UP: मुरादाबाद-बिजनौर बने सारस की पसंदीदा पनाहगाह, अमरोहा में चार साल से नहीं दिखा जोड़ा
मंडल में राज्य पक्षी सारस की सबसे अधिक संख्या बिजनौर और मुरादाबाद में है। अमरोहा में पिछले चार वर्षों से एक भी सारस जोड़ा नहीं देखा गया है। वन विभाग 15 और 16 जून को विशेष गणना अभियान चलाएगा।
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उम्र भर जोड़े में रहने वाले राज्य पक्षी सारस को मंडल के मुरादाबाद और बिजनौर जिले खूब भा रहे हैं। मुरादाबाद में सारस की संख्या करीब 50 तो बिजनौर में यहां से तीन गुना यानी 150 है। रामपुर, संभल व अमरोहा में इस पक्षी का बसेरा कम है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अमरोहा में तो पिछले चार साल से सारस का एक भी जोड़ा नहीं देखा गया है।
संभल में 10 से 14 और रामपुर में छह से आठ सारस होने की संभावना है। पुराने आंकड़े भी यहीं बयां कर रहे हैं। इस वर्ष मंडल के जिलों में 15 और 16 जून को सारस की गणना होगी। वन विभाग के मुताबिक गणना के लिए एक ही समय पर अलग-अलग टीमें सारस के अलग-अलग ठिकानों पर जाकर फोटोग्राफी करती हैं।
एक ही समय पर सभी स्थानों के फोटो शूट होने के बाद जीपीएस टैगिंग के साख उनकी गिनती की जाती है। हालांकि अमरोहा में सारस के न मिलने पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सारस मुख्य रूप से नमी वाली जगह (वेटलैंड), दलदली इलाकों, तालाबों, झीलों के पास रहना पसंद करते हैं।
उन्हें अपना घोंसला बनाने और शिकार से बचने के लिए पानी से घिरे सुरक्षित और शांत प्राकृतवास की आवश्यकता होती है। मुरादाबाद मंडल के सभी जिलों में इस तरह के स्थान मिल जाते हैं। विभाग इस बार अमरोहा में अधिक फोकस के साथ सारस की खोज करेगा। विशेषज्ञ बताते हैं कि दुनिया का उड़ने वाले पक्षियों में सारस सबसे लंबा होता है।
पिछले कुछ वर्षों में सभी स्थानों पर सारस की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। उम्मीद है कि इस बार और अच्छे आंकड़े मिलेंगे। अमरोहा में विशेष ध्यान रहेगा। वहां ऐसे स्थानों की खोज की जाएगी, जहां सारस निवास कर सकें। - आदर्श कुमार, मंडलीय वन संरक्षक