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Muzaffarnagar News: रोहाना और खाईखेड़ी मिल ने जारी किया बंदी का पहला नोटिस

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2026 12:39 AM IST
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Rohana and Khaikheri mills issued the first closure notice.
खतौली चीनी मिल। संवाद
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अमर उजाला ब्यूरो
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मुजफ्फरनगर। गन्ने की पैदावार कम होने से इस बार पेराई सत्र 15 से 20 दिन पहले खत्म होने की संभावना बढ़ गई है। रोहाना कलां और खाईखेड़ी चीनी मिलों ने बंदी का पहला नोटिस जारी कर दिया है। अन्य चीनी मिल भी नो-केन का संकट झेल रही हैं।
खाईखेड़ी चीनी मिल ने अभी तक करीब 27 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की है। मिल ने पिछला पेराई सत्र नौ अप्रैल तक संचालित किया था लेकिन इस बार गन्ने की पैदावार कम होने के कारण मिल अपनी क्षमता के अनुसार नहीं चल पा रही है। ऐसे में मिल की ओर से बंदी का पहला नोटिस जारी किया गया है। किसानों को इंडेंट जारी किया जा रहा है। संभावना है कि मिल का पेराई सत्र 15 से 20 मार्च के बीच समाप्त हो सकता है। मिल के डीजीएम संजीव कुमार ने इसकी पुष्टि की है। रोहाना चीनी मिल ने पिछला पेराई सत्र 22 अप्रैल तक चलाया था लेकिन इस बार मार्च की शुरुआत में ही संकट खड़ा हो गया है।
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-- इस तरह पेराई किया गया गन्ना
चीनी मिल पेराई/लाख क्विंटल
खतौली 170.47
तितावी 111.45
बुढ़ाना 86.13
मंसूरपुर 96.80
टिकौला 121.25
खाईखेड़ी 41.82
रोहाना 26.10
मोरना 31.51
-- भुगतान में सबसे पीछे भैसाना मिल
बुढ़ाना में बजाज ग्रुप की भैसाना चीनी मिल भुगतान में सबसे पीछे है। चीनी मिल की ओर से अभी तक करीब 35.28 प्रतिशत भुगतान ही किया गया है। जबकि मिल गन्ने की पेराई में जिले पांचवें स्थान पर चल रही हैं। टिकौला, मंसूरपुर और खतौली चीनी मिल भुगतान में सबसे आगे चल रही हैं।
- नई प्रजातियों का बढ़ा रकबा, 0238 में रोग
इस बार 28 हजार 800 हेक्टेयर में गन्ने की चार नई प्रजातियों की बुवाई की गई थी। नई प्रजातियां भी किसानों का साथ नहीं दे पाई। भाकियू अराजनैतिक के प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक का कहना है कि किसानों को बेहतर प्रजाति की आवश्यकता है।
-- मौसम ने बढ़ाई चिंता, गन्ने के बाद गेहूं पर संकट
फोटो
बुढ़ाना मोड़। गन्ने के बाद अब मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गेहूं की फसल को लेकर किसान परेशान हैं। मौसम में तेजी से हुए बदलाव के कारण दिन का तापमान 31 डिग्री तक पहुंच गया है। जबकि पिछले साल इन दिनों में तापमान करीब 28 डिग्री के आसपास चल रहा था। तीन से चार डिग्री का अंतर गेहूं के लिए खतरा बन सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया वर्तमान समय में बढ़ते तापमान के कारण गेहूं की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। अगर तापमान इसी तरह से बढ़ता रहा तो गेहूं की फसल में उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, गेहूं की बालियों में दाना भरते समय दूध की अवस्था में हल्की सिंचाई करते रहे और खेत में नमी बनाए रखें, तेज हवाओं के दौरान खेत की सिंचाई न करें।
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