UP: भाजपा बनाम भाजपा की जंग में फंसी जिला कमेटी की घोषणा, अपनों की जंग से जूझ रही पार्टी, बढ़ रहीं मुश्किलें
यूपी के मुरादाबाद में भाजपा बनाम भाजपा की जंग में जिला कमेटी की घोषणा फंसी है। अपनों की जंग से भाजपा जूझ रही है। मुश्किलें बढ़ रहीं। विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व और पदाधिकारियों की पृष्ठभूमि पर सवाल उठे है।
विस्तार
भाजपा इन दिनों अपनों की जंग से जूझ रही है। हाल ही में घोषित हुई मुरादाबाद महानगर की कार्यसमिति में कई अहम बिंदुओं की अनदेखी की बात सामने आ रही है तो कुछ दिन पहले जारी 10 नामित पार्षदों की सूची में देहात विधानसभा क्षेत्र की हिस्सेदारी न होने का मुद्दा चर्चा में है।
इसी तरह कुछ मुद्दे मुरादाबाद जिले की कार्यसमिति के उस प्रस्ताव को लेकर उठाए जा रहे हैं, जो अभी घोषित नहीं हुई है लेकिन जिले से प्रदेश नेतृत्व के हवाले की जा चुकी है।
पता चला है कि महानगर की टीम और नामित पार्षदों की सूचियों से जारी कमेंट-कटाक्षों से सजग होकर प्रदेश नेतृत्व ने मुरादाबाद समेत पश्चिमी यूपी के चार जिलों की कार्यसमिति की घोषणा रोक दी है।
संगठन का गहराई से अनुभव रखने वाले बताते हैं कि जिले की प्रस्तावित टीम में कुछ नाम 50 साल से ऊपर के हैं, जबकि 30 से 50 वर्ष तक के पार्टी प्रतिनिधियों को शामिल किए जाने यानी 50 से अधिक उम्र वालों को संगठन की मुख्य धारा में पद न देने का नियम है।
प्रस्तावित लिस्ट में सभी नाम 50 की अधिकतम उम्र की सीमा का पालन करते नहीं दिखते। इसके अलावा जिले की कमेटी की अधिकृत घोषणा से पहले ही प्रस्तावित सूची में विधानसभा क्षेत्रवार इलाकों के प्रतिनिधित्व पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सांगठनिक व्यवस्था के हिसाब से जिला कार्यसमिति में कांठ, ठाकुरद्वारा, कुंदरकी, बिलारी का ही प्रतिनिधित्व होना चाहिए। इसका कारण जिले की शेष दो विधानसभा सीटें (मुरादाबाद नगर और देहात) पहले से महानगर जिला कार्यसमिति में कवर हैं। जिले के प्रस्ताव में मुरादाबाद महानगर में लंबे समय से सक्रिय और निवास कर रहे कई भाजपाइयों को स्थान दिया गया है।
इसके लिए किसी को ग्रामीण क्षेत्र की उस विधानसभा सीट से सदस्यता दिला दी गई है, जो सीटें जिले की कार्यसमिति के दायरे में आती हैं। इस तरह की सदस्यता का टैग लगाकर जिले की टीम में स्थान देने की ऐसी ही कोशिश पर कुंदरकी से दिखाए गए एक नाम पर कड़ी आपत्ति ऊपर तक पहुंच गई है।
यही नहीं, सूत्र बताते हैं कि जिले की प्रस्तावित टीम में मूल रूप से बिजनौर और संभल के रहने वालों को भी पदाधिकारी बनाने का प्रयास है। इनके बचाव में तर्क यह दिया जा रहा है कि लंबे समय से यह लोग मुरादाबाद शहर में रह रहे हैं।
इस तरह के जवाबों पर जानकारों का तर्क है कि अगर उनकी महानगर में निवास अवधि को आधार बना रहे हैं तो उन्हें हालिया घोषित गिरीश भंडूला की महानगर कमेटी में स्थान दिया जाना था। साथ ही महानगर में लंबी रिहायश के तर्क को इस बात से भी काटा जा रहा है कि फिर लंबे समय के शहरी बने कुंदरकी या ग्रामीण क्षेत्र की किसी और विधानसभा सीट से सदस्य क्यों बनाए गए हैं।
इन बिंदुओं पर सांगठनिक लोगों द्वारा ही संगठन के जिम्मेदारों पर उठाए जा रहे सवालों का सीधा जवाब किसी के पास नहीं है। जानकार कहते हैं कि इन्हीं हालात की वजह से जिला कमेटी की घोषणा अटक गई है। प्रदेश नेतृत्व प्रस्तावित कमेटी को जाति-धर्म-क्षेत्र के प्रतिनिधित्व की कसौटी पर कसने के साथ आने वाले समय के विधानसभा चुनाव को भी ध्यान में रखे है। प्रदेश स्तरीय नेताओं का मानना है कि कोई भी चूक या अंतर्कलह विपक्षी दलों को मुखर होने का अवसर दे सकती है।
