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Pilibhit News: प्रसूता की मौत प्रकरण में 12 अगस्त को दर्ज होंगे वादी के बयान
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पीलीभीत। जिला महिला अस्पताल में डिलीवरी के बाद प्रसूता की मौत के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने वादी की अर्जी को परिवाद के रूप में दर्ज करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने मामले में तथ्यों की न्यायिक जांच आवश्यक मानते हुए वादी के बयान दर्ज करने के लिए 12 अगस्त की तारीख तय की है।
पूरनपुर कस्बा निवासी सुरेंद्र वर्मा ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके भट्ट, सर्जन डॉ. रूपल खरे और चार अन्य नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था। वादी का आरोप है कि उसकी पत्नी हर्षवती को एक मई को सीएचसी पूरनपुर से जिला महिला अस्पताल रेफर किया गया था। दो मई की रात ऑपरेशन के बाद डॉक्टर और स्टाफ ने सुविधा शुल्क के नाम पर 25 हजार रुपये की मांग की। आरोप है कि पांच हजार रुपये देने के बावजूद शेष रकम न मिलने पर समुचित उपचार नहीं किया गया। हालत बिगड़ने के बाद भी समय पर रेफर या डिस्चार्ज नहीं किया गया। इससे तीन मई को उसकी पत्नी की मौत हो गई।
वादी ने प्रार्थना पत्र में कहा कि घटना की शिकायत डीएम, एसपी, सीएमओ समेत अन्य अधिकारियों से की गई, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई और न ही कोई प्रभावी कार्रवाई की गई। इसके बाद न्यायालय की शरण ली गई। उधर, अस्पताल प्रशासन की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही से इन्कार किया है।
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समिति के अनुसार, मरीज को समय पर ऑपरेशन और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया था। उसकी मृत्यु कार्डियक अरेस्ट से उत्पन्न शॉक के कारण हुई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अस्पताल में मातृ एवं शिशु सेवाएं पूरी तरह निशुल्क हैं। किसी प्रकार की धनराशि नहीं मांगी गई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संबंधित थाना पुलिस से आख्या तलब करने के बाद दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन किया। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामले में न्यायिक जांच की आवश्यकता मानते हुए प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही वादी के बयान दर्ज करने के लिए 12 अगस्त की तिथि नीयत की है। संवाद
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पूरनपुर कस्बा निवासी सुरेंद्र वर्मा ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके भट्ट, सर्जन डॉ. रूपल खरे और चार अन्य नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था। वादी का आरोप है कि उसकी पत्नी हर्षवती को एक मई को सीएचसी पूरनपुर से जिला महिला अस्पताल रेफर किया गया था। दो मई की रात ऑपरेशन के बाद डॉक्टर और स्टाफ ने सुविधा शुल्क के नाम पर 25 हजार रुपये की मांग की। आरोप है कि पांच हजार रुपये देने के बावजूद शेष रकम न मिलने पर समुचित उपचार नहीं किया गया। हालत बिगड़ने के बाद भी समय पर रेफर या डिस्चार्ज नहीं किया गया। इससे तीन मई को उसकी पत्नी की मौत हो गई।
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वादी ने प्रार्थना पत्र में कहा कि घटना की शिकायत डीएम, एसपी, सीएमओ समेत अन्य अधिकारियों से की गई, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई और न ही कोई प्रभावी कार्रवाई की गई। इसके बाद न्यायालय की शरण ली गई। उधर, अस्पताल प्रशासन की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही से इन्कार किया है।
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समिति के अनुसार, मरीज को समय पर ऑपरेशन और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया था। उसकी मृत्यु कार्डियक अरेस्ट से उत्पन्न शॉक के कारण हुई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अस्पताल में मातृ एवं शिशु सेवाएं पूरी तरह निशुल्क हैं। किसी प्रकार की धनराशि नहीं मांगी गई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संबंधित थाना पुलिस से आख्या तलब करने के बाद दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन किया। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामले में न्यायिक जांच की आवश्यकता मानते हुए प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही वादी के बयान दर्ज करने के लिए 12 अगस्त की तिथि नीयत की है। संवाद