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Pilibhit News: आरोपी इलहाम से दूसरे दिन भी हुई पूछताछ, बढ़ा जांच का दायरा
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एएसपी ने की पूरे मामले की समीक्षा, बैंक खातों और ट्रांजेक्शन की पड़ताल की तेज
पीलीभीत। डीआईओएस कार्यालय से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। मामले में आरोपी लिपिक इलहाम शम्सी को लगातार दूसरे दिन शनिवार को कोतवाली बुलाकर गहन पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान सामने आए नए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है।
फरवरी माह में सामने आए डीआईओएस कार्यालय में एक करोड़ के संदिग्ध लेनदेन के मामले में डीआईओएस की ओर से कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसमें मुख्य आरोपी चपरासी इल्हाम शम्सी और उसकी पत्नी अर्शी खातून को नामजद किया गया था। रिपोर्ट दर्ज होने के कुछ दिन बाद ही अर्शी को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेजा था। वहीं, पकड़ से दूर रहे इल्हाम शम्सी को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी।
विवेचना को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने मामले में जांच की तो पता चला कि आरोपी ने बरेली के दो होम प्लान कंपनियों में करीब तीन करोड़ रुपये निवेश किए थे। इस मामले में कार्रवाई के बाद पुलिस विवेचना कर रही है। कोतवाली के इंस्पेक्टर क्राइम सतीश कुमार ने आरोपी इलहाम को लगातार दूसरे दिन शुक्रवार को भी कोतवाली बुलाकर घंटों पूछताछ की। इस दौरान उसके बैंक खातों में हुए लेनदेन, फ्रीज की गई धनराशि, संदिग्ध ट्रांजेक्शन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की गहराई से जांच की गई। विवेचक ने आरोपी से कई अहम सवाल पूछे और उसके जवाबों को विधिवत रिकॉर्ड किया।
कुछ नए और महत्वपूर्ण तथ्य आए सामने
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान कुछ नए और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। इनके आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एएसपी विक्रम दहिया भी कोतवाली पहुंचे और उन्होंने सीधे आरोपी से बातचीत कर कई बिंदुओं पर जानकारी जुटाई। साथ ही विवेचक से जांच की प्रगति रिपोर्ट लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। संवाद
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घोटाले के पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटी
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी और उसके करीबियों के करीब 38 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। इन खातों में तीन करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन सामने आया है। अब पुलिस इन ट्रांजेक्शन की कड़ियों को जोड़कर घोटाले के पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटी है।
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कई अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जारी
इस पूरे मामले में डीआईओएस कार्यालय में तैनात रहे कई डीआईओएस, वित्त एवं लेखा अधिकारी और कोषागार के भी अधिकारियों की भूमिका जगजाहिर हुई थी। पुलिस अब मुख्य आरोपी से सवाल जवाब के बाद सामने आ रहे तथ्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। माना जा रहा है कि कई अधिकारी भी जांच के दायरे में शामिल किए जा सकते हैं।
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पीलीभीत। डीआईओएस कार्यालय से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। मामले में आरोपी लिपिक इलहाम शम्सी को लगातार दूसरे दिन शनिवार को कोतवाली बुलाकर गहन पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान सामने आए नए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है।
फरवरी माह में सामने आए डीआईओएस कार्यालय में एक करोड़ के संदिग्ध लेनदेन के मामले में डीआईओएस की ओर से कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसमें मुख्य आरोपी चपरासी इल्हाम शम्सी और उसकी पत्नी अर्शी खातून को नामजद किया गया था। रिपोर्ट दर्ज होने के कुछ दिन बाद ही अर्शी को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेजा था। वहीं, पकड़ से दूर रहे इल्हाम शम्सी को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी।
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विवेचना को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने मामले में जांच की तो पता चला कि आरोपी ने बरेली के दो होम प्लान कंपनियों में करीब तीन करोड़ रुपये निवेश किए थे। इस मामले में कार्रवाई के बाद पुलिस विवेचना कर रही है। कोतवाली के इंस्पेक्टर क्राइम सतीश कुमार ने आरोपी इलहाम को लगातार दूसरे दिन शुक्रवार को भी कोतवाली बुलाकर घंटों पूछताछ की। इस दौरान उसके बैंक खातों में हुए लेनदेन, फ्रीज की गई धनराशि, संदिग्ध ट्रांजेक्शन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की गहराई से जांच की गई। विवेचक ने आरोपी से कई अहम सवाल पूछे और उसके जवाबों को विधिवत रिकॉर्ड किया।
कुछ नए और महत्वपूर्ण तथ्य आए सामने
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान कुछ नए और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। इनके आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एएसपी विक्रम दहिया भी कोतवाली पहुंचे और उन्होंने सीधे आरोपी से बातचीत कर कई बिंदुओं पर जानकारी जुटाई। साथ ही विवेचक से जांच की प्रगति रिपोर्ट लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। संवाद
घोटाले के पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटी
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी और उसके करीबियों के करीब 38 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। इन खातों में तीन करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन सामने आया है। अब पुलिस इन ट्रांजेक्शन की कड़ियों को जोड़कर घोटाले के पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटी है।
कई अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जारी
इस पूरे मामले में डीआईओएस कार्यालय में तैनात रहे कई डीआईओएस, वित्त एवं लेखा अधिकारी और कोषागार के भी अधिकारियों की भूमिका जगजाहिर हुई थी। पुलिस अब मुख्य आरोपी से सवाल जवाब के बाद सामने आ रहे तथ्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। माना जा रहा है कि कई अधिकारी भी जांच के दायरे में शामिल किए जा सकते हैं।