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ओडीओसी योजना : पारंपरिक स्वाद से बनेगी जिले की पहचान, खुलेंगे नए अवसर
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पारंपरिक हलवाई, डेयरी कारोबारियों को आवेदन पर मिलेगा 50 लाख तक का अनुदान, अभियान चलाएगा विभाग, देश-विदेश के मेलों में स्टॉल लगाने से लेकर हवाई यात्रा तक का खर्च होगा वहन
पीलीभीत। तराई की धरती अब केवल बांसुरी, धान और टाइगर रिजर्व के लिए ही नहीं, बल्कि अपने पारंपरिक स्वाद के लिए भी देश और दुनिया में नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रही है। इससे पारंपरिक हलवाई, डेयरी कारोबारियों व उद्यमियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
प्रदेश सरकार ने एक जिला-एक व्यंजन (वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूजीन-ओडीओसी) योजना के तहत पीलीभीत की जलेबी, लस्सी, संदेश और लौज सहित खोआ आधारित मिठाइयों को जिले के आधिकारिक पारंपरिक व्यंजन के रूप में चयनित किया है। जिला उद्योग अधिकारी आशीष गुप्ता ने बताया कि योजना के तहत इन व्यंजनों से जुड़े उद्योग, सेवा और व्यवसाय स्थापित करने वाले उद्यमियों को आकर्षक वित्तीय सहायता मिलेगी। इस योजना से ज्यादा से ज्यादा व्यापारियों को जोड़ने के लिए विभाग की तरफ से व्यापारियों के साथ बैठकें भी की जाएंगी। इसके साथ ही जागरूकता कार्यक्रम भी होंगे।
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सरकार की ओर से 25 लाख रुपये तक की परियोजनाओं पर कुल लागत का 25 प्रतिशत, अधिकतम 6.25 लाख रुपये मार्जिन मनी के रूप में दिया जाएगा। वहीं, 25 लाख से 1.50 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं पर परियोजना लागत का 10 प्रतिशत, अधिकतम 50 लाख रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। इससे नए उद्यमियों के साथ-साथ पहले से मिठाई और डेयरी कारोबार से जुड़े लोगों को भी अपने व्यवसाय का विस्तार करने में मदद मिलेगी।
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होना आवश्यक है। किसी प्रकार की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता निर्धारित नहीं की गई है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, ट्रांसजेंडर व दिव्यांगजन को विशेष श्रेणी में शामिल करते हुए उन्हें प्राथमिकता का लाभ मिलेगा। बैंक से ऋण स्वीकृत होने के बाद नए लाभार्थियों को प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से उद्यमिता एवं व्यवसाय संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
बल्कि विपणन और ब्रांडिंग पर भी मिलेगी मदद
योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि सरकार केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विपणन और ब्रांडिंग पर भी विशेष ध्यान देगी। स्थानीय और राज्य स्तरीय मेलों में भाग लेने वाले उद्यमियों को स्टॉल शुल्क का 75 प्रतिशत, अधिकतम 60 हजार रुपये तक का अनुदान मिलेगा। उत्पादों की ढुलाई पर 25 हजार रुपये तक की सहायता भी दी जाएगी। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मेलों में प्रतिभाग करने पर एक लाख रुपये तक स्टॉल शुल्क व परिवहन व्यय की भी सहायता मिलेगी।
यदि कोई उद्यमी प्रदेश के बाहर आयोजित राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लेता है, तो उसे स्टॉल शुल्क पर 1.50 लाख रुपये तक, उत्पादों की ढुलाई पर 75 हजार रुपये तक व हवाई यात्रा के लिए निर्धारित सीमा तक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। एक वित्तीय वर्ष में किसी भी इकाई या उद्यमी को तीन बार तक इस सुविधा का लाभ दिया जा सकेगा। संवाद
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पीलीभीत। तराई की धरती अब केवल बांसुरी, धान और टाइगर रिजर्व के लिए ही नहीं, बल्कि अपने पारंपरिक स्वाद के लिए भी देश और दुनिया में नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रही है। इससे पारंपरिक हलवाई, डेयरी कारोबारियों व उद्यमियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
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प्रदेश सरकार ने एक जिला-एक व्यंजन (वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूजीन-ओडीओसी) योजना के तहत पीलीभीत की जलेबी, लस्सी, संदेश और लौज सहित खोआ आधारित मिठाइयों को जिले के आधिकारिक पारंपरिक व्यंजन के रूप में चयनित किया है। जिला उद्योग अधिकारी आशीष गुप्ता ने बताया कि योजना के तहत इन व्यंजनों से जुड़े उद्योग, सेवा और व्यवसाय स्थापित करने वाले उद्यमियों को आकर्षक वित्तीय सहायता मिलेगी। इस योजना से ज्यादा से ज्यादा व्यापारियों को जोड़ने के लिए विभाग की तरफ से व्यापारियों के साथ बैठकें भी की जाएंगी। इसके साथ ही जागरूकता कार्यक्रम भी होंगे।
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सरकार की ओर से 25 लाख रुपये तक की परियोजनाओं पर कुल लागत का 25 प्रतिशत, अधिकतम 6.25 लाख रुपये मार्जिन मनी के रूप में दिया जाएगा। वहीं, 25 लाख से 1.50 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं पर परियोजना लागत का 10 प्रतिशत, अधिकतम 50 लाख रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। इससे नए उद्यमियों के साथ-साथ पहले से मिठाई और डेयरी कारोबार से जुड़े लोगों को भी अपने व्यवसाय का विस्तार करने में मदद मिलेगी।
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होना आवश्यक है। किसी प्रकार की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता निर्धारित नहीं की गई है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, ट्रांसजेंडर व दिव्यांगजन को विशेष श्रेणी में शामिल करते हुए उन्हें प्राथमिकता का लाभ मिलेगा। बैंक से ऋण स्वीकृत होने के बाद नए लाभार्थियों को प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से उद्यमिता एवं व्यवसाय संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
बल्कि विपणन और ब्रांडिंग पर भी मिलेगी मदद
योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि सरकार केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विपणन और ब्रांडिंग पर भी विशेष ध्यान देगी। स्थानीय और राज्य स्तरीय मेलों में भाग लेने वाले उद्यमियों को स्टॉल शुल्क का 75 प्रतिशत, अधिकतम 60 हजार रुपये तक का अनुदान मिलेगा। उत्पादों की ढुलाई पर 25 हजार रुपये तक की सहायता भी दी जाएगी। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मेलों में प्रतिभाग करने पर एक लाख रुपये तक स्टॉल शुल्क व परिवहन व्यय की भी सहायता मिलेगी।
यदि कोई उद्यमी प्रदेश के बाहर आयोजित राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लेता है, तो उसे स्टॉल शुल्क पर 1.50 लाख रुपये तक, उत्पादों की ढुलाई पर 75 हजार रुपये तक व हवाई यात्रा के लिए निर्धारित सीमा तक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। एक वित्तीय वर्ष में किसी भी इकाई या उद्यमी को तीन बार तक इस सुविधा का लाभ दिया जा सकेगा। संवाद