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Mirzapur News: छह करोड़ का बजट मिला, सामान आया, पर शुरू नहीं हो सका अस्पताल और ऑपरेशन थियेटर
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50 बेड भैरो प्रसाद जायसवाल चिकित्सालय । स्रोत- संवाद
- फोटो : बहराइच में चिलचिलाती धूप में गुजरते युवक।
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- सिविल लाइन में 17 करोड़ रुपये की लागत से बना है 50 बेड का अस्पताल
मिर्जापुर। नगर के सिविल लाइन स्थित 50 बेड के भैरो प्रसाद जायसवाल चिकित्सालय के संचालन के लिए छह महीने पहले छह करोड़ रुपये आंवटित होने के बाद अस्पताल और ऑपरेशन थियेटर शुरू नहीं हो पाया।
अस्पताल में पहले से संचालित मेडिकल कॉलेज के चार विभाग वापस मंडलीय अस्पताल चले गए, लेकिन इसके बावजूद भैरो प्रसाद जायसवाल चिकित्सालय का संचालन शुरू नहीं हो सका है। कारण बताया जा रहा है कि अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। फिलहाल सीएचसी से डॉक्टरों को संबद्ध कर केवल नेत्र रोग विभाग की ओपीडी चल रही है। दावा आंखों के ऑपरेशन के लिए थियेटर शुरू करने का भी था, लेकिन यह शुरू नहीं हो सका है।
सिविल लाइन में एक वर्ष पहले 17 करोड़ रुपये की लागत से भैरो प्रसाद जायसवाल नेत्र चिकित्सालय का निर्माण हुआ था। अस्पताल को सीएमओ कार्यालय को हैंडओवर किया गया था, लेकिन बाद में मेडिकल कॉलेज ने मंडलीय अस्पताल से नेत्र, मानसिक, ईएनटी और चर्म रोग विभाग को यहां संचालित करना शुरू कर दिया। इसे लेकर सीएमओ और मेडिकल कॉलेज प्रशासन के बीच तनातनी की स्थिति बनी रही। इसी बीच भैरो प्रसाद जायसवाल चिकित्सालय में 50 बेड का अस्पताल चलाने के लिए शासन ने छह महीने पहले छह करोड़ रुपये जारी किए। सीएमओ की ओर से सामान की खरीदारी कर अस्पताल भेजवाया गया। हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन अस्पताल से विभाग हटाने को तैयार नहीं था। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद मेडिकल कॉलेज के चारों विभाग वापस मंडलीय अस्पताल चले गए।
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इसके बाद सीएमओ कार्यालय ने जल्द 50 बेड का अस्पताल शुरू करने का दावा किया था। नेत्र ओपीडी के साथ ऑपरेशन थियेटर को 10 दिन के भीतर शुरू करने की बात कही गई थी, लेकिन चारों विभागों के मंडलीय अस्पताल में गए दो महीने बीतने के बाद भी केवल नेत्र ओपीडी चल रही है। न तो ऑपरेशन थियेटर शुरू हो सका है और न ही अन्य विभागों का संचालन शुरू हुआ है। इसका कारण डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की नियुक्ति न होना बताया जा रहा है।
बजट खर्च होने तक दिखी तेजी
50 बेड का अस्पताल संचालित करने के लिए छह करोड़ रुपये का बजट जारी होने के बाद सीएमओ कार्यालय ने तेजी दिखाई। सामान की खरीदारी की प्रक्रिया तेज गति से पूरी की गई, लेकिन अस्पताल संचालन की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी। छह करोड़ रुपये की खरीदारी जिस संस्था को दी गई, उसे लेकर भी सवाल उठे।
40 पद स्वीकृत, नियुक्ति का इंतजार
भैरो प्रसाद जायसवाल चिकित्सालय में डॉक्टरों और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ के 40 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें मेडिसिन, हड्डी रोग, सर्जरी, गायनोकॉलॉजी, रेडियोलॉजी और बाल रोग विशेषज्ञों के पदों के साथ अन्य पैरामेडिकल स्टाफ के पद भी शामिल हैं।
अस्पताल शुरू न होने से बंद हुए चार मेडिकल स्टोर
भैरो प्रसाद जायसवाल चिकित्सालय में मेडिकल कॉलेज के चार विभाग संचालित होने से आसपास के क्षेत्र में छह मेडिकल स्टोर खुल गए। चारों विभागों के वापस चले जाने और 50 बेड का अस्पताल शुरू न होने के कारण इनमें से चार मेडिकल स्टोर बंद हो गए हैं।
अस्पताल के नोडल को नहीं पता कब शुरू होगा संचालन
एसीएमओ डॉ. अवधेश को भैरो प्रसाद जायसवाल चिकित्सालय का नोडल बनाया गया है। अस्पताल में सामान की खरीदारी के दौरान उनकी सक्रियता बनी हुई थी और वे प्रतिदिन अस्पताल आते थे, लेकिन अब संचालन शुरू होने की प्रक्रिया के दौरान उनकी उपस्थिति नहीं दिख रही है। अस्पताल के संचालन के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उन्हें नहीं पता कि अस्पताल कब शुरू होगा।
वर्जन
अस्पताल में अभी डॉक्टरों एवं अन्य पदों पर नियुक्तियां होनी हैं। शासन से नियुक्ति होने के बाद अस्पताल को मरीजों के हित में संचालित किया जाएगा।
— डॉ. कीर्ति कुमार मिश्रा, सीएमओ
मिर्जापुर। नगर के सिविल लाइन स्थित 50 बेड के भैरो प्रसाद जायसवाल चिकित्सालय के संचालन के लिए छह महीने पहले छह करोड़ रुपये आंवटित होने के बाद अस्पताल और ऑपरेशन थियेटर शुरू नहीं हो पाया।
अस्पताल में पहले से संचालित मेडिकल कॉलेज के चार विभाग वापस मंडलीय अस्पताल चले गए, लेकिन इसके बावजूद भैरो प्रसाद जायसवाल चिकित्सालय का संचालन शुरू नहीं हो सका है। कारण बताया जा रहा है कि अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। फिलहाल सीएचसी से डॉक्टरों को संबद्ध कर केवल नेत्र रोग विभाग की ओपीडी चल रही है। दावा आंखों के ऑपरेशन के लिए थियेटर शुरू करने का भी था, लेकिन यह शुरू नहीं हो सका है।
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सिविल लाइन में एक वर्ष पहले 17 करोड़ रुपये की लागत से भैरो प्रसाद जायसवाल नेत्र चिकित्सालय का निर्माण हुआ था। अस्पताल को सीएमओ कार्यालय को हैंडओवर किया गया था, लेकिन बाद में मेडिकल कॉलेज ने मंडलीय अस्पताल से नेत्र, मानसिक, ईएनटी और चर्म रोग विभाग को यहां संचालित करना शुरू कर दिया। इसे लेकर सीएमओ और मेडिकल कॉलेज प्रशासन के बीच तनातनी की स्थिति बनी रही। इसी बीच भैरो प्रसाद जायसवाल चिकित्सालय में 50 बेड का अस्पताल चलाने के लिए शासन ने छह महीने पहले छह करोड़ रुपये जारी किए। सीएमओ की ओर से सामान की खरीदारी कर अस्पताल भेजवाया गया। हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन अस्पताल से विभाग हटाने को तैयार नहीं था। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद मेडिकल कॉलेज के चारों विभाग वापस मंडलीय अस्पताल चले गए।
इसके बाद सीएमओ कार्यालय ने जल्द 50 बेड का अस्पताल शुरू करने का दावा किया था। नेत्र ओपीडी के साथ ऑपरेशन थियेटर को 10 दिन के भीतर शुरू करने की बात कही गई थी, लेकिन चारों विभागों के मंडलीय अस्पताल में गए दो महीने बीतने के बाद भी केवल नेत्र ओपीडी चल रही है। न तो ऑपरेशन थियेटर शुरू हो सका है और न ही अन्य विभागों का संचालन शुरू हुआ है। इसका कारण डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की नियुक्ति न होना बताया जा रहा है।
बजट खर्च होने तक दिखी तेजी
50 बेड का अस्पताल संचालित करने के लिए छह करोड़ रुपये का बजट जारी होने के बाद सीएमओ कार्यालय ने तेजी दिखाई। सामान की खरीदारी की प्रक्रिया तेज गति से पूरी की गई, लेकिन अस्पताल संचालन की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी। छह करोड़ रुपये की खरीदारी जिस संस्था को दी गई, उसे लेकर भी सवाल उठे।
40 पद स्वीकृत, नियुक्ति का इंतजार
भैरो प्रसाद जायसवाल चिकित्सालय में डॉक्टरों और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ के 40 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें मेडिसिन, हड्डी रोग, सर्जरी, गायनोकॉलॉजी, रेडियोलॉजी और बाल रोग विशेषज्ञों के पदों के साथ अन्य पैरामेडिकल स्टाफ के पद भी शामिल हैं।
अस्पताल शुरू न होने से बंद हुए चार मेडिकल स्टोर
भैरो प्रसाद जायसवाल चिकित्सालय में मेडिकल कॉलेज के चार विभाग संचालित होने से आसपास के क्षेत्र में छह मेडिकल स्टोर खुल गए। चारों विभागों के वापस चले जाने और 50 बेड का अस्पताल शुरू न होने के कारण इनमें से चार मेडिकल स्टोर बंद हो गए हैं।
अस्पताल के नोडल को नहीं पता कब शुरू होगा संचालन
एसीएमओ डॉ. अवधेश को भैरो प्रसाद जायसवाल चिकित्सालय का नोडल बनाया गया है। अस्पताल में सामान की खरीदारी के दौरान उनकी सक्रियता बनी हुई थी और वे प्रतिदिन अस्पताल आते थे, लेकिन अब संचालन शुरू होने की प्रक्रिया के दौरान उनकी उपस्थिति नहीं दिख रही है। अस्पताल के संचालन के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उन्हें नहीं पता कि अस्पताल कब शुरू होगा।
वर्जन
अस्पताल में अभी डॉक्टरों एवं अन्य पदों पर नियुक्तियां होनी हैं। शासन से नियुक्ति होने के बाद अस्पताल को मरीजों के हित में संचालित किया जाएगा।
— डॉ. कीर्ति कुमार मिश्रा, सीएमओ