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सामूहिक विवाह योजना में भ्रष्टाचार: दुल्हनों को नहीं मिली पाजेब और बिछुआ, कई जोड़ों को बिना गद्दों के भेज दिया

अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Wed, 04 Feb 2026 03:09 PM IST
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सार

मुरादाबाद में सामूहिक विवाह योजना में भ्रष्टाचार मामले में तीन सदस्यीय कमेटी जांच कर  रही है। अभी तक सामने आया है कि किसी दुल्हन को पाजेब तो किसी को बिछुआ तक नहीं मिला। किसी को गद्दे नहीं मिले। कमेटी 12 फरवरी तक पूरी रिपोर्ट देगी। 

Moradabad: Corruption in mass marriage scheme, brides did not receive anklets and toe rings
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में मौजूद दुल्हा-दूल्हन ( फाइल) - फोटो : संवाद
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विस्तार
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मुरादाबाद में सामूहिक विवाह योजना में हुए भ्रष्टाचार पर जांच तेजी से चल रही है। समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। अभी जांच अधिकारियों की पूरी रिपोर्ट तो सीडीओ कार्यालय नहीं पहुंची है लेकिन मंगलवार की शाम तक करीब 20 फीसदी जांच रिपोर्ट सौंपी गई है।

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इसमें पाया गया है कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में किसी दुल्हन को पाजेब तो किसी को बिछुआ तक नहीं मिला। किसी को गद्दे नहीं मिले तो किसी को बिना उपहार के ही घर जाना पड़ा। उपचार का लालच देकर किसी दुल्हन को फिर से विवाह वेदी पर बैठा दिया तो किसी को बिना शादी हुए ही साड़ी का जोड़ा पहना दिया गया।

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कई अधिकारियों पर गिरेगी गाज 

संपूर्ण जांच में कई अन्य बड़ी गतिविधियां सामने आने की संभावना है, जिससे कई अधिकारियों पर गाज गिरने की आशंका है। कुंदरकी के विधायक रामवीर सिंह द्वारा मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा भ्रष्टाचार करने व अनियमितताएं बरतने के आरोप लगाए जाने के बाद मुख्य विकास अधिकारी के आदेश पर जांच की जा रही है।

जांच के लिए जिला विकास अधिकारी जीबी पाठक ने 30 टीमें बनाई थी, जिन्हें मंगलवार की शाम तक रिपोर्ट देनी थी लेकिन संख्या अधिक होने व गांव दूर दूर होने के कारण तय समय में सिर्फ 20 फीसदी ही अधिकारी जांच रिपोर्ट सौंप पाए हैं। इन 20 फीसदी रिपोर्ट में ही समारोह में किस कदर अनियमितता बरती गई है इसकी तस्वीर दिखने लगी है।

UP: मुरादाबाद में सामूहिक विवाह योजना में भ्रष्टाचार, मंत्री असीम अरुण ने बैठाई जांच, तीन सदस्यीय कमेटी गठित

रिपोर्ट में जोड़ों का पात्र बता रहे

किसी भी अधिकारी की रिपोर्ट ऐसी नहीं है, जिसमें आधा अधूरा सामान देने की बात न लिखी गई हो। हालांकि यह जांच अधिकारी अधिकतर रिपोर्ट में जोड़ों का पात्र बता रहे हैं, जबकि कई जोड़ों ऐसे हैं, जिनकी शादी पहले ही हो चुकी है, कुछ ही बाद में होगी। नियम तो यह है कि यह योजना आर्थिक रूप से उन गरीब लोगों के लिए हैं, जो अपनी बेटियों के हाथ पीले करने में धनाभाव के कारण परेशानी महसूस कर रहे हैं।

लक्ष्य पूर्ति के लिए किसी की बेटी की शादी हो जाने के बाद भी उसे लाभ देना, इस योजना के नियमों और शर्तो के विपरीत है। कुल मिलाकर यदि सत्यापन सही तरीके से किया जाए तो निश्चित तौर पर व्यवस्था या सूचीबद्ध करने वाले अधिकारी कर्मचारी तो कार्रवाई के दज में आएंगे ही, उन अधिकारियों की गर्दन भी फंस सकती है, जिनके पास इस योजना  का पर्यवेक्षण करने की जिम्मेदारी थी।

जिला विकास अधिकारी जीपी पाठक ने बताया कि जांच अभी जारी है, कुछ अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट सौंप दी है, इनमें सामान वितरण में अनियमितताएं सामने आई हैं, कल तक अन्य अधिकारी भी रिपोर्ट दे देंगे, इसके बाद पूरी रिपोर्ट तैयार तय किया जाएगा कि क्या कमी मिलीं। 

ये उपहार देने थे
पांच ब्लाउज सहित साड़ी या लहंगा, एक एक पैंट शर्ट का कपड़ा, फेंटा (गमछा), एक जोड़ी चांदी की पायल, चांदी का बिछुया, डिनर सेट (8 किग्रा), यूनाइटेड कंपनी का कूकर, ट्राली बैग, दीवार घड़ी, कढ़ाई, कूल केज, आयरन प्रेस और सीलिंग फैन,, डबल बैड चादर, दो कंबल, दो गद्दा या मैट्रेस, दो तकिया, एक सिन्होरा, दो दर्जन कांच की लाल चूड़ी,  लाख पदार्थ से बने चार कंगन व 16 आइटम सहित एक वेनिटी किट, जिसमें फेस क्रीम, लिपिस्टिक , शीशा, काजल, फाउंडेशन, आलता, हेयर क्लिप, केश तेल, कुुमकुम, रवड़बैंड, सिंदूर, नेल पॉलिस, मेहंदी, बिंदी, सेफ्टी पिन व कंघा हो, इसके अलावा गैस चूल्हा डबल वर्नर व कैसरोल (1000 एमएल, सेलो)। इस पूरे सामान की कीमत करीब 25 हजार रुपये।

दो एडीओ पर लटकी निलंबन की तलवार
मूंढ़ापांडे व कुंदरकी ब्लाक में अधिक गड़बड़ियां बताई जा रही हैं, जिला समाज कल्याण अधिकारी पंखुड़ी जैन ने दो दिन पहले ही यहां सहायक विकास  अधिकारी (समाज कल्याण)  प्रशांत सिंह व ललित कुमार को तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर मुख्यालय से संबद्द किया गया था। अब इन पर निलंबन की तलवार लटक गई है।

तीन सदस्यीय कमेटी कर रही जांच 
राज्यमंत्री ने कहा कि सामने आई शिकायतों व अनियमितताओं की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई, जिसमें समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक पीके त्रिपाठी, उपनिदेशक अमरजीत सिंह और जिला समाज कल्याण अधिकारी अनामिका सिंह को शामिल किया गया है। जांच के लिए चार प्रमुख बिंदु तय किए गए हैं।

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