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Muzaffarnagar News: लोकतंत्र का सबसे बड़ा खतरा पुलिस स्टेट न्याय की चौखट पर पद नहीं, प्रमाण का सम्मान
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मुजफ्फरनगर। छपार में तीन साल पहले ट्रक चालक गुलवीर शर्मा पर जानलेवा हमले के मामले में मेरठ के दो अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया गया।
अदालत ने जांच और पर्यवेक्षण में लापरवाही पर विवेचक एसआई नरेंद्र कुमार, तत्कालीन एसओ मुकेश कुमार और सीओ यतेंद्र नागर की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र लिखा।
फैसले में लिखा कि न्याय की चौखट पर पद का नहीं, प्रमाण का सम्मान होता है। वर्दी का सम्मान तब तक है, जब तक वह संविधान की मर्यादा में बंधी रहे। लोकतंत्र को सबसे बड़ा खतरा पुलिस स्टेट से ही होता है।
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मामला 16 अगस्त 2023 का है। बिहार से ट्रक लेकर लक्सर जा रहे बुलंदशहर के मंडोना निवासी क्लीनर मंजीत और चालक गुलवीर शर्मा सिसोना स्थित पेट्रोल पंप पर रुककर खाना बनाने लगे। रात करीब साढ़े आठ बजे दो हमलावर पहुंचे लूट के लिए ट्रक का केबिन खुलवाने का प्रयास किया। विरोध करने पर तमंचे से गोली चला दी, जिसमें गुलवीर घायल हो गया था।
वादी मंजीत की ओर से अज्ञात में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने 25 अगस्त को बिजोपुरा कट से मेरठ के भावनपुर थाना क्षेत्र के पचपेड़ा निवासी शराफत एवं तारापुरी निवासी आसिफ को गिरफ्तार कर खुलासा कर दिया।
दोनों के खिलाफ 23 फरवरी 2024 को आरोप तय हुए। अभियोजन पक्ष आरोप को साबित नहीं कर सका। ट्रायल के दौरान पुलिस जांच में खामियां मिलीं। अभियुक्तों की पहचान परेड नहीं कराई गई।
ट्रक के केबिन में गोली के निशान नहीं थे, पुलिस ने खोखा-कारतूस बरामद नहीं किए। बरामद छुरी पर दो साल बाद भी धार दिखी। आरोपपत्र पर सीओ के लघु हस्ताक्षर थे और नाम भी नहीं लिखा गया था। पेट्रोल पंप पर सीसीटीवी से भी अभियुक्तों की पहचान नहीं हुई थी।
पीड़ितों के अलावा गवाहों ने पहचान से इन्कार कर दिया। अदालत ने माना कि केस को वर्कआउट करने के चक्कर में अभियुक्तों को जेल भेज दिया गया। जमानत पर चल रहा अभियुक्त आसिफ और जिला कारागार से अभियुक्त शराफत को पुलिस ने शनिवार को न्यायालय में पेश किया। साक्ष्य के अभाव में दोनों को जानलेवा हमले और आर्म्स एक्ट में दोषमुक्त करार दिया है।
एसएसपी को भेज पत्र में लिखा कि पुलिस को सचेत करें कि पर्यवेक्षण अधिकारी पेशी क्लर्क के भरोसे न रहें।
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अदालत ने जांच और पर्यवेक्षण में लापरवाही पर विवेचक एसआई नरेंद्र कुमार, तत्कालीन एसओ मुकेश कुमार और सीओ यतेंद्र नागर की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र लिखा।
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फैसले में लिखा कि न्याय की चौखट पर पद का नहीं, प्रमाण का सम्मान होता है। वर्दी का सम्मान तब तक है, जब तक वह संविधान की मर्यादा में बंधी रहे। लोकतंत्र को सबसे बड़ा खतरा पुलिस स्टेट से ही होता है।
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मामला 16 अगस्त 2023 का है। बिहार से ट्रक लेकर लक्सर जा रहे बुलंदशहर के मंडोना निवासी क्लीनर मंजीत और चालक गुलवीर शर्मा सिसोना स्थित पेट्रोल पंप पर रुककर खाना बनाने लगे। रात करीब साढ़े आठ बजे दो हमलावर पहुंचे लूट के लिए ट्रक का केबिन खुलवाने का प्रयास किया। विरोध करने पर तमंचे से गोली चला दी, जिसमें गुलवीर घायल हो गया था।
वादी मंजीत की ओर से अज्ञात में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने 25 अगस्त को बिजोपुरा कट से मेरठ के भावनपुर थाना क्षेत्र के पचपेड़ा निवासी शराफत एवं तारापुरी निवासी आसिफ को गिरफ्तार कर खुलासा कर दिया।
दोनों के खिलाफ 23 फरवरी 2024 को आरोप तय हुए। अभियोजन पक्ष आरोप को साबित नहीं कर सका। ट्रायल के दौरान पुलिस जांच में खामियां मिलीं। अभियुक्तों की पहचान परेड नहीं कराई गई।
ट्रक के केबिन में गोली के निशान नहीं थे, पुलिस ने खोखा-कारतूस बरामद नहीं किए। बरामद छुरी पर दो साल बाद भी धार दिखी। आरोपपत्र पर सीओ के लघु हस्ताक्षर थे और नाम भी नहीं लिखा गया था। पेट्रोल पंप पर सीसीटीवी से भी अभियुक्तों की पहचान नहीं हुई थी।
पीड़ितों के अलावा गवाहों ने पहचान से इन्कार कर दिया। अदालत ने माना कि केस को वर्कआउट करने के चक्कर में अभियुक्तों को जेल भेज दिया गया। जमानत पर चल रहा अभियुक्त आसिफ और जिला कारागार से अभियुक्त शराफत को पुलिस ने शनिवार को न्यायालय में पेश किया। साक्ष्य के अभाव में दोनों को जानलेवा हमले और आर्म्स एक्ट में दोषमुक्त करार दिया है।
एसएसपी को भेज पत्र में लिखा कि पुलिस को सचेत करें कि पर्यवेक्षण अधिकारी पेशी क्लर्क के भरोसे न रहें।