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Meerut News: पीड़ित भाई नरसी ने पूर्व विधायक संगीत सोम को गांव में ही रोका, कहा- जब तक कार्रवाई नहीं होगी, जाने नहीं दूंगा
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सरधना। गांव कपसाड़ में मृतक के परिजनों से मुलाकात करते भाजपा नेता सुनील भराला। संवाद
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कपसाड़ गांव में सुनीता की निर्मम हत्या और रूबी के अपहरण के मामले में तनाव और भावनात्मक माहौल बना हुआ है। शुक्रवार देर रात से ही पूर्व विधायक संगीत सोम पीड़ित परिवार के साथ गांव में डटे रहे। इस दौरान अगवा की गई रूबी के भाई नरसी और पूर्व विधायक के बीच भावुक संवाद हुआ। नरसी ने पूर्व विधायक से कहा कि जब तक इंसाफ नहीं मिलता वह उन्हें जाने नहीं देंगे।
बृहस्पतिवार को सुनीता के अंतिम संस्कार से पहले पूर्व विधायक ने परिजनों को आश्वासन दिया था कि वह कार्रवाई होने तक गांव में ही रहेंगे। शुक्रवार को जब संगीत सोम पीड़ित नरसी के पास बैठे थे तब नरसी ने उनसे कहा, आपने आश्वासन दिया है अब जब तक कार्रवाई नहीं होगी मैं आपको जाने नहीं दूंगा। पुलिस ने आरोपी को पकड़ने और रूबी की बरामदगी के लिए 48 घंटे का समय दिया है तब तक आपको यहीं रुकना होगा।
इस पर पूर्व विधायक ने सहानुभूति जताते हुए कहा, यह मेरा परिवार है और तुम मेरे भाई हो। अधिकारियों से लगातार वार्ता चल रही है, उचित कार्रवाई और बरामदगी के बाद ही मैं यहां से जाऊंगा। दिनभर घर में मातम का माहौल रहा। सतेंद्र अपनी पत्नी सुनीता को याद कर बिलखते रहे और पूरा परिवार अपहृत रूबी की सुरक्षित वापसी की राह देखता रहा।
फफूंडा कांड पर चुप थे, अब जाति की राजनीति कर रहे
शनिवार को दिनभर पीड़ित परिवार के घर मौजूद रहे पूर्व विधायक संगीत सोम ने विपक्ष, विशेषकर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और स्थानीय नेताओं पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने सपा पर निशाना साधा। पूर्व विधायक ने कहा कि अखिलेश यादव इस मामले में न बोलें तो ही बेहतर है। उन्होंने अनुसूचित जाति के लोगों के लिए क्या किया। अपनी सरकार आते ही उन्होंने अनुसूचित जाति के महापुरुषों के नाम पर बने जिलों के नाम बदल दिए थे। आज वह उनके हितैषी बन रहे हैं।
मेरठ के विपक्षी नेताओं को घेरते हुए सोम ने कहा कि कपसाड़ की घटना को जानबूझकर जाति से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया, ये नेता तब कहां थे जब फफूंडा गांव में एक छात्रा ने दुष्कर्म से आहत होकर आत्महत्या कर ली थी। तब इसे जाति से क्यों नहीं जोड़ा गया। विपक्ष सिर्फ वोट की राजनीति कर रहा है।
बैरिकेडिंग के कारण सलावा चौराहे पर लगा जाम
प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने और विपक्षी नेताओं को कपसाड़ गांव में प्रवेश करने से रोकने के लिए सलावा चौराहे पर बैरिकेडिंग कर बॉर्डर सील कर दिया। इसके चलते क्षेत्र में कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया जिससे आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। लोनी गाजियाबाद निवासी परवेज ने बताया कि वह खतौली से लौट रहे थे और जाम के कारण अपनी ड्यूटी पर समय से नहीं पहुंच सके। ई-रिक्शा चालक लुकमान ने बताया कि सठेड़ी से कैली जाने वाले रास्ते बंद होने से सवारियां परेशान रहीं। प्रतिदिन नौकरी पर जाने वाले ग्रामीणों को भी आधे रास्ते से वापस लौटना पड़ा।
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बृहस्पतिवार को सुनीता के अंतिम संस्कार से पहले पूर्व विधायक ने परिजनों को आश्वासन दिया था कि वह कार्रवाई होने तक गांव में ही रहेंगे। शुक्रवार को जब संगीत सोम पीड़ित नरसी के पास बैठे थे तब नरसी ने उनसे कहा, आपने आश्वासन दिया है अब जब तक कार्रवाई नहीं होगी मैं आपको जाने नहीं दूंगा। पुलिस ने आरोपी को पकड़ने और रूबी की बरामदगी के लिए 48 घंटे का समय दिया है तब तक आपको यहीं रुकना होगा।
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इस पर पूर्व विधायक ने सहानुभूति जताते हुए कहा, यह मेरा परिवार है और तुम मेरे भाई हो। अधिकारियों से लगातार वार्ता चल रही है, उचित कार्रवाई और बरामदगी के बाद ही मैं यहां से जाऊंगा। दिनभर घर में मातम का माहौल रहा। सतेंद्र अपनी पत्नी सुनीता को याद कर बिलखते रहे और पूरा परिवार अपहृत रूबी की सुरक्षित वापसी की राह देखता रहा।
फफूंडा कांड पर चुप थे, अब जाति की राजनीति कर रहे
शनिवार को दिनभर पीड़ित परिवार के घर मौजूद रहे पूर्व विधायक संगीत सोम ने विपक्ष, विशेषकर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और स्थानीय नेताओं पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने सपा पर निशाना साधा। पूर्व विधायक ने कहा कि अखिलेश यादव इस मामले में न बोलें तो ही बेहतर है। उन्होंने अनुसूचित जाति के लोगों के लिए क्या किया। अपनी सरकार आते ही उन्होंने अनुसूचित जाति के महापुरुषों के नाम पर बने जिलों के नाम बदल दिए थे। आज वह उनके हितैषी बन रहे हैं।
मेरठ के विपक्षी नेताओं को घेरते हुए सोम ने कहा कि कपसाड़ की घटना को जानबूझकर जाति से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया, ये नेता तब कहां थे जब फफूंडा गांव में एक छात्रा ने दुष्कर्म से आहत होकर आत्महत्या कर ली थी। तब इसे जाति से क्यों नहीं जोड़ा गया। विपक्ष सिर्फ वोट की राजनीति कर रहा है।
बैरिकेडिंग के कारण सलावा चौराहे पर लगा जाम
प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने और विपक्षी नेताओं को कपसाड़ गांव में प्रवेश करने से रोकने के लिए सलावा चौराहे पर बैरिकेडिंग कर बॉर्डर सील कर दिया। इसके चलते क्षेत्र में कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया जिससे आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। लोनी गाजियाबाद निवासी परवेज ने बताया कि वह खतौली से लौट रहे थे और जाम के कारण अपनी ड्यूटी पर समय से नहीं पहुंच सके। ई-रिक्शा चालक लुकमान ने बताया कि सठेड़ी से कैली जाने वाले रास्ते बंद होने से सवारियां परेशान रहीं। प्रतिदिन नौकरी पर जाने वाले ग्रामीणों को भी आधे रास्ते से वापस लौटना पड़ा।