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Pilibhit News: तीन मशीनों से जिलेभर में फॉगिंग का दावा, खुद का टेक्नीशियन तक नहीं
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शहर के मलेरिया विभाग मुख्यालय पर रखी फॉगिंग मशीन। संवाद
- फोटो : Samvad
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संचारी रोग नियंत्रण अभियान को लेकर चल रही खानापूरी, कहीं लापरवाही बिगाड़ न दे हालात
पीलीभीत। मलेरिया विभाग में संसाधन व सेवाओं की कमी से संचारी रोग नियंत्रण अभियान की हकीकत धरातल पर खोखली सी नजर आ रही है। तीन साल पुरानी तीन फॉगिंग मशीनों के सहारे मलेरिया विभाग हॉटस्पॉट चयनित क्षेत्रों सहित जिले के अन्य स्थानों पर फॉगिंग करने का दावा कर रहा है, जबकि मलेरिया विभाग में मुख्यालय पर जांच सैंपल के लिए खुद का टेक्नीशियन तक नहीं है। इससे मलेरिया विभाग में डेंगू, फायलेरिया जांच कराने आ रहे मरीजों की जांच तक संभव नहीं हो पा रही है।
एक अप्रैल से डेंगू, मलेरिया, फायलेरिया सहित अन्य संक्रमित बीमारी से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से मलेरिया विभाग शाखा के नेतृत्व में अन्य दस विभागों को शामिल करते हुए संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। पंचायती राज से लेकर नगर निकाय स्तर पर साफ-सफाई आदि की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर खुद नोडल विभाग मलेरिया ही संचारी रोग नियंत्रण अभियान के नाम पर खानापूरी कर रहा है।
तीन सालों से मशीनों की खरीद नहीं
विभाग पर अभियान से संबंधित जिलेभर में फॉगिंग के लिए सिर्फ तीन मशीन ही उपलब्ध है। यहां तीन साल से अन्य मशीनें नहीं खरीदी गई हैं। मुख्यालय पर स्थिति यह है कि मलेरिया के किट से मलेरिया की जांच तो संभव है, लेकिन टेक्नीशियन के अभाव में डेंगू, फायलेरिया आदि की जांच तक नहीं हो पाती। मुख्यालय पर वर्तमान में मलेरिया किट की उपलब्धता तक नहीं है। संवाद
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2025-26 में हुई 1.88 लाख मलेरिया किट की खपत, मुख्यालय पर स्टॉक निल
2025-26 में मलेरिया विभाग का दावा है कि उन्होनें सीएचसी, पीएचसी व एएनएम स्तर से 1.88 लाख मलेरिया किटों का प्रयोग करते हुए लोगों की मलेरिया जांच की। वहीं, अब कॉर्पोरेशन की ओर से सीएचसी, पीएचसी पर 90 हजार मलेरिया किटें जिलेभर में उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं, वर्तमान में मलेरिया विभाग के मुख्यालय पर खुद का स्टॉक तक नहीं है।
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मलेरिया किट की उपलब्धता शासन व कॉर्पोरेशन की ओर से होती है। समय-समय पर केस आने के बाद टीम गांव में भ्रमण कर फॉगिंग मशीन से दवा, एंटी लार्वा आदि छिड़काव करती है।
- पंकज द्विवेदी, जिला मलेरिया अधिकारी
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पीलीभीत। मलेरिया विभाग में संसाधन व सेवाओं की कमी से संचारी रोग नियंत्रण अभियान की हकीकत धरातल पर खोखली सी नजर आ रही है। तीन साल पुरानी तीन फॉगिंग मशीनों के सहारे मलेरिया विभाग हॉटस्पॉट चयनित क्षेत्रों सहित जिले के अन्य स्थानों पर फॉगिंग करने का दावा कर रहा है, जबकि मलेरिया विभाग में मुख्यालय पर जांच सैंपल के लिए खुद का टेक्नीशियन तक नहीं है। इससे मलेरिया विभाग में डेंगू, फायलेरिया जांच कराने आ रहे मरीजों की जांच तक संभव नहीं हो पा रही है।
एक अप्रैल से डेंगू, मलेरिया, फायलेरिया सहित अन्य संक्रमित बीमारी से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से मलेरिया विभाग शाखा के नेतृत्व में अन्य दस विभागों को शामिल करते हुए संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। पंचायती राज से लेकर नगर निकाय स्तर पर साफ-सफाई आदि की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर खुद नोडल विभाग मलेरिया ही संचारी रोग नियंत्रण अभियान के नाम पर खानापूरी कर रहा है।
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तीन सालों से मशीनों की खरीद नहीं
विभाग पर अभियान से संबंधित जिलेभर में फॉगिंग के लिए सिर्फ तीन मशीन ही उपलब्ध है। यहां तीन साल से अन्य मशीनें नहीं खरीदी गई हैं। मुख्यालय पर स्थिति यह है कि मलेरिया के किट से मलेरिया की जांच तो संभव है, लेकिन टेक्नीशियन के अभाव में डेंगू, फायलेरिया आदि की जांच तक नहीं हो पाती। मुख्यालय पर वर्तमान में मलेरिया किट की उपलब्धता तक नहीं है। संवाद
2025-26 में हुई 1.88 लाख मलेरिया किट की खपत, मुख्यालय पर स्टॉक निल
2025-26 में मलेरिया विभाग का दावा है कि उन्होनें सीएचसी, पीएचसी व एएनएम स्तर से 1.88 लाख मलेरिया किटों का प्रयोग करते हुए लोगों की मलेरिया जांच की। वहीं, अब कॉर्पोरेशन की ओर से सीएचसी, पीएचसी पर 90 हजार मलेरिया किटें जिलेभर में उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं, वर्तमान में मलेरिया विभाग के मुख्यालय पर खुद का स्टॉक तक नहीं है।
मलेरिया किट की उपलब्धता शासन व कॉर्पोरेशन की ओर से होती है। समय-समय पर केस आने के बाद टीम गांव में भ्रमण कर फॉगिंग मशीन से दवा, एंटी लार्वा आदि छिड़काव करती है।
- पंकज द्विवेदी, जिला मलेरिया अधिकारी