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UP: एक अरब का स्कैम, 59 साल पुराना फर्जीवाड़ा, संभल में सरकार ने कब्जा मुक्त कराई 38 बीघा जमीन; पूरी कहानी

Mon, 29 Jun 2026 03:10 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, संभल
अमर उजाला नेटवर्क, संभल Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 29 Jun 2026 03:10 PM IST
सार

संभल में अरबों रुपये की जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया है। जमीन पर 59 साल से कब्जा था। भूमि को सरकारी अभिलेखों में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

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Sambhal land scam Gram Samaj land worth ₹100 crore freed from encroachment in Sambhal
Sambhal land scam - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

संभल पालिका क्षेत्र में मुरादाबाद मार्ग पर स्थित तख्त गुसाई में ग्राम सभा की 38 बीघा जमीन कब्जा मुक्त कराकर ग्राम सभा को सौंपी गई है। यह आदेश उपसंचालक चकबंदी न्यायालय से किया गया है। डीएम अंकित खंडेलवाल का कहना है कि लगभग 101 करोड़ रुपये की कीमत इस जमीन की है। 
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यह जमीन करीब 59 साल से निजी कब्जे में थी। ज्यादातर जमीन खाली पड़ी थी जिस पर कब्जा लेकर बोर्ड लगवा दिए गए हैं। जितनी जमीन का व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है उनके कब्जाधारकों को नोटिस जारी कर खाली कराने के निर्देश दिए जाएंगे। 
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डीएम और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने रविवार को मौके पर पहुंचकर मुआयना किया और कब्जा मुक्त किए जाने के निर्देश दिए हैं। डीएम को शिकायत मिली थी कि तहसील संभल के तख्त गुसाईं में सरकारी जमीन पर सईदुल रहमान और उनके वारिसों का वर्षों से कब्जा था। 
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इस भूमि का अनुमानित मूल्य लगभग 101 करोड़ रुपये है। डीएम ने इसका तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने उपसंचालक चकबंदी न्यायालय में पुनर्स्थापना अपील दायर करने का निर्देश दिया। तीन जून 2026 को यह अपील दायर की गई।

उपसंचालक चकबंदी न्यायालय ने प्रतिदिन सुनवाई करते हुए 27 जून 2026 को भूमि को ग्राम सभा के नाम दर्ज करने का आदेश दिया गया। डीएम ने बताया कि इस आदेश के बाद ग्राम सभा को यह भूमि पुनः प्राप्त हुई है। आदेश में गाटा संख्या 206, 207, 233, 242/378 और 279 सम्मिलित हैं। भूमि को सरकारी अभिलेखों में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

पालिका अध्यक्ष द्वारा पट्टा दिए जाने का दावा किया गया, जो नियम विरुद्ध था
शासन के 11 अगस्त 1954 के गजट के अनुसार, मौजा तख्त गुसाईं को गैर आबाद घोषित किया गया था। इसका प्रबंधन नगर पालिका संभल को सौंपा गया था, हालांकि यह क्षेत्र उसकी सीमा से बाहर था। सईदुल रहमान ने दावा किया कि 1967 में तत्कालीन पालिका अध्यक्ष साहू चिरंजीलाल ने उन्हें इस भूमि का पट्टा दिया था। 

नगर पालिका अधिनियम 1916 के तहत बिना शासन की अनुमति के संपत्ति का अंतरण नहीं हो सकता। इस मामले में शासन की कोई अनुमति उपलब्ध नहीं थी। अधिनियम के अनुसार, पट्टे की अवधि एक वर्ष से अधिक नहीं हो सकती। कथित पट्टा दिनांक 12 जुलाई 1967 विधि शून्य पाया गया।

मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन, पालिका दावा-पट्टा कभी नहीं हुआ
डीएम ने बताया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में नगर पालिका परिषद संभल बनाम सईदुल रहमान खां की एक रिट याचिका 2008 से विचाराधीन थी। तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता ने 4 सितंबर 2013 को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर इसे वापस ले लिया था। वर्तमान ईओ ने उच्च न्यायालय में पुनर्स्थापना प्रार्थनापत्र दाखिल किया है, जो अभी विचाराधीन है। 

तहसीलदार न्यायालय ने 29 जून 1991 को सईदुल रहमान का नाम अवैध कब्जादार श्रेणी से निरस्त किया था। एडीएम न्यायालय ने 28 फरवरी 1992 को इस आदेश को सही मानते हुए निगरानी निरस्त की थी। चकबंदी कार्रवाई के दौरान सईदुल रहमान ने 1967 के कथित पट्टे के आधार पर नाम दर्ज कराने का प्रार्थनापत्र दिया था। पालिका की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि सईदुल रहमान के नाम कोई पट्टा कभी जारी नहीं हुआ था।

पालिका अध्यक्ष को नहीं था वैधानिक अधिकार, फिर कैसे कर दिया पट्टा
डीएम ने बताया कि तत्कालीन अध्यक्ष को ऐसा पट्टा देने का वैधानिक अधिकार नहीं था। पालिका के अभिलेखों में भी ऐसे किसी पट्टे का कोई प्रमाण नहीं मिला। कथित पट्टा फर्जी और कूटरचित दस्तावेज पर आधारित था। वर्तमान उपसंचालक चकबंदी ओमप्रकाश अंजोर ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर सुनवाई की। 

सईदुल रहमान के उत्तराधिकारी न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए, जबकि भूमि खरीदने वालों की सुनवाई की गई। न्यायालय ने पाया कि तत्कालीन आदेश कपटपूर्ण तथ्यों के आधार पर प्राप्त किया गया था। तत्कालीन उपसंचालक चकबंदी, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी, तत्कालीन मानचित्रक शाहबुद्दीन और वर्तमान पैरोकार माजिद खां की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

उपसंचालक चकबंदी न्यायालय में यह पूरी कार्रवाई मात्र 25 दिन में संपन्न हुई है। जमीन को सरकारी अभिलेखों में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। पट्टा करने में जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कुछ जमीन का व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है। उन कब्जाधारकों को खाली करने के निर्देश दिए हैं।- अंकित खंडेलवाल, डीएम, संभल

 

सरकारी जमीनों पर हुए कब्जों के खिलाफ लगातार जिले में कार्रवाई चल रही है। कई सौ बीघा जमीन अभी तक कब्जा मुक्त हो चुकी है। जितने भी कब्जे सरकारी जमीनों पर हैं वह मुक्त कराए जाएंगे। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।- कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी, संभल
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