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विधानसभा चुनाव: सियासी घरानों में टिकट को लेकर मंथन, बड़े भाई पहुंचे सदन तक, छोटे अब भी इंतजार में
मदन बालियान, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Published by: Dimple Sirohi
Updated Fri, 03 Apr 2026 06:10 PM IST
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सार
मुजफ्फरनगर की सियासत में राजनीतिक परिवारों के भीतर टिकट को लेकर मंथन तेज है। कई घरानों में बड़े नेता पहले ही विधानसभा और संसद तक पहुंच चुके हैं, जबकि छोटे सदस्यों की दावेदारी पर चर्चा जारी है।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। टिकट के दावेदार जनता की नब्ज पकड़ने की जुगत में है। सियासी घरानों में भी ऊहापोह है। इतिहास में बड़े भाई को टिकट मिला और वह दिल्ली-लखनऊ में सदन तक पहुंच गए लेकिन छोटे के हिस्से में आया इंतजार।
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सपा सांसद हरेंद्र मलिक के छोटे बेटे निशांत मलिक की सियासी पारी को लेकर खूब चर्चा होती है। रालोद के बिजनौर सांसद चंदन चौहान को मीरापुर सीट की दावेदारी में पत्नी यशिका और भाई सिद्धार्थ चौहान में से एक नाम तय करने के लिए खूब मंथन करना होगा।
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सपा के सांसद हरेंद्र मलिक ने बड़े बेटे पंकज मलिक को बघरा से सियासत शुरू कराई और अब वह तीन बार के विधायक है। चर्चा शुरू हुई कि छोटे बेटे निशांत मलिक को बुढ़ाना से पहला चुनाव लड़ाया जाएगा और वर्ष 2029 में पंकज मलिक लोकसभा सीट के दावेदार होंगे। अभी तक परिवार ने इस पर अंतिम मुहर नहीं लगाई।
कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल के भाई ललित अग्रवाल अपना कारोबार संभाल रहे हैं। राज्यमंत्री के भांजे को भाजपा संगठन में दायित्व मिला है। पूर्व मंत्री योगराज सिंह के भाई लेखराज सिंह भी सिर्फ भट्ठा उद्योग की राजनीति तक ही सिमट गए। कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार के ममेरे भाई गौरव उर्फ मोनू की सक्रियता भी भविष्य की राजनीति की ओर इशारा करती है।
कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल के भाई ललित अग्रवाल अपना कारोबार संभाल रहे हैं। राज्यमंत्री के भांजे को भाजपा संगठन में दायित्व मिला है। पूर्व मंत्री योगराज सिंह के भाई लेखराज सिंह भी सिर्फ भट्ठा उद्योग की राजनीति तक ही सिमट गए। कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार के ममेरे भाई गौरव उर्फ मोनू की सक्रियता भी भविष्य की राजनीति की ओर इशारा करती है।
सक्रियता में पीछे नहीं पूर्व मंत्री के भाई
पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान के भाई विवेक बालियान मोदीपुरम की सरदार वल्लभ भाई पटेल यूनिवर्सिटी में शिक्षक हैं। चरथावल और बुढ़ाना क्षेत्र के सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी हिस्सेदारी रहती है। विधानसभा के टिकट को लेकर सियासी गलियारों में उनके नाम की चर्चा होती है।
पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान के भाई विवेक बालियान मोदीपुरम की सरदार वल्लभ भाई पटेल यूनिवर्सिटी में शिक्षक हैं। चरथावल और बुढ़ाना क्षेत्र के सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी हिस्सेदारी रहती है। विधानसभा के टिकट को लेकर सियासी गलियारों में उनके नाम की चर्चा होती है।
टिकट को लेकर आमने-सामने आ गए थे गौरव-सौरभ
छह दशक से पश्चिम यूपी की राजनीति में दखल रखने वाले स्वरूप परिवार में दो भाइयों के बीच टिकट को लेकर घमासान हो चुका है। पूर्व मंत्री चितरंजन स्वरूप के बेटे सौरभ स्वरूप बंटी को सपा-रालोद गठबंधन ने शहर सीट से वर्ष 2022 में प्रत्याशी बनाया। नाराज हुए उनके भाई गौरव स्वरूप सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। इसी परिवार के विष्णु स्वरूप 1967 में निर्दलीय विधायक चुने गए थे। 1974 में कांग्रेस के टिकट पर विष्णु स्वरूप के भाई चितरंजन स्वरूप पहली बार विधायक बने थे। परिवार में पहली बार 2022 में टिकट को लेकर मुकाबला हो चुका है।
छह दशक से पश्चिम यूपी की राजनीति में दखल रखने वाले स्वरूप परिवार में दो भाइयों के बीच टिकट को लेकर घमासान हो चुका है। पूर्व मंत्री चितरंजन स्वरूप के बेटे सौरभ स्वरूप बंटी को सपा-रालोद गठबंधन ने शहर सीट से वर्ष 2022 में प्रत्याशी बनाया। नाराज हुए उनके भाई गौरव स्वरूप सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। इसी परिवार के विष्णु स्वरूप 1967 में निर्दलीय विधायक चुने गए थे। 1974 में कांग्रेस के टिकट पर विष्णु स्वरूप के भाई चितरंजन स्वरूप पहली बार विधायक बने थे। परिवार में पहली बार 2022 में टिकट को लेकर मुकाबला हो चुका है।
कादिर राना ने नूरसलीम को आगे बढ़ाया
बसपा के टिकट पर वर्ष 2009 में सांसद चुने गए कादिर राना ने अपने भाई नूर सलीम राना को सियासत में आगे बढ़ाया। चरथावल विधानसभा सीट से 2012 में नूर सलीम चुनाव लड़े और विधायक चुने गए। 2017 में इसी सीट से नूर सलीम चुनाव हारे, 2022 में टिकट नहीं मिला और वर्तमान में वह रालोद में है। जबकि कादिर राना सपा में सक्रिय है।
बसपा के टिकट पर वर्ष 2009 में सांसद चुने गए कादिर राना ने अपने भाई नूर सलीम राना को सियासत में आगे बढ़ाया। चरथावल विधानसभा सीट से 2012 में नूर सलीम चुनाव लड़े और विधायक चुने गए। 2017 में इसी सीट से नूर सलीम चुनाव हारे, 2022 में टिकट नहीं मिला और वर्तमान में वह रालोद में है। जबकि कादिर राना सपा में सक्रिय है।