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Mirzapur News: अब मिर्जापुर के खेतों में लहलहाएंगे खजूर, पांचवें साल से 16 लाख सालाना कमाई की उम्मीद

Sat, 01 Aug 2026 01:11 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2026 01:11 AM IST
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Now dates will flourish in the fields of Mirzapur, expecting an annual income of 1.6 million from the fifth year
फल से लदे खजुर का पेड़।-सोशल मीडिया।
मिर्जापुर।
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गुजरात के कच्छ मॉडल से प्रेरित होकर अब मिर्जापुर के किसान भी खेतों में खजूर की व्यावसायिक खेती कर सकेंगे। उद्यान विभाग ने खजूर की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी शुरू कर दी है। योजना के तहत एक हेक्टेयर में खजूर का बाग लगाने वाले किसानों को 1.40 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। किसानों का चयन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होगा। हाल ही में 21 से 23 जुलाई के बीच जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम, संयुक्त निदेशक उद्यान डॉ. राजीव वर्मा और उप निदेशक उद्यान आर.के. यादव ने गुजरात के भुज स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर डेट पाम का प्रशिक्षण लिया। वहां बड़े पैमाने पर हो रही खजूर की खेती का अध्ययन किया। अधिकारियों ने 250 एकड़ में खजूर की खेती करने वाले किसान बलराम के बाग का भी निरीक्षण किया। प्रशिक्षण के दौरान पाया गया कि बीआर-5, एडीपी-1 और सोना-100 जैसी खजूर की किस्में विंध्य और बुंदेलखंड के मौसम के अनुकूल हैं। इन किस्मों के फल 15 जुलाई से पहले ही तैयार हो जाते हैं, जिससे बारिश का असर नहीं पड़ता। ताजा खजूर बाजार में 150 से 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकता है। उद्यान विभाग के अनुसार, एक पेड़ से औसतन दो क्विंटल फल होता है। एक हेक्टेयर में 160 पौधे लगाए जा सकते हैं। प्रति पेड़ 10 हजार रुपये की औसत आय के आधार पर किसान को पौध रोपण के पांचवें वर्ष से लगभग 16 लाख रुपये सालाना की आमदनी हो सकती है।


टिशू कल्चर के पौधे जल्दी देते हैं उत्पादन
उद्यान विभाग से मिली जानकारी के अनुसार टिशू कल्चर के पौधे रोपण के तीसरे वर्ष से ही फल देना शुरू कर देते हैं, जबकि बीज से तैयार खजूर के पौधों में उत्पादन आने में पांच से छह वर्ष लगते हैं। खजूर की पौध लगाने के लिए अगस्त, सितंबर और अक्तूबर सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। इसके अलावा फरवरी और मार्च में भी रोपण किया जा सकता है। टिशू कल्चर के एक पौधे की कीमत लगभग 4,500 से 5,000 रुपये तक होती है।
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36 किसान खजूर की बागवानी योजना से जुड़ चुके
उद्यान विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एकीकृत बागवानी मिशन के तहत मिर्जापुर में अब तक 36 किसान खजूर की बागवानी योजना का लाभ ले चुके हैं। सरकार की ओर से दिए जा रहे अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन से किसानों का रुझान इस लाभकारी फसल की ओर लगातार बढ़ रहा है। जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम ने बताया कि खजूर एक दीर्घकालिक फलदार फसल है, बाजार में पूरे वर्ष अच्छी मांग रहती है। किसानों को लंबे समय तक स्थायी और बेहतर आय का अवसर मिलता है।
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गुजरात के कच्छ में खजूर की खेती के बेहतर परिणाम मिले हैं। वहां की कुछ उन्नत किस्में विंध्य व बुंदेलखंड क्षेत्र के मौसम के लिए भी उपयुक्त हैं। इच्छुक किसानों को योजना के तहत अनुदान देकर खजूर की व्यावसायिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। -मेवाराम, जिला उद्यान अधिकारी
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