फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   The greatest threat to democracy is a police state; at the threshold of justice, it is evidence, not position, that commands respect.

Muzaffarnagar News: लोकतंत्र का सबसे बड़ा खतरा पुलिस स्टेट न्याय की चौखट पर पद नहीं, प्रमाण का सम्मान

Sun, 26 Jul 2026 12:59 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2026 12:59 AM IST
विज्ञापन
The greatest threat to democracy is a police state; at the threshold of justice, it is evidence, not position, that commands respect.
मुजफ्फरनगर। छपार में तीन साल पहले ट्रक चालक गुलवीर शर्मा पर जानलेवा हमले के मामले में मेरठ के दो अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया गया।
विज्ञापन

अदालत ने जांच और पर्यवेक्षण में लापरवाही पर विवेचक एसआई नरेंद्र कुमार, तत्कालीन एसओ मुकेश कुमार और सीओ यतेंद्र नागर की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र लिखा।
विज्ञापन

फैसले में लिखा कि न्याय की चौखट पर पद का नहीं, प्रमाण का सम्मान होता है। वर्दी का सम्मान तब तक है, जब तक वह संविधान की मर्यादा में बंधी रहे। लोकतंत्र को सबसे बड़ा खतरा पुलिस स्टेट से ही होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मामला 16 अगस्त 2023 का है। बिहार से ट्रक लेकर लक्सर जा रहे बुलंदशहर के मंडोना निवासी क्लीनर मंजीत और चालक गुलवीर शर्मा सिसोना स्थित पेट्रोल पंप पर रुककर खाना बनाने लगे। रात करीब साढ़े आठ बजे दो हमलावर पहुंचे लूट के लिए ट्रक का केबिन खुलवाने का प्रयास किया। विरोध करने पर तमंचे से गोली चला दी, जिसमें गुलवीर घायल हो गया था।
वादी मंजीत की ओर से अज्ञात में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने 25 अगस्त को बिजोपुरा कट से मेरठ के भावनपुर थाना क्षेत्र के पचपेड़ा निवासी शराफत एवं तारापुरी निवासी आसिफ को गिरफ्तार कर खुलासा कर दिया।
दोनों के खिलाफ 23 फरवरी 2024 को आरोप तय हुए। अभियोजन पक्ष आरोप को साबित नहीं कर सका। ट्रायल के दौरान पुलिस जांच में खामियां मिलीं। अभियुक्तों की पहचान परेड नहीं कराई गई।
ट्रक के केबिन में गोली के निशान नहीं थे, पुलिस ने खोखा-कारतूस बरामद नहीं किए। बरामद छुरी पर दो साल बाद भी धार दिखी। आरोपपत्र पर सीओ के लघु हस्ताक्षर थे और नाम भी नहीं लिखा गया था। पेट्रोल पंप पर सीसीटीवी से भी अभियुक्तों की पहचान नहीं हुई थी।

पीड़ितों के अलावा गवाहों ने पहचान से इन्कार कर दिया। अदालत ने माना कि केस को वर्कआउट करने के चक्कर में अभियुक्तों को जेल भेज दिया गया। जमानत पर चल रहा अभियुक्त आसिफ और जिला कारागार से अभियुक्त शराफत को पुलिस ने शनिवार को न्यायालय में पेश किया। साक्ष्य के अभाव में दोनों को जानलेवा हमले और आर्म्स एक्ट में दोषमुक्त करार दिया है।
एसएसपी को भेज पत्र में लिखा कि पुलिस को सचेत करें कि पर्यवेक्षण अधिकारी पेशी क्लर्क के भरोसे न रहें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed