{"_id":"6a777c3b5901a15bd7073a8b","slug":"the-clouds-poured-down-in-abundance-bringing-smiles-to-the-farmers-faces-mirzapur-news-c-192-1-svns1034-159019-2026-08-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mirzapur News: झूमकर बरसे बदरा, किसानों के चेहरे पर खिली मुस्कान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mirzapur News: झूमकर बरसे बदरा, किसानों के चेहरे पर खिली मुस्कान
विज्ञापन
शेरवां क्षेत्र में बारिश के बीच खेतों में लहलहाती धान की फसल।-संवाद।
- फोटो : 1
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। सावन में बदरा जिले के किसानों पर मेहरबान रहा। दिन में धूप, रात में पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश से खेतों में हरियाली लौट आई है। शुक्रवार रात हुई बारिश ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी।
सात अगस्त तक 496 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 477.9 मिमी बारिश हुई थी। सामान्य बारिश का सिलसिला बना रहा तो खरीफ फसलों की पैदावार बेहतर होने की उम्मीद है।
तहसीलवार आंकड़ों पर गौर करें तो चुनार में 20 एमएम, मड़िहान में 05 और लालगंज में 0, जबकि सदर तहसील क्षेत्र में सबसे अधिक 35 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
विज्ञापन
शुक्रवार रात कभी तेज तो कभी हल्की फुहारों के साथ हुई बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी बनी हुई है। धान की रोपाई वाले खेत पानी से लबालब हैं। इससे किसानों को सिंचाई के लिए पंप चलाने और डीजल पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
मिर्जापुर। सावन में बदरा जिले के किसानों पर मेहरबान रहा। दिन में धूप, रात में पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश से खेतों में हरियाली लौट आई है। शुक्रवार रात हुई बारिश ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी।
सात अगस्त तक 496 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 477.9 मिमी बारिश हुई थी। सामान्य बारिश का सिलसिला बना रहा तो खरीफ फसलों की पैदावार बेहतर होने की उम्मीद है।
विज्ञापन
तहसीलवार आंकड़ों पर गौर करें तो चुनार में 20 एमएम, मड़िहान में 05 और लालगंज में 0, जबकि सदर तहसील क्षेत्र में सबसे अधिक 35 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
विज्ञापन
शुक्रवार रात कभी तेज तो कभी हल्की फुहारों के साथ हुई बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी बनी हुई है। धान की रोपाई वाले खेत पानी से लबालब हैं। इससे किसानों को सिंचाई के लिए पंप चलाने और डीजल पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ रहा है।