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UP: दो आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी, अदालत ने कहा- लोकतंत्र को सबसे बड़ा खतरा पुलिस स्टेट से

Sun, 26 Jul 2026 11:27 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 26 Jul 2026 11:27 AM IST
सार

मुजफ्फरनगर के छपार में तीन साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में दो आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी हो गए। अदालत ने पुलिस जांच में गंभीर खामियां मिलने पर विवेचक और अधिकारियों की जांच के लिए गृह विभाग को पत्र लिखा।

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Two Accused Acquitted in Attempted Murder Case for Lack of Evidence; Court Warns Against Police State
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुजफ्फरनगर जनपद केछपार में तीन साल पहले ट्रक चालक गुलवीर शर्मा पर जानलेवा हमले के मामले में मेरठ के दो अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया गया। फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने जांच और पर्यवेक्षण में लापरवाही पर विवेचक एसआई नरेंद्र कुमार, तत्कालीन एसओ मुकेश कुमार और सीओ यतेंद्र नागर की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र लिखा। 

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फैसले में लिखा कि न्याय की चौखट पर पद का नहीं, प्रमाण का सम्मान होता है। वर्दी का सम्मान तब तक है, जब तक वह संविधान की मर्यादा में बंधी रहे। लोकतंत्र को सबसे बड़ा खतरा पुलिस स्टेट से ही होता है। 

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मामला 16 अगस्त 2023 का है। बिहार से ट्रक लेकर लक्सर जा रहे बुलंदशहर के मंडोना निवासी क्लीनर मंजीत और चालक गुलवीर शर्मा सिसोना स्थित पेट्रोल पंप पर रुककर खाना बनाने लगे। रात करीब साढ़े आठ बजे दो हमलावर पहुंचे लूट के लिए ट्रक का केबिन खुलवाने का प्रयास किया। विरोध करने पर तमंचे से गोली चला दी, जिसमें गुलवीर घायल हो गया था।

वादी मंजीत की ओर से अज्ञात में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने 25 अगस्त को बिजोपुरा कट से मेरठ के भावनपुर थाना क्षेत्र के पचपेड़ा निवासी शराफत एवं तारापुरी निवासी आसिफ को गिरफ्तार कर खुलासा कर दिया।
दोनों के खिलाफ 23 फरवरी 2024 को आरोप तय हुए। अभियोजन पक्ष आरोप को साबित नहीं कर सका। ट्रायल के दौरान पुलिस जांच में खामियां मिलीं।

अभियुक्तों की पहचान परेड नहीं कराई गई। ट्रक के केबिन में गोली के निशान नहीं थे, पुलिस ने खोखा-कारतूस बरामद नहीं किए। बरामद छुरी पर दो साल बाद भी धार दिखी। आरोपपत्र पर सीओ के लघु हस्ताक्षर थे और नाम भी नहीं लिखा गया था। पेट्रोल पंप पर सीसीटीवी से भी अभियुक्तों की पहचान नहीं हुई थी।

पीड़ितों के अलावा गवाहों ने पहचान से इन्कार कर दिया। अदालत ने माना कि केस को वर्कआउट करने के चक्कर में अभियुक्तों को जेल भेज दिया गया। जमानत पर चल रहा अभियुक्त आसिफ और जिला कारागार से अभियुक्त शराफत को पुलिस ने शनिवार को न्यायालय में पेश किया। साक्ष्य के अभाव में दोनों को जानलेवा हमले और आर्म्स एक्ट में दोषमुक्त करार दिया है। एसएसपी को भेज पत्र में लिखा कि पुलिस को सचेत करें कि पर्यवेक्षण अधिकारी पेशी क्लर्क के भरोसे न रहें।

न्याय के मंदिर की नींव कमजोर करने का प्रयास : अदालत
अदालत ने लिखा कि यदि विवेचना एजेंसी स्वयं बेकसूर को झूठे अभियोग में फंसाती है, ऐसे मामलों में न्यायालय का मौन रहना न्याय के उद्देश्य को विफल कर देगा। वर्दी सत्य की संरक्षक है, यदि वह असत्य का सहारा बन जाए तो सबसे गहरी चोट किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था के विश्वास पर पड़ती है। न्यायालय का धर्म विश्वास की रक्षा करना है। जब सत्य की राह छोड़कर विवेचना कल्पना रूप ले लेती है, तब न्यायालय का मौन अन्याय का सबसे बड़ा सहायक बन जाता है। बेकसूर को अभियुक्त बना देना केवल व्यक्ति के विरुद्ध अन्याय नहीं, बल्कि न्याय के मंदिर की नींव कमजोर करने का प्रयास है। न्यायालय का दायित्व है कि वह सत्य के दीप को प्रज्ज्वलित रखें, ताकि किसी निर्दोष का जीवन झूठे अभियोगों के अंधकार में न डूबे।
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