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Moradabad: मोरा की मिलक में बंदरों का आतंक, 24 घंटे में तीन लोगों पर हमला; घरों में कैद हुए ग्रामीण

Sat, 08 Aug 2026 02:31 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: मुरादाबाद ब्यूरो Updated Sat, 08 Aug 2026 02:31 AM IST
सार

मोरा की मिलक समेत आसपास की कॉलोनियों में बंदरों का आतंक बढ़ गया है। बीते 24 घंटे में बंदरों ने तीन लोगों को काटकर घायल कर दिया, जिससे ग्रामीणों में दहशत है। लोग बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर भेजने से डर रहे हैं।

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Monkeys run wild in Mora ki Milak... three people attacked in 24 hours.
बंदरों का उत्पात - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मोरा की मिलक में बंदरों का आतंक अब इस कदर बढ़ गया है कि लोगों का अपने ही घरों में रहना मुश्किल हो गया है। हालात ऐसे हैं कि न लोग आंगन में सो पा रहे हैं और न ही चैन से खाना खा पा रहे हैं। बीते 24 घंटे में बंदरों ने तीन लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। लगातार हो रहे हमलों से पूरे गांव में दहशत फैल गई है।

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उधर, आशियाना कॉलोनी, प्रकाश एन्क्लेव, ग्रेसियस और पेसिफिक स्टार होम्स सोसायटी के लोग भी बंदरों के आतंक से परेशान हैं। मोरा की मिलक में चामुंडा मंदिर के पास रहने वाले 53 वर्षीय आबिद गुरुवार रात करीब साढ़े 12 बजे घर के आंगन में सो रहे थे।
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इसी दौरान एक बंदर अचानक उनके सीने पर आ बैठा और गले पर हमला कर दिया। शोर सुनकर परिजन बाहर दौड़े तो बंदर आबिद से चिपका हुआ था। बेटे तस्लीम ने बताया कि डंडों से भगाने की कोशिश की, लेकिन बंदर लगातार हमला करता रहा।
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करीब दस मिनट की मशक्कत के बाद वह भागा। इस दौरान उसने आबिद के दोनों हाथों की उंगलियों में भी कई जगह काट लिया। गंभीर रूप से घायल आबिद को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के साथ एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाया गया।

इसी रात करीब एक बजे होशियार सिंह भी अपने आंगन में सो रहे थे। तभी बंदर ने उन पर हमला कर काट लिया। उनकी चीख सुनकर घर के बच्चे और महिलाएं सहम गए। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे 81 वर्षीय करण सिंह अपने घर की बैठक में खाना खा रहे थे।

तभी पीछे से आए बंदर ने उनकी कोहनी के ऊपर काटकर गहरा जख्म कर दिया। खून बहने लगा तो परिजन उन्हें तुरंत कॉसमॉस अस्पताल ले गए, जहां उनका उपचार चल रहा है। लगातार हमलों से गांव में भय का माहौल है। महिलाएं बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दे रहीं, जबकि बुजुर्ग छत और आंगन में जाने से भी डर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि वन विभाग और प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया का कहना है कि बंदरों की समस्या के निस्तारण के लिए जिले में टास्क फोर्स बनाई जा रही है।

मैं आंगन में सो रहा था। अचानक बंदर मेरे सीने पर बैठ गया। पहले आवाज ही नहीं निकल रही थी, फिर उसने गले और हाथों पर काट लिया। परिवार वाले नहीं आते तो जान भी जा सकती थी। - आबिद, मोरा की मिलक

मैं बैठकर में खाना खा रहा था। अचानक पीछे से बंदर ने हमला कर दिया। पूरा कमरा खून से भर गया। अब प्रशासन को सिर्फ आश्वासन नहीं, कार्रवाई करनी होगी। — करण सिंह, मोरा मुस्तकम

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