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Mirzapur News: सिंचाई, कृषि कार्यों के लिए डीजल का संकट
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संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। डीजल पर आए नए आदेश से किसानों की समस्या बढ़ गई है। आमतौर पर वाणिज्यिक वाहन व किसान ही डीजल का प्रयोग करते हैं। सिंचाई के लिए मोटर चलानी हो या पानी लेना हो या फिर कृषि संबंधी कोई और कार्य करना हो। सबके लिए डीजल ही आवश्यक है लेकिन अब नए आदेश से उन्हें समस्या होगी।
तेल कंपनियों का स्पष्ट निर्देश है कि डीजल या तो वाहनों में दिया जाए अथवा शासन से निर्धारित कंटेनरों में दिया जाए। आम किसान के पास ऐसे कंटेनर हैं ही नहीं। इसलिए उनको डीजल लेने के लिए हर कदम पर समस्या का सामना करना होगा।
स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित पात्र या वाहन के अतिरिक्त किसी अन्य प्रकार से डीजल नहीं दिया जा सकेगा। जिले में 3.52 लाख किसान पंजीकृत हैं जो कि सम्मान निधि प्राप्त करते हैं। इनमें से अगर पूरे जिले की बात की जाए तो कम जोत वाले किसानों का ही औसतन डीजल खर्च 10000 लीटर का है।
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ऐसे में इनकी प्रतिदिन की चार लीटर या पांच लीटर वाले उपयोग पर संकट आ सकता है। एक पेट्रोल पंप संचालक ने बताया कि वाहनों की बात तो ठीक है लेकिन निर्धारित कंटेनर वाली बात में विवाद हो सकता है।
मिर्जापुर। डीजल पर आए नए आदेश से किसानों की समस्या बढ़ गई है। आमतौर पर वाणिज्यिक वाहन व किसान ही डीजल का प्रयोग करते हैं। सिंचाई के लिए मोटर चलानी हो या पानी लेना हो या फिर कृषि संबंधी कोई और कार्य करना हो। सबके लिए डीजल ही आवश्यक है लेकिन अब नए आदेश से उन्हें समस्या होगी।
तेल कंपनियों का स्पष्ट निर्देश है कि डीजल या तो वाहनों में दिया जाए अथवा शासन से निर्धारित कंटेनरों में दिया जाए। आम किसान के पास ऐसे कंटेनर हैं ही नहीं। इसलिए उनको डीजल लेने के लिए हर कदम पर समस्या का सामना करना होगा।
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स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित पात्र या वाहन के अतिरिक्त किसी अन्य प्रकार से डीजल नहीं दिया जा सकेगा। जिले में 3.52 लाख किसान पंजीकृत हैं जो कि सम्मान निधि प्राप्त करते हैं। इनमें से अगर पूरे जिले की बात की जाए तो कम जोत वाले किसानों का ही औसतन डीजल खर्च 10000 लीटर का है।
ऐसे में इनकी प्रतिदिन की चार लीटर या पांच लीटर वाले उपयोग पर संकट आ सकता है। एक पेट्रोल पंप संचालक ने बताया कि वाहनों की बात तो ठीक है लेकिन निर्धारित कंटेनर वाली बात में विवाद हो सकता है।