UP: ये है मुरादाबाद का जिला अस्पताल, यहां तो वार्ड बाॅय का का भी करते हैं तीमारदार, पड़ताल में हकीकत आई सामने
मुरादाबाद जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं की तस्वीर सामने आई है। जहां मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर ले जाने की जिम्मेदारी वार्ड बॉय की होने के बावजूद तीमारदारों को ही उठानी पड़ रही है।
विस्तार
मुरादाबाद जिला अस्पताल में तीमारदारों को ही स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर मरीजों को खुद ही ले जाना पड़ रहा है। जबकि यह काम वार्ड बॉय का होता है। शनिवार को इस तरह के कई मामले सामने आए जहां लोग अपने मरीजों को व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर खुद ही ले जाते दिखे।
भाई को व्हीलचेयर पर खुद लेकर आया
जिला अस्पताल में दोपहर 12 बजे संभल के सराय तरीन निवासी सूफियान अपने भाई फरमान को व्हीलचेयर पर बैठाकर वार्ड से बाहर खुद ही लेकर आ रहे थे। उन्होंने बताया कि भाई को खांसी और सांस की समस्या है। चार दिन पहले भाई को यहां पर भर्ती करवाया गया था, लेकिन उपचार के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ।
अब चिकित्सकों ने आगे के उपचार के लिए भाई को दिल्ली रेफर कर दिया है। उन्होंने बताया कि कोई भी वार्ड बॉय व्हीलेचयर लेकर नहीं आता। यहां तक कि एक्स-रे करवाने के लिए भी खुद ही लेकर गए।
वार्ड बॉय बोला...खुद ही लेकर जाना पड़ेगा
कांठ निवासी सोनू ने बताया कि मेरी दादी की कई दिन से तबीयत खराब थी। हीमोग्लोबिन कम होने की वजह से कमजोरी बहुत ज्यादा हो गई। उन्हें उपचार के लिए इमरजेंसी में लेकर आए थे। यहां से उनको उपचार के लिए भर्ती करने के लिए कह दिया है। वार्ड बॉय दूसरे मरीज को स्ट्रेचर पर लेकर आ रहे थे। जब हमने कहा तो बोले कि खुद ही लेकर जाइए। मुझे दूसरा मरीज लाना है।
बुजुर्ग चल नहीं पा रही थीं..व्हील चेयर नहीं मिली
कटघर निवासी आकाश ने बताया कि मेरी दादी के हाथ की हड्डी टूट गई है। उनको उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर आए थे। यहां कर्मचारी कभी हमें 17 नंबर कमरे में भेज देते हैं तो कभी 15 नंबर कमरे के जाने के लिए कह देते हैं। बाद में कहा कि इमरजेंसी में जाकर फाइल बनवा लो। दादी को पैरालाइज भी हो गया था। इसकी वजह से उनको चलने में परेशानी है। व्हीलचेयर हमें मिली नहीं तो खुद ही सहारा देकर ले जा रहे है
मरीजों की सुविधा वाली एक लिफ्ट है खराब
मरीजों को पहली और दूसरी मंजिल पर ले जाने के लिए इमरजेंसी के पास दो लिफ्ट लगाई गई हैं। इसमें एक लिफ्ट दो दिन से खराब है। वहां मौजूद कर्मचारी ने बताया कि लिफ्ट फंस-फंस कर चल रही थी। किसी मरीज को कोई दिक्कत न हो जाए, इसलिए उसे बंद कर दिया गया है।
स्ट्रेचर और व्हीलचेयर लाने-ले जाने के लिए शिफ्टवाइज कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है। वार्ड में भी वार्ड बॉय की ड्यूटी रहती है। कई बार वार्ड बॉय दवाई आदि लेने के लिए जाते हैं। हो सकता है कि तब मरीज खुद लेकर आए हों। अगर कहीं लापरवाही रही होगी तो कार्रवाई की जाएगी। & डॉ. संगीता गुप्ता, सीएमएस
