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तस्वीरें: ...जब 'अपने' ही भूल जाते हैं खून का रिश्ता, भावुक कर देगी अस्पताल की ये सच्चाई

Thu, 04 Oct 2018 03:03 PM IST
अरीश रिज़वी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिज़वी, अमर उजाला, मेरठ Updated Thu, 04 Oct 2018 03:03 PM IST
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UP NEWS Many relatives leave patients in Meerut district hospital
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

गंभीर बीमारी की वजह से ‘अपने’ इन्हें ले जाने से कतराते हैं। कोई ढाई माह से अस्पताल में भर्ती है तो कोई तीन माह से। परिजन कभी-कभी आते हैं, मगर साथ नहीं ले जाते। जी हां, बात हो रही मेरठ जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड की। यहां इस समय 12 मरीज भर्ती हैं। इनमें से पांच गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन उनके परिजनों से कई बार कह चुका है कि इनकी तीमारदारी घर पर की जा सकती है, लेकिन परिजन उन्हें नहीं ले गए। अब तो इन मरीजों का अस्पताल ही सहारा है।

UP NEWS Many relatives leave patients in Meerut district hospital
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

वार्ड की सिस्टर इंचार्ज निर्मला बताती हैं कि परिवार वाले अस्पताल में भर्ती करा जाते हैं और गंभीर बीमारी के कारण साथ ले जाने से बचते हैं। उनके अलावा स्टाफ में सोनिया और कविता, वार्ड ब्वॉय विपिन और वार्ड स्वीपर सुरेश इन्हें समय पर दवाइयां देना, खाना देना और इनकी गंदगी साफ करते हैं। अब मरीजों की रिपोर्ट सामान्य है, लेकिन लंबी बीमारी की वजह से यह मरीज चलने और सामान्य दैनिक क्रियाएं करने में असमर्थ हैं। स्टाफ का कहना है कि उन्हें तो लगता है कि घरवाले इन्हें बोझ समझकर यहां छोड़े हुए हैं।

UP NEWS Many relatives leave patients in Meerut district hospital
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

एंबुलेंस से आ जाते हैं
जिला अस्पताल का स्टाफ बताता है कि कई बार मरीज की छुट्टी कर दी जाती है या मेडिकल रेफर कर दिया जाता है। लेकिन यह 108 एंबुलेंस में फिर यहां आ जाते हैं। अब फिर इनके परिजनों को सूचना दी जाएगी।

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UP NEWS Many relatives leave patients in Meerut district hospital
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

ये मरीज हैं काफी समय से भर्ती
- पप्पू (46), बुखार और सेप्टिक था।
- महेश (71), किडनी समस्या और सेप्टिक है।
- प्रवीण (48), मानसिक रूप से कमजोर है।
- रवि (54), हेपेटाइटिस और पीलिया की बीमारी है।
- रूबी (30), टीबी की मरीज है और कम दिखाई देता है।

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UP NEWS Many relatives leave patients in Meerut district hospital
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

सुबह दूध, दोपहर-शाम में सब्जी-दाल और रोटी 
सुबह आधा लीटर दूध, दोपहर और शाम को खाने में दाल, सब्जी और रोटी। इनके अलावा कई एनजीओ और अन्य संस्थाएं इनके लिए फल आदि लाते हैं, जो इन्हें दिए जाते हैं। स्टाफ भी अपना खाना इनके साथ शेयर कर लेता है। दवाइयों और जांचों के साथ सबकुछ नि:शुल्क है।

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