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Mirzapur News: टांडा जलाशय का जलस्तर नौ फीट घटा, पेयजल संकट की आहट
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टांडा जलाशय, स्रोत सोशल मीडिया
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मिर्जापुर। नगर पालिका क्षेत्र के सात वार्डों को जलापूर्ति करने वाले टांडा जलाशय का जलस्तर 19 से घटकर 10 फीट पहुंच गया है। इसे पेयजल संकट की आहट माना जा रहा है। यह सात वार्डाें में एक लाख लोगों की जरूरतों को पूरा करता है। जलाशय में लगे संकेतक से जलस्तर कम होने का पता चला है।
टांडा जलाशय से पानी लंका की पहड़ी पर बिना किसी मोटर की पाइप लाइनों के जरिए आती है। वहां से लालडिग्गी, गणेशगंज, चंद्रदीपा, सबरी, स्टेशन रोड व पुरानी दशमी आदि वार्डों में पहुंचता है। इस पानी को स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। इन वार्डों में वर्तमान में कई जगहों पर अमृत योजना के तहत पेयजल की आपूर्ति की जा रही है लेकिन वह अभी प्रायोगिक तौर पर। मुख्य रूप से टांडा जलाशय से ही इन वार्डों में जलापूर्ति होती है। ऐसे में इस जलाशय में पानी कम होना खतरे की घंटी है। नगर पालिका के जलकल अभियंता दीपक कुमार ने बताया कि टांडा जलाशय में पर्याप्त पानी है। जितना पानी है, उससे कम से कम तीन महीने तक कोई समस्या नहीं होने वाली। इसी बीच बरसात होगी और आगे भी कोई समस्या नहीं होगी। इसके अतिरिक्त अमृत योजना से भी जलापूर्ति हो रही है।
वैकल्पिक साधनों में भी है समस्या
नगर में जलापूर्ति के लिए वैकल्पिक साधन जैसे मिनी ट्यूबवेल, हैंडपंप आदि हैं। उनकी स्थिति भी ठीक नहीं है। नगर पालिका परिषद के 38 वार्डों में लगे 833 मिनी ट्यूबवेलों में से 32 खराब हैं या बंद हैं। संकटमोचन वार्ड, रमईपट्टी, नटवा, पुरी कटरा, शुक्लहां आदि वार्ड के मिनी ट्यूबवेल बंद हैं। कहीं का मोटर जला है या किसी का स्टार्टर खराब है या फिर कहीं पर स्टेबलाइजर ही नहीं है। इससे समस्या बढ़ रही है। इ
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इनसेट
1854 हैंडपंप मेंं से 88 हैंडपंप खराब पड़े
नगर पालिका क्षेत्र में लगे 1854 हैंडपंप मेंं से 88 हैंडपंप खराब पड़े हैं। इनमें से कई की बोरिंग फेल हो चुकी है। अभी हाल ही में ही बुधवार को जब आंधी बारिश आई थी। नगर में ही 24 घंटे विद्युत आपूर्ति बाधित थी। उस समय इन हैंडपंपों की आवश्यकता शिद्दत से महसूस की गई। कटमोचन वार्ड के घास की गली में मिनी ट्यूबवेल व हैंडपंप दोनों ही हैं लेकिन दोनों ही खराब हैं।
टांडा जलाशय से पानी लंका की पहड़ी पर बिना किसी मोटर की पाइप लाइनों के जरिए आती है। वहां से लालडिग्गी, गणेशगंज, चंद्रदीपा, सबरी, स्टेशन रोड व पुरानी दशमी आदि वार्डों में पहुंचता है। इस पानी को स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। इन वार्डों में वर्तमान में कई जगहों पर अमृत योजना के तहत पेयजल की आपूर्ति की जा रही है लेकिन वह अभी प्रायोगिक तौर पर। मुख्य रूप से टांडा जलाशय से ही इन वार्डों में जलापूर्ति होती है। ऐसे में इस जलाशय में पानी कम होना खतरे की घंटी है। नगर पालिका के जलकल अभियंता दीपक कुमार ने बताया कि टांडा जलाशय में पर्याप्त पानी है। जितना पानी है, उससे कम से कम तीन महीने तक कोई समस्या नहीं होने वाली। इसी बीच बरसात होगी और आगे भी कोई समस्या नहीं होगी। इसके अतिरिक्त अमृत योजना से भी जलापूर्ति हो रही है।
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वैकल्पिक साधनों में भी है समस्या
नगर में जलापूर्ति के लिए वैकल्पिक साधन जैसे मिनी ट्यूबवेल, हैंडपंप आदि हैं। उनकी स्थिति भी ठीक नहीं है। नगर पालिका परिषद के 38 वार्डों में लगे 833 मिनी ट्यूबवेलों में से 32 खराब हैं या बंद हैं। संकटमोचन वार्ड, रमईपट्टी, नटवा, पुरी कटरा, शुक्लहां आदि वार्ड के मिनी ट्यूबवेल बंद हैं। कहीं का मोटर जला है या किसी का स्टार्टर खराब है या फिर कहीं पर स्टेबलाइजर ही नहीं है। इससे समस्या बढ़ रही है। इ
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1854 हैंडपंप मेंं से 88 हैंडपंप खराब पड़े
नगर पालिका क्षेत्र में लगे 1854 हैंडपंप मेंं से 88 हैंडपंप खराब पड़े हैं। इनमें से कई की बोरिंग फेल हो चुकी है। अभी हाल ही में ही बुधवार को जब आंधी बारिश आई थी। नगर में ही 24 घंटे विद्युत आपूर्ति बाधित थी। उस समय इन हैंडपंपों की आवश्यकता शिद्दत से महसूस की गई। कटमोचन वार्ड के घास की गली में मिनी ट्यूबवेल व हैंडपंप दोनों ही हैं लेकिन दोनों ही खराब हैं।