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UP: यूजीसी, सवर्णों और कार्यकर्ताओं की नाराजगी, यूपी में फिर फतह हासिल करने को ये है RSS-भाजपा का नया फार्मूला
कुलदीप त्यागी, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 11 Mar 2026 11:14 AM IST
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सार
मिशन यूपी 2027 के लिए भाजपा ने नया फार्मूला तैयार किया है। सवर्णों और कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने पर भाजपा का जोर रहेगा। दलित-ओबीसी जातियों के नेताओं को भी संगठन में अहम पद मिलेंगे।
UP 2027 Mission
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
उत्तर प्रदेश की सत्ता में लगातार तीसरी बार आने के लिए भाजपा ने नया फार्मूला तैयार किया है। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भी सहमति बताई जा रही है। मिशन यूपी 2027 को फतह करने की राह में आ रही बाधाओं को दूर किया जाएगा।
इसमें संगठन विस्तार से लेकर कार्यकर्ताओं को सरकार में समायोजित करने का फुलप्रूफ फॉर्मूला तैयार किया गया है। इससे विभिन्न जातियों छत्रपों के साथ ही नाराज व निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को भी मनाया जाएगा। यूजीसी एक्ट से उपजी सवर्ण जातियों की नाराजगी को भी दूर करने की कोशिश जारी है।
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इसमें संगठन विस्तार से लेकर कार्यकर्ताओं को सरकार में समायोजित करने का फुलप्रूफ फॉर्मूला तैयार किया गया है। इससे विभिन्न जातियों छत्रपों के साथ ही नाराज व निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को भी मनाया जाएगा। यूजीसी एक्ट से उपजी सवर्ण जातियों की नाराजगी को भी दूर करने की कोशिश जारी है।
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मुख्यमंत्री की सक्रियता से तैयार हो रहा माहौल
2027 के विधानसभा चुनाव में अधिक समय नहीं होने के कारण भाजपा और आरएसएस अपने स्तर पर सक्रिय है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संघ पदाधिकारियों के साथ समन्वय बैठक करने निकले हैं।
2027 के विधानसभा चुनाव में अधिक समय नहीं होने के कारण भाजपा और आरएसएस अपने स्तर पर सक्रिय है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संघ पदाधिकारियों के साथ समन्वय बैठक करने निकले हैं।
पांच मार्च को गाजियाबाद में मुख्यमंत्री ने पश्चिम उत्तर प्रदेश की समन्वय बैठक में भाग लिया। इस दौरान सरकार के कामकाज को लेकर फीडबैक और संघ पदाधिकारियों के सुझाव लिए गए। इस दौरान सरकारी कामकाज की दिक्कतें भी मुख्यमंत्री के सामने उठाई गई। मुख्यमंत्री की सक्रियता से चुनावी माहौल तैयार हो रहा है।
यूजीसी एक्ट के बाद विरोध के माहौल से मची खलबली
भाजपा के कैडर वोटर में सवर्ण जातियां शामिल है। यूजीसी एक्ट के बाद जिस तरह से सवर्ण जातियों ने विरोध का बिगुल बजाया है, उससे भाजपा में खलबली मची है। कोई भी भाजपा नेता और जनप्रतिनिधि यूजीसी एक्ट पर सीधा जवाब नहीं दे रहा है, जबकि युवाओं में आक्रोश धीरे-धीरे पनप रहा है।
भाजपा के कैडर वोटर में सवर्ण जातियां शामिल है। यूजीसी एक्ट के बाद जिस तरह से सवर्ण जातियों ने विरोध का बिगुल बजाया है, उससे भाजपा में खलबली मची है। कोई भी भाजपा नेता और जनप्रतिनिधि यूजीसी एक्ट पर सीधा जवाब नहीं दे रहा है, जबकि युवाओं में आक्रोश धीरे-धीरे पनप रहा है।
आरएसएस की ओर से भाजपा को इस ओर ध्यान देने के लिए कहा जा रहा है। ऐसे में भाजपा नेता व जनप्रतिनिधि इस मामले को कोर्ट में बताकर माहौल को बदलने की कोशिश में भी जुटे हैं। भाजपा की मंशा इस विरोध को आंधी बनने से रोकने की है।
संगठन और सरकार में शीघ्र ही समायोजित होंगे नेता
चुनाव में बहुत कम समय बचने के कारण भाजपा तेजी से कदम उठा रही है। पिछले एक साल से अधिक समय से चल रहे संगठन चुनाव शीघ्र ही पूरे होंगे। इसमें नए क्षेत्रीय अध्यक्षों को घोषणा, क्षेत्रीय कार्यकारिणी का गठन, जिला व महानगर कार्यकारिणी का गठन, प्रदेश कार्यकारिणी का गठन करके पार्टी नेताओं को समायोजित किया जाएगा।
चुनाव में बहुत कम समय बचने के कारण भाजपा तेजी से कदम उठा रही है। पिछले एक साल से अधिक समय से चल रहे संगठन चुनाव शीघ्र ही पूरे होंगे। इसमें नए क्षेत्रीय अध्यक्षों को घोषणा, क्षेत्रीय कार्यकारिणी का गठन, जिला व महानगर कार्यकारिणी का गठन, प्रदेश कार्यकारिणी का गठन करके पार्टी नेताओं को समायोजित किया जाएगा।
संगठन में समायोजित होने से बचने वाले नेता अतिशीघ्र पार्षद व सभासद मनोनीत होंगे। विभिन्न आयोगों, बोडों, समितियों में भी पार्टी कार्यकर्ताओं को अध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य बनाया जाएगा।
जातीय समीकरणों पर दिया जाएगा पूरा ध्यान
भाजपा अपनी पूरी सोशल इंजीनियरिंग का परिचय संगठन विस्तार में देगी। यूजीसी एक्ट से नाराज सवर्ण समाज के नेताओं को संगठन में अहम पदों पर वरीयता दी जाएगी। दलित, ओबीसी, महिला वर्ग को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की तैयारी की जा रही है।
भाजपा अपनी पूरी सोशल इंजीनियरिंग का परिचय संगठन विस्तार में देगी। यूजीसी एक्ट से नाराज सवर्ण समाज के नेताओं को संगठन में अहम पदों पर वरीयता दी जाएगी। दलित, ओबीसी, महिला वर्ग को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की तैयारी की जा रही है।
भाजपा नेताओं को जिला पर्यवेक्षक के रूप में भेजकर कोर कमेटियों से पार्षद, सभासद मनोनयन और जिला कार्यकारिणी में शामिल होने वाले नेताओं के नामों का पैनल तैयार किया जा चुका है। यह पैनल प्रदेश नेतृत्व तक पहुंच भी चुका है। पार्टी की मंशा 20 मार्च तक अपना कार्य पूरा करने की है।
पार्टी पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि भी अड़े
भाजपा और आरएसएस द्वारा तैयार फॉर्मूले के तहत ही पार्टी संगठन के गठन की कार्यवाही चल रही है। इससे इतर पार्टी पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि अपने-अपने समर्थकों को जिला, क्षेत्रीय और प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल कराने में जुटे हैं।
भाजपा और आरएसएस द्वारा तैयार फॉर्मूले के तहत ही पार्टी संगठन के गठन की कार्यवाही चल रही है। इससे इतर पार्टी पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि अपने-अपने समर्थकों को जिला, क्षेत्रीय और प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल कराने में जुटे हैं।
इसके लिए प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व तक सिफारिशें की जा रही है। आरएसएस के पदाधिकारी भी अपने इसमें पैरवी करने में जुटे हैं। मंत्रिमंडल में फेरबदल पर भी भाजपा नेताओं की निगाह लगी हुई है।