महानगर टीम में भी 50 साल और हर मंडल के प्रतिनिधित्व का सवाल
भाजपा के जानकार बताते हैं कि कुछ दिन पहले घोषित मुरादाबाद महानगर की जिला कार्यसमिति में कई ऐसे लोगों को शामिल किया गया है, जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है। इस तरह के लोगों को प्रमुख पदों की जिम्मेदारी दी गई है। कहा जा रहा है कि महामंत्री बने विशाल त्यागी को छोड़कर शेष महामंत्रियों की उम्र भी 50 से ज्यादा है।
इसके अलावा हेमराज सैनी, नवनीत टंडन, शम्मी भटनागर, अमित शर्मा आदि संगठन में जगह न पाने वाले भाजपाइयों को उम्रदराज लग रहे हैं। दूसरी ओर, 55 की उम्र पार कर चुके भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष दिनेश सिसाैदिया संगठन के पुराने और जिम्मेदार होने के बावजूद आयु का हवाला देकर पदाधिकारियों की सूची से किनारे कर दिए गए थे। यही नहीं हर मंडल से दो पदाधिकारियों के प्रतिनिधित्व की शर्त भी महानगर टीम में पूरी न होने की भी चर्चाएं हैं।
नामित 10 पार्षदों की लिस्ट में देहात सीट के भाजपाइयों को नहीं मौका
कुछ दिन पहले जारी हुई नगर निगम के 10 नामित पार्षदों की सूची में नगर विधानसभा सीट का दबदबा है। देहात विधानसभा सीट के भाजपाइयों में से किसी को नामित पार्षद बनने का अवसर नहीं मिला है। यह स्थिति तब है, जब मेयर के निर्वाचन क्षेत्र में 40 फीसदी शेयर देहात विधानसभा क्षेत्र का है। मुरादाबाद महानगर यानी निगम क्षेत्र में ही 60 फीसदी आबादी देहात विधानसभा क्षेत्र में आती है। इसी वजह से देहात विधानसभा क्षेत्र में निवास करने वाले सुरेंद्र विश्नोई, दिनेश गोला, पंकज शर्मा समेत सात भाजपाई निर्वाचित पार्षद हैं। इस तरह के भाजपाइयों की क्षेत्र में पकड़ के कारण ही मुस्लिम बहुल मुरादाबाद देहात सीट पर चुनाव में भाजपा के केके मिश्रा को हासिल हुए वोटों में से 60 हजार नगरीय क्षेत्र से मिले थे।
पर्यवेक्षक-प्रभारी से चर्चा बाद भेजा है प्रस्तावः पाल
भाजपा जिलाध्यक्ष आकाश पाल का कहना है कि जिले की प्रस्तावित कमेटी में संगठन के नियमों का पूरा ध्यान रखा गया है। सभी जाति-क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व रखा गया है। काम करने वालों को प्राथमिकता दी है। सक्रिय सदस्यता वाले पते को आधार बनाया गया है। संगठन के पर्यवेक्षक, प्रभारी व अन्य वरिष्ठों से चर्चा के बाद प्रस्ताव प्रदेश स्तर पर भेजा गया है। वहां से विधिवत घोषणा होने के बाद सवाल उठाने वालों को तर्क के साथ जवाब दिया जाएगा। घोषणा से पहले किसी का टीका-टिप्पणी करना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।
कमेटी के गठन में पार्टी की रीति-नीति का पूरा रखा गया ध्यान
भाजपा महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला कहते हैं कि महानगर की कमेटी के गठन में पार्टी की रीति-नीति और सांगठनिक नियमों का पूरा ध्यान रखा गया है। क्षेत्र और जातीय संतुलन समेत महिलाओं की सक्रिय हिस्सेदारी का मानक भी पूरा है। उम्र सीमा में छूट के लिए प्रदेश नेतृत्व से उन नामों पर विशेष निवेदन किया था, जो काफी समय से जिम्मेदारी से संगठन का काम कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव में पूरी टीम का लाभ मिल सके, इस लिहाज से कमेटी का गठन है। उन मंडलों का ही प्रतिनिधित्व नहीं है, जहां गैरभाजपाई और दूसरे दल के प्रति कट्टर रुख वाले मतदाताओं की संख्या अधिक है।