विक्रम का कहना है कि उन्हें अस्पताल से दवा तो मिल रही है लेकिन एक्सरे, अल्ट्रासाउंड जैसी सुविधाओं के लिए प्राइवेट संस्थानों पर जाना पड़ता है।
कोट...
सीएचसी प्रभारी डॉ. नितिन शर्मा का कहना है कि स्टाफ बढ़ाने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को लिखा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ेंगी।

गडीना निवासी विक्रम सिंह सीएचसी में दवा लेने आए थे।। (फलावदा)

गडीना निवासी विक्रम सिंह सीएचसी में दवा लेने आए थे।। (फलावदा)

गडीना निवासी विक्रम सिंह सीएचसी में दवा लेने आए थे।। (फलावदा